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बैंकिंग फ्रॉड पर लगेगी लगाम! RBI ला रहा 'किल स्विच', एक क्लिक में रुक जाएंगे खाते से सभी ट्रांजैक्शन

डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दायरे को देखते हुए RBI लगातार सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामलों में भी तेजी आई है. ऐसे में ग्राहकों की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. केंद्रीय बैंक जल्द ही ‘किल स्विच’ (Kill Switch) फीचर लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि या फ्रॉड की आशंका होने पर ग्राहक अपने बैंक खाते से होने वाले सभी डेबिट ट्रांजैक्शन को तुरंत रोक सकेंगे. इसके अलावा RBI बड़े UPI भुगतान और डिजिटल लेनदेन की निगरानी के लिए AI आधारित सिस्टम भी विकसित कर रहा है.

संदिग्ध गतिविधि दिखते ही तुरंत लॉक होगा खाता

ऑनलाइन बैंकिंग और UPI के दौर में साइबर अपराधी कुछ ही सेकंड में खातों से पैसे उड़ा सकते हैं. इस खतरे को कम करने के लिए RBI डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ‘किल स्विच’ सुविधा जोड़ने पर काम कर रहा है.

इस फीचर के सक्रिय होते ही ग्राहक अपने खाते से होने वाले सभी निकासी लेनदेन को तत्काल रोक सकेंगे. इसका उद्देश्य साइबर ठगी का शिकार होने से पहले ही ग्राहकों को अपने पैसे सुरक्षित रखने का अवसर देना है. फिलहाल इसी तरह की सुविधा डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर उपलब्ध है, जहां ग्राहक मोबाइल ऐप के जरिए कार्ड को अस्थायी रूप से ऑन या ऑफ कर सकते हैं.

डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मिलेगा नया सुरक्षा कवच

RBI का मानना है कि जिस तरह हर डिजिटल सेवा में ‘स्विच ऑन’ का विकल्प होता है, उसी तरह आपात स्थिति में ‘स्विच ऑफ’ का विकल्प भी होना चाहिए. किल स्विच इसी अवधारणा पर आधारित है. यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसका मोबाइल, बैंकिंग ऐप या अकाउंट किसी साइबर हमले की चपेट में आ गया है, तो वह तुरंत इस सुविधा का इस्तेमाल कर सभी डेबिट ट्रांजैक्शन पर रोक लगा सकेगा. इससे फ्रॉड के दौरान होने वाले वित्तीय नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकेगा.

बड़े UPI ट्रांजैक्शन पर भी बढ़ेगी निगरानी

केंद्रीय बैंक UPI के जरिए होने वाले बड़े भुगतान को लेकर भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है. हाल ही में यह प्रस्ताव सामने आया था कि पहली बार किसी व्यक्ति को बड़ी रकम ट्रांसफर करने की स्थिति में कुछ समय का टाइम-लैग रखा जाए.

इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि यदि भुगतान किसी धोखाधड़ी या दबाव में किया जा रहा हो, तो उसे पूरा होने से पहले रोका जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मिनटों की यह देरी लाखों रुपये के साइबर फ्रॉड को रोकने में मददगार साबित हो सकती है.

AI करेगा हर डिजिटल लेनदेन की निगरानी

साइबर अपराधियों से मुकाबला करने के लिए RBI इसी वर्ष डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DPIP) लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से लैस होगा और देशभर में होने वाले डिजिटल लेनदेन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगा.

यह सिस्टम प्रत्येक ट्रांजैक्शन का जोखिम स्तर निर्धारित करेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होने पर तुरंत अलर्ट जारी कर सकेगा. इससे बैंक और नियामक एजेंसियां संभावित धोखाधड़ी पर तेजी से कार्रवाई कर पाएंगी.

तेजी से बढ़ रहा है डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल

RBI के सर्वे के अनुसार, सुविधा और तेज भुगतान के कारण देश के 52 प्रतिशत लोग डिजिटल भुगतान माध्यमों का नियमित उपयोग कर रहे हैं. वहीं 67 प्रतिशत व्यापारियों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट अपनाने से उनके कारोबार में वृद्धि हुई है.

डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दायरे को देखते हुए RBI लगातार सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके.

ग्राहकों को क्या होगा फायदा?

किल स्विच और AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद ग्राहकों को साइबर फ्रॉड से अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी. संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही खाते को अस्थायी रूप से लॉक किया जा सकेगा, जबकि AI सिस्टम संभावित जोखिमों की पहले ही पहचान कर लेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि ये कदम भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
 


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