होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / मार्केटप्लेस के पीछे का खेल: डिजिटल उपभोक्ता शोषण का नया चेहरा

मार्केटप्लेस के पीछे का खेल: डिजिटल उपभोक्ता शोषण का नया चेहरा

डिजिटल कॉमर्स की असली सफलता केवल बिक्री बढ़ाने में नहीं, बल्कि पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने में निहित है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 day ago

ऑनलाइन शॉपिंग ने भारतीयों के उत्पाद खोजने, तुलना करने और खरीदने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. लेकिन आकर्षक ऑफर्स और सहज इंटरफेस के पीछे एक कम दिखाई देने वाली प्रवृत्ति अब बढ़ती जांच के दायरे में आ रही है. बाजार अनुसंधान फर्म Datum Intelligence की जून 2026 की रिपोर्ट ‘The Dark Patterns in India’s Online Marketplaces’ के अनुसार, भारत के उपभोक्ताओं को भ्रामक ऑनलाइन डिजाइन प्रथाओं के कारण हर साल 25,000 करोड़ रुपये से 28,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान है.

इन नुकसानों को अब वित्तीय निष्कर्षण (Financial Extraction) का एक रूप माना जा रहा है, जहां प्लेटफॉर्म अधिक मूल्य सृजित करने के बजाय डिजाइन विकल्पों के माध्यम से उपभोक्ताओं के निर्णयों को प्रभावित करके अतिरिक्त राजस्व अर्जित करते हैं. छिपे हुए शुल्क, पहले से चयनित सब्सक्रिप्शन, जबरन जोड़े गए विकल्प, बाहर निकलने की जटिल प्रक्रियाएं और जल्दबाजी का माहौल बनाने वाले संकेत व्यक्तिगत रूप से भले ही मामूली लगें, लेकिन सामूहिक रूप से ये अनजाने खर्च को काफी बढ़ा देते हैं.

डिजिटल दबाव में उपभोक्ता का मन

इन प्रथाओं का प्रभाव केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ता मनोविज्ञान तक भी पहुंचता है. डिजिटल वातावरण को निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए डिजाइन किया जाता है, लेकिन यही सुविधा कभी-कभी सतर्कता को भी कम कर देती है.

उपभोक्ता इन जालों में क्यों फंसते रहते हैं, इसका एक कारण ‘अवेयरनेस पैराडॉक्स’ है. भले ही खरीदार यह समझते हों कि प्लेटफॉर्म उन पर प्रभाव डालने वाली रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, फिर भी खरीदारी के समय वे अक्सर उनके प्रभाव में आ जाते हैं. हेरफेर की जानकारी होना हमेशा उससे बचाव की गारंटी नहीं देता.

जब उपभोक्ता चेकआउट तक पहुंचते हैं, तब तक वे विकल्पों की तुलना करने और निर्णय लेने में काफी समय लगा चुके होते हैं. उस समय खरीदारी छोड़ देना मनोवैज्ञानिक रूप से महंगा महसूस होता है. व्यवहार वैज्ञानिक इस प्रवृत्ति को ‘एस्केलेशन ऑफ कमिटमेंट’ कहते हैं, जिसमें व्यक्ति पहले किए गए प्रयास को सही साबित करने के लिए उसी निर्णय पर आगे बढ़ता रहता है.

एक अन्य कारण ‘डिसीजन फटीग’ यानी निर्णय थकान है. लगातार मिलने वाले डिस्काउंट, सिफारिशें, काउंटडाउन और नोटिफिकेशन मानसिक क्षमता को कम कर देते हैं. ऐसे में उपभोक्ता सोच-समझकर निर्णय लेने के बजाय डिफॉल्ट विकल्पों को स्वीकार करने लगते हैं, जिससे छिपे हुए शुल्क या अतिरिक्त सेवाओं को मान लेना आसान हो जाता है.

अल्पकालिक लाभ, दीर्घकालिक नुकसान

व्यवसायों के लिए भ्रामक इंटरफेस अल्पकाल में कन्वर्जन रेट बढ़ा सकते हैं और औसत लेनदेन मूल्य में इजाफा कर सकते हैं. हालांकि, ये लाभ लंबे समय में भारी कीमत भी वसूल सकते हैं. लगातार ऐसे अनुभव उपभोक्ताओं में अविश्वास, खरीदारी के बाद पछतावा और यह धारणा पैदा करते हैं कि ऑनलाइन कीमतें पूरी तरह पारदर्शी नहीं हैं. ग्राहक अधिक संदेह करने लगते हैं, जानकारी की जांच में अधिक समय लगाते हैं और खरीदारी के निर्णयों को टालने लगते हैं.

