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RBI का नया ड्राफ्ट: बैंकों और NBFC को डेटा जोखिम प्रबंधन के लिए बनानी होगी मजबूत व्यवस्था
RBI का मानना है कि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बैंकों और NBFC को अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा मैनेजमेंट सिस्टम को पहले से मजबूत करना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और अन्य विनियमित संस्थाओं के लिए डेटा जोखिम प्रबंधन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से नए मानकों का मसौदा जारी किया है. प्रस्तावित नियमों के तहत संस्थानों को डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क मजबूत करना होगा, डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी और इसके लिए कार्यकारी स्तर पर निगरानी व्यवस्था भी बनानी होगी. यह कदम 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले एक्सपेक्टिड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क से पहले उठाया गया है.
RBI ने क्यों जारी किया नया मसौदा?
RBI ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ डेटा की मात्रा, विविधता और उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी सिस्टम में डेटा सटीक, सुरक्षित, एक समान और उपयोग योग्य रहे. इसी उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने डेटा गवर्नेंस और डेटा जोखिम प्रबंधन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देशों का मसौदा जारी किया है.
ECL फ्रेमवर्क से पहले होगी तैयारी
प्रस्तावित नियम ऐसे समय आए हैं, जब 1 अप्रैल 2027 से एक्सपेक्टिड क्रेडिट लॉस (ECL) फ्रेमवर्क लागू होना है. RBI का मानना है कि इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बैंकों और NBFC को अपने डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा मैनेजमेंट सिस्टम को पहले से मजबूत करना होगा.
डेटा गवर्नेंस पर रहेगा बोर्ड का फोकस
मसौदे के अनुसार, सभी बैंकों और NBFC को कार्यकारी स्तर पर डेटा गवर्नेंस कमेटी गठित करनी होगी या यह जिम्मेदारी किसी मौजूदा कार्यकारी समिति को सौंपी जा सकती है. वहीं, निदेशक मंडल (Board) को डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क की निगरानी करनी होगी और समय-समय पर इसकी समीक्षा करनी होगी. RBI ने सुझाव दिया है कि इस फ्रेमवर्क की समीक्षा कम से कम साल में एक बार या जरूरत पड़ने पर उससे अधिक बार की जाए.
डेटा जोखिम प्रबंधन के लिए क्या होंगे मानक?
RBI के मसौदे के मुताबिक, बैंकों और NBFC को अपनी समग्र जोखिम प्रबंधन प्रणाली में डेटा जोखिम को भी शामिल करना होगा. इसके तहत डेटा से जुड़े जोखिमों की पहचान, आकलन, निगरानी और प्रबंधन की स्पष्ट व्यवस्था बनानी होगी. साथ ही डेटा स्रोत (आंतरिक और बाहरी), डेटा गुणवत्ता, डेटा वर्गीकरण और बिग डेटा के उपयोग से जुड़े जोखिमों पर भी विशेष ध्यान देना होगा.
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