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सेमीकंडक्टर सेक्टर में सरकार का बड़ा दांव, ₹1.27 लाख करोड़ की नई योजना को कैबिनेट की मंजूरी

नई योजना के तहत सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैस और सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने पर परियोजना लागत का 30% तक सीधा प्रोत्साहन मिलेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 और ₹62,500 करोड़ की संशोधित मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) को मंजूरी दे दी है. नई योजनाओं के तहत चिप डिजाइन, उपकरण, विशेष रसायन, घरेलू वैल्यू एडिशन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे निवेश, उत्पादन, निर्यात और रोजगार में तेजी आने की उम्मीद है.

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पर सरकार का बड़ा फोकस

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ₹1.27 लाख करोड़ के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 के तहत अब सिर्फ चिप फैब्रिकेशन ही नहीं, बल्कि डिजाइन, उपकरण, विशेष रसायन, गैस, सामग्री और पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास पर जोर दिया जाएगा. योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश अगले दो सप्ताह में जारी किए जाएंगे.

स्टार्टअप्स और घरेलू कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने भारत में रणनीतिक और व्यावसायिक चिप डिजाइन करने वाले स्टार्टअप्स के लिए ग्रांट-प्लस-इक्विटी मॉडल का प्रस्ताव रखा है, ताकि बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) देश में ही बने रहें. वहीं, मध्यम और बड़ी भारतीय कंपनियों को चिप डिजाइन के क्षेत्र में उतारने के लिए सह-निवेश, रॉयल्टी आधारित फंडिंग और प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन की व्यवस्था की जाएगी.

मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम पर रहेगा जोर

नई योजना के तहत सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैस और सामग्री बनाने वाली कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने पर परियोजना लागत का 30% तक सीधा प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार का मानना है कि इससे चिप निर्माण के लिए आवश्यक सप्लाई चेन भी देश में विकसित होगी.

फैब्रिकेशन और पैकेजिंग के प्रोत्साहन में बदलाव

ISM 2.0 में चिप फैब्रिकेशन और पैकेजिंग इकाइयों के लिए प्रोत्साहन दरों को पहले चरण की तुलना में कम किया गया है. सिलिकॉन फैब्रिकेशन इकाइयों के लिए प्रोत्साहन 50% से घटाकर 40% और अन्य फैब्रिकेशन इकाइयों के लिए 35% कर दिया गया है. वहीं एडवांस्ड पैकेजिंग इकाइयों को 35% और पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को 25% तक प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार का कहना है कि पहले चरण में 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद अब फोकस पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर है.

रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट को मिलेगा समर्थन

सरकार उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों को केंद्रीय और राज्य सरकारों की ओर से कुल परियोजना लागत का 75% तक संयुक्त प्रोत्साहन देगी. इसका उद्देश्य रिसर्च, इनोवेशन और कुशल मानव संसाधन तैयार करना है.

₹4 लाख करोड़ निवेश और 1 लाख करोड़ निर्यात का लक्ष्य

सरकार का अनुमान है कि इस मिशन के जरिए करीब ₹4 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित होगा. इससे ₹2 लाख करोड़ का उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ का निर्यात हासिल किया जा सकेगा. अब तक पहले चरण के तहत ₹1.60 लाख करोड़ से अधिक निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है.

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को भी मिला बड़ा प्रोत्साहन

कैबिनेट ने ₹62,500 करोड़ की संशोधित मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग योजना (MPMS) को भी मंजूरी दी है. नई योजना में प्रोत्साहन उत्पादन आधारित मॉडल की बजाय घरेलू वैल्यू एडिशन और स्थानीय सोर्सिंग के आधार पर दिया जाएगा. साथ ही भारतीय कंपनियों को मोबाइल डिजाइन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और स्वदेशी बौद्धिक संपदा विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा.

उत्पादन, निर्यात और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य अगले छह वर्षों में मोबाइल फोन उत्पादन को ₹39 लाख करोड़ तक पहुंचाना, ₹15 लाख करोड़ का निर्यात हासिल करना और मोबाइल विनिर्माण व इससे जुड़े क्षेत्रों में 60,000 अतिरिक्त रोजगार सृजित करना है. इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
 


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