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सेबी ने MF निवेशकों को दी बड़ी राहत, BER फॉर्मूला से खर्च होंगे पारदर्शी
BER फॉर्मूला से खर्चों का विभाजन स्पष्ट होगा, जिससे निवेशक बेहतर निर्णय ले सकेंगे. ब्रोकरेज शुल्क में कटौती और KYC प्रक्रिया में सरलता से निवेशकों की सुविधा बढ़ेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड नियमों में बड़े बदलावों का ऐलान किया है, जिससे निवेशकों को खर्च और टैक्स के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलेगी. सेबी ने बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) का नया फॉर्मूला पेश किया है, जिसके तहत फंड हाउस को मैनेजमेंट फीस और टैक्स (GST और STT) अलग-अलग दिखाने होंगे. इसका उद्देश्य निवेशकों को यह समझाना है कि उनका पैसा किस हिस्से में खर्च हो रहा है और कितनी राशि टैक्स में जा रही है.
BER फॉर्मूला से TER का फंड-खर्च का भ्रम होगा खत्म
अब तक फंड हाउस टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के नाम पर सभी खर्च एक साथ दिखाते थे, जिससे निवेशकों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता था कि फंड मैनेजमेंट पर कितना खर्च हो रहा है और कितना टैक्स में जा रहा है. नए नियमों के लागू होने के बाद, यह भ्रम खत्म हो जाएगा. ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे.
खर्च की सीमा पार करने पर AMC को खुद उठाना होगा भार
सेबी ने स्पष्ट किया है कि म्यूचुअल फंड स्कीम के सभी खर्चे स्कीम से ही दिए जाने चाहिए और उनकी एक तय सीमा होगी. अगर फंड चलाने का खर्च सेबी द्वारा तय सीमा से अधिक होता है, तो उस अतिरिक्त राशि को निवेशकों की जेब से नहीं, बल्कि एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) को अपनी जेब से उठाना होगा. इससे निवेशकों को सीधे फायदा होगा और उनकी बचत बढ़ेगी.
ब्रोकरेज चार्ज में भी कटौती
सेबी ने शेयरों की खरीद-फरोख्त पर लगने वाले ब्रोकरेज चार्ज को भी घटा दिया है. कैश मार्केट में इसे 0.12% से घटाकर 0.06% और डेरिवेटिव्स में 0.05% से घटाकर 0.02% कर दिया गया है. साथ ही, साल 2018 में शुरू किया गया 0.05% अतिरिक्त एग्जिट लोड भी अब खत्म कर दिया गया है. इसका सीधा फायदा निवेशकों को लेन-देन के खर्च में मिलेगा.
KYC प्रक्रिया होगी सरल, बार-बार दस्तावेज नहीं देना होगा
सेबी ने ग्राहकों के लिए खाता खोलने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है. इसके तहत केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों (KRAs) के रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत किया जाएगा और निवेशकों द्वारा दी गई अतिरिक्त जानकारी को एक ही जगह सेंट्रलाइज किया जाएगा. इसका लाभ यह होगा कि निवेशकों को अलग-अलग ब्रोकर्स या संस्थानों के पास जाने पर बार-बार वही जानकारी नहीं देनी पड़ेगी.
सेबी ने बार-बार होने वाली वेरिफिकेशन को भी कम करने का सुझाव दिया है. आधार से लिंक मोबाइल नंबर और अपडेटेड PAN-आधार होने पर अलग से वेरिफिकेशन या सबूत की जरूरत नहीं होगी. साथ ही, भारत में 182 दिनों से अधिक समय से रहने वाले OCI कार्ड धारकों के लिए विदेशी एड्रेस देना जरूरी नहीं होगा.
FPIs के लिए नियम आसान, विदेशी निवेश को बढ़ावा
विदेशी निवेशकों (FPIs) को आकर्षित करने के लिए सेबी ने 'SWAGAT-FI' सिस्टम के तहत नियमों को काफी आसान किया है. अब विदेशी निवेशकों को अलग-अलग श्रेणियों में रजिस्ट्रेशन के लिए अलग-अलग फॉर्म नहीं भरने होंगे. साथ ही, रजिस्ट्रेशन और केवाईसी की वैधता को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है. यह बदलाव जून 2026 से लागू होगा.
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