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LiLLBUD ने जुटाए ₹6 करोड़, भारत के अर्ली लर्निंग मार्केट में बढ़ाए कदम

इस फंडिंग राउंड में CRED के संस्थापक कुणाल शाह और Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल समेत कई एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

अर्ली लर्निंग स्टार्टअप LiLLBUD ने ₹6 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है. यह निवेश Zeropearl VC की अगुवाई में हुआ है. कंपनी 0-3 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सुरक्षित और BIS-प्रमाणित शैक्षणिक उत्पाद विकसित कर रही है. इस फंडिंग राउंड में CRED के संस्थापक कुणाल शाह और Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल समेत कई एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है.

0-3 वर्ष के बच्चों के लिए अर्ली लर्निंग प्रोडक्ट्स बनाने वाले स्टार्टअप LiLLBUD ने ₹6 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है. इस निवेश दौर का नेतृत्व Zeropearl VC ने किया. व्यक्तिगत क्षमता में निवेश करने वालों में CRED के संस्थापक कुणाल शाह, Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल और उपभोक्ता एवं सप्लाई चेन क्षेत्र के कई निवेशक शामिल रहे.

100 नए उत्पाद लॉन्च करने की तैयारी

कंपनी ने बताया कि जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक 18-36 महीने की आयु के बच्चों के लिए 100 नए उत्पाद लॉन्च करने, क्विक कॉमर्स वितरण नेटवर्क को मजबूत करने, सप्लाई चेन विस्तार और ब्रांड निर्माण पर किया जाएगा.

भारत में तेजी से बढ़ रहा है अर्ली लर्निंग बाजार

भारत में हर साल लगभग 2.3 करोड़ बच्चों का जन्म होता है, जो दुनिया में सबसे बड़ा जन्म समूह है. इसके बावजूद छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रमाणित शैक्षणिक उत्पादों के विकल्प सीमित हैं. देश का खिलौना बाजार वर्ष 2025 में करीब 2.1 अरब डॉलर का था, जो 2034 तक बढ़कर लगभग 4.7 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. शिक्षा और विकास आधारित खिलौने इस बाजार के सबसे तेजी से बढ़ने वाले वर्गों में शामिल हैं.

सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती

कंपनी का कहना है कि भारत में खिलौनों के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य होने के बावजूद बाजार में बड़ी संख्या में ऐसे उत्पाद मौजूद हैं, जिनके पास सुरक्षा प्रमाणन नहीं है. ऐसे खिलौनों में भारी धातुएं जैसे सीसा (Lead) पाए जाने के मामले सामने आए हैं, जो बच्चों के मानसिक विकास पर दीर्घकालिक असर डाल सकते हैं. LiLLBUD का पूरा उत्पाद पोर्टफोलियो BIS-प्रमाणित है, जिससे कंपनी माता-पिता की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रही है.

आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्रों ने की स्थापना

कंपनी की स्थापना अभिषेक शर्मा और आयुष बंसल ने की है. अभिषेक शर्मा आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और इससे पहले Shadowfax तथा CityMall से जुड़े रहे हैं. वहीं, आयुष बंसल आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं तथा BCG और BYJU'S में काम कर चुके हैं.

कंपनी मोंटेसरी पद्धति से प्रेरित खिलौने और लर्निंग प्रोडक्ट्स तैयार करती है, जो बच्चों के संज्ञानात्मक, संवेदी और मोटर कौशल के विकास में मदद करते हैं.

तीन साल की उम्र तक होता है 80% मस्तिष्क विकास

कंपनी के अनुसार, वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 80 प्रतिशत विकास तीन वर्ष की उम्र से पहले हो जाता है. इसी कारण 0-3 वर्ष की आयु को संज्ञानात्मक और संवेदी विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है.

LiLLBUD को अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन प्लेटफॉर्म Rocket Learning के सह-संस्थापक अजीज गुप्ता का भी मार्गदर्शन मिल रहा है, जो कंपनी में निवेशक और सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं.

पिता बनने के अनुभव से जन्मा स्टार्टअप का विचार

कंपनी के सह-संस्थापक आयुष बंसल ने बताया कि पिता बनने की तैयारी के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि बाजार में सुरक्षित, वैज्ञानिक आधार वाले और भरोसेमंद अर्ली लर्निंग उत्पादों की कमी है. इसी अनुभव ने LiLLBUD की नींव रखी.

एक साल में 3.5 करोड़ रुपये की रन रेट

मई 2025 में लॉन्च होने के बाद कंपनी ने 3.5 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व रन रेट हासिल कर ली है. वर्तमान में कंपनी के पास 200 से अधिक उत्पाद हैं, जो उसकी वेबसाइट के अलावा Amazon, Flipkart और Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं.

कंपनी का भविष्य का रोडमैप

LiLLBUD आने वाले समय में क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स चैनलों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने, BIS-प्रमाणित उत्पादों की संख्या बढ़ाने और बच्चों के शुरुआती विकास से जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में भरोसेमंद ब्रांड बनने की दिशा में काम करेगी. कंपनी का लक्ष्य भारत में अर्ली चाइल्डहुड प्रोडक्ट्स के लिए सुरक्षा और विकास का नया मानक स्थापित करना है.
 


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