समय के साथ यह डिजिटल थकान, प्लेटफॉर्म के प्रति कम वफादारी और मार्केटिंग संदेशों के प्रति बढ़ते प्रतिरोध का कारण बन सकता है. उपभोक्ता हर ऑफर को संदेह की नजर से देखने लगते हैं, जिससे डिजिटल कॉमर्स की सबसे महत्वपूर्ण पूंजी यानी विश्वास कमजोर पड़ने लगता है.

मार्केटर्स के सामने खड़े बड़े सवाल

जैसे-जैसे डार्क पैटर्न्स को लेकर प्लेटफॉर्म की जांच बढ़ रही है, वैसे-वैसे मार्केटर्स के सामने भी कठिन सवाल खड़े हो रहे हैं. मनाने की कला हमेशा से व्यापार का हिस्सा रही है, लेकिन जब ऑप्टिमाइजेशन वित्तीय निष्कर्षण में बदलने लगे, तब नैतिक चिंताएं भी बढ़ जाती हैं.

आज बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या उपभोक्ता सुविधा की कीमत सूचित निर्णय की क्षमता को कमजोर करके चुकाई जा रही है. क्या व्यवहार आधारित डिजाइन नैतिक सीमाओं के भीतर रह सकता है या वह हेरफेर में बदल जाता है. और क्या लंबे समय तक भरोसा कायम रह सकता है, जब उपभोक्ता हर क्लिक के बाद यह सोचने लगें कि यह उनका अपना फैसला था या किसी ने उसे चुपचाप प्रभावित किया था.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखिका के अपने हैं और आवश्यक नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करें.)

अतिथि लेखिका-डॉ. सीता मिश्रा, प्रोफेसर (मार्केटिंग), IMT गाजियाबाद
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

मार्केटिंग का सबसे बड़ा बदलाव, अब क्रिएटर्स बन रहे हैं रणनीतिक बिजनेस पार्टनर

भारत में डिजिटल खरीदारी अब काफी हद तक विजुअल, मोबाइल-केंद्रित और क्रिएटर-आधारित हो चुकी है, जिसे 49.1 करोड़ से अधिक सक्रिय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और ई-रिटेल के तेज विस्तार से बल मिला है.

1 day ago

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

2 days ago

3C फ्रेमवर्क से बंगाल की आर्थिक पुनर्बहाली को मिलेगी नई दिशा

बंगाल की चुनौती संसाधनों की कमी नहीं है. वास्तविक समस्या यह है कि राज्य अपनी मौजूदा संपत्तियों को एक प्रभावी आर्थिक रणनीति में बदलने में विफल रहा है.

2 days ago

भारत-जापान साझेदारी और मानव-केंद्रित एआई का भविष्य

प्रोफेसर सी. राज कुमार लिखते हैं, 'भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं.

1 week ago

ईरान को ‘अनफ्रीज’ करना: असली चुनौती अब शुरू होगी

सिद्धार्थ अरोड़ा लिखते हैं, 'अमेरिका-ईरान शांति समझौता अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और रिपोर्टों के अनुसार 60 दिनों की अवधि में लगभग 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं. ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यह पैसा जब ईरान पहुंचेगा, तब उसका क्या होगा?'

1 week ago


बड़ी खबरें

सेबी का नया विज्ञापन कोड: सेलिब्रिटी करेंगे ब्रांड प्रमोट, स्कीम बेचने पर रोक

नए नियमों के तहत अब स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और पोर्टफोलियो मैनेजर अपने कॉरपोरेट ब्रांड के प्रचार के लिए सेलिब्रिटी की सेवाएं ले सकेंगे.

8 hours ago

MoEngage ने AI कंपनी Aampe का किया अधिग्रहण, ग्राहक जुड़ाव तकनीक को मिलेगी नई ताकत

पर्सनलाइज्ड मार्केटिंग और एआई-आधारित कस्टमर एंगेजमेंट को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

3 hours ago

टियर-2 शहरों और जेन-जेड ने बढ़ाई रफ्तार, फ्लिपकार्ट मिनट्स की पहुंच 130 शहरों तक

कंपनी के अनुसार, क्विक कॉमर्स की अगली वृद्धि देश के उभरते बाजारों से आ रही है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में पिछले एक वर्ष के दौरान 42 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.

3 hours ago

हेल्थ एंड न्यूट्रिशन कारोबार में होनासा का कदम, फ्लुएंस फार्मा में खरीदी 58% हिस्सेदारी

इस अधिग्रहण के बाद होनासा कंज्यूमर अपनी नई सहायक कंपनी ‘होनासा हेल्थ’ की स्थापना करेगी. इस इकाई के माध्यम से कंपनी उपभोक्ताओं के लिए पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों का पोर्टफोलियो तैयार करेगी.

5 hours ago

किसानों के लिए अमित शाह का बड़ा ऐलान, दलहन-तिलहन का एक-एक दाना खरीदेगी NAFED-NCCF

सहकारिता मंत्री ने कहा कि फसल खरीद के बाद किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाए.

7 hours ago