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भारत-जापान साझेदारी और मानव-केंद्रित एआई का भविष्य

प्रोफेसर सी. राज कुमार लिखते हैं, 'भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago

वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रभाव और उसका विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाला असर हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण कहानियों में से एक है. AI अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शासन व्यवस्था और सामाजिक, नागरिक एवं राजनीतिक जीवन की नई कल्पना कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि वैश्विक रोजगार का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा AI से प्रभावित होगा. उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि बड़े पैमाने पर तत्काल छंटनी होगी, लेकिन श्रम बाजार में व्यवधान के शुरुआती संकेत पहले से दिखाई देने लगे हैं.

भारत के संदर्भ में यह चुनौती इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रोजगार, युवाओं की आकांक्षाएं और सामाजिक गतिशीलता जैसे मुद्दों का समाधान आवश्यक है. दूसरी ओर, AI का प्रभाव जापान पर अलग तरीके से पड़ रहा है और उसने एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा किया है: प्रौद्योगिकी किस प्रकार और किस सीमा तक एक वृद्ध होती आबादी वाले समाज की सहायता कर सकती है, जबकि मानव गरिमा और सामुदायिक चेतना पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े?

यह ऐतिहासिक मोड़ और भारत तथा जापान दोनों पर AI का प्रभाव वैश्विक AI शासन (गवर्नेंस) के भविष्य को लेकर संयुक्त साझेदारी विकसित करने का अवसर प्रदान करता है.

दुनिया भर में AI पर बहस मुख्य रूप से तीन अलग-अलग दृष्टिकोणों पर आधारित है. अमेरिका का मॉडल बाजार-आधारित नवाचार अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है, यूरोपीय मॉडल अधिकार-आधारित नियामकीय व्यवस्था पर केंद्रित है, जबकि चीन का मॉडल बड़े पैमाने पर राज्य-नेतृत्व वाले और तकनीकी रूप से नियंत्रित समाज का समर्थन करता है.

वैश्विक AI के लिए चौथा रास्ता: मानव-केंद्रित दृष्टिकोण

भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं: मानव-केंद्रित AI. मानव-केंद्रित AI की अवधारणा लोकतंत्र, सामाजिक अनुबंध, सभ्यतागत विरासत तथा न्यायसंगत और समावेशी विकास के सिद्धांतों में गहराई से निहित है.

जापान में इस मॉडल की मजबूत बौद्धिक नींव मौजूद है, जिसे ‘सोसाइटी 5.0’ की अवधारणा में व्यक्त किया गया है. यह एक ऐसे मानव-केंद्रित समाज की परिकल्पना करता है, जहां आर्थिक विकास और सामाजिक चुनौतियों के समाधान को एकीकृत किया जाए.

भारत में तकनीकी परिवर्तन का नेतृत्व डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडिया AI मिशन, डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म्स के विस्तार और कुशल प्रतिभा की बढ़ती उपलब्धता के माध्यम से हुआ है, जो जापान के लिए भारत को एक मजबूत साझेदार बनाता है.

यदि भारत और जापान मिलकर ऐसा AI गवर्नेंस मॉडल विकसित कर सकें जो केवल यह न पूछे कि एल्गोरिदम क्या कर सकते हैं, बल्कि यह पूछे कि एल्गोरिदम ऐसे समाज की कैसे सहायता कर सकते हैं जहां तकनीक लोगों की सेवा करे, तो AI गवर्नेंस के कई महत्वपूर्ण आयामों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता होगी.

पहला, AI को मानव गरिमा की रक्षा करनी चाहिए और मानव उद्देश्य का स्थान नहीं लेना चाहिए. दूसरा, AI का मानव-केंद्रित दृष्टिकोण मानव क्षमताओं का विस्तार और सशक्तीकरण करे, न कि मानव कल्पनाशीलता को कमजोर करे.

AI को लोगों को सशक्त बनाना चाहिए, प्रतिस्थापित नहीं

मानव क्षमताओं का विस्तार भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां युवाओं के रोजगार का प्रश्न सामाजिक एकीकरण, राष्ट्रीय विकास और सामुदायिक आकांक्षाओं से जुड़ा हुआ है.

हमें यह स्वीकार करना होगा कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना AI की तैनाती श्रमिकों के विस्थापन, प्रारंभिक स्तर की नौकरियों में कमी और समाज में पहले से मौजूद असमानताओं को बढ़ाने का कारण बन सकती है.

उत्पादकता बढ़ाने के लिए AI का उपयोग समझ में आता है. हालांकि हमें ऐसे AI मॉडल से बचना होगा, जो ‘रोजगार-विहीन विकास’ का साधन बन जाए.

इस संदर्भ में जापान का अनुभव महत्वपूर्ण है. एक उन्नत अर्थव्यवस्था और तकनीक-आधारित समाज के रूप में जापान ने दशकों से श्रम की कमी की चुनौती से निपटने के लिए रोबोटिक्स और तकनीकी स्वचालन को अपनाया है. साथ ही, उसने दक्षता बढ़ाने, सटीकता में सुधार करने और विनिर्माण क्षमताओं का विस्तार करने के लिए तकनीक का उपयोग किया है. इन सभी प्रयासों ने जापान को वृद्ध होती आबादी की चुनौती का सामना करने में मदद की है.

भारत-जापान AI साझेदारी के तहत AI गवर्नेंस का एजेंडा इस बात पर केंद्रित होना चाहिए कि AI काम को सशक्त बनाए, न कि श्रमिकों की जगह ले. भारत में AI गवर्नेंस की सार्वजनिक नीति लोगों को अधिक उत्पादक और सक्षम बनाए, न कि उन्हें अप्रासंगिक बना दे.

लोकतांत्रिक और समावेशी AI गवर्नेंस का निर्माण

AI गवर्नेंस को लोकतांत्रिक और विश्वसनीय भी होना चाहिए. भविष्य में AI प्रणालियां वित्तीय प्रबंधन, ऋण व्यवस्था, रोजगार के अवसर, पुलिसिंग, शिक्षा और यहां तक कि सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण नीतियों से जुड़े निर्णयों को प्रभावित करेंगी.

पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह प्रणालियों का विकास तथा आवश्यक सुरक्षा उपायों की स्थापना यह सुनिश्चित करेगी कि AI गवर्नेंस संवैधानिक मूल्यों और सार्वजनिक विश्वास के अनुरूप हो.

भारत और जापान को गोपनीयता, नैतिकता, निष्पक्षता, सुरक्षा और संरक्षा के सिद्धांतों पर आधारित लोकतांत्रिक और समावेशी AI गवर्नेंस मॉडल विकसित करने के लिए मिलकर नेतृत्व करना चाहिए.

हिरोशिमा AI प्रक्रिया और भारत का विकसित होता AI गवर्नेंस ढांचा दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी की नींव प्रदान करते हैं. भारत और जापान मिलकर वैश्विक स्तर पर मापनीय गुणवत्ता मानक, परीक्षण प्रणाली, जोखिम मूल्यांकन मानदंड, ऑडिट तंत्र और शिक्षा, वित्त, कानून एवं न्याय, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक नीति तथा रोजगार जैसे क्षेत्रों के लिए AI नीतियां तैयार कर सकते हैं.

मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस के लिए संयुक्त भारत-जापान केंद्र की स्थापना विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, नियामकों, नीति निर्माताओं, सांसदों, मीडिया, नागरिक समाज और तकनीकी विशेषज्ञों को एक साथ लाने का अवसर बन सकती है.

समाज के लिए AI का उपयोग

तीसरा, AI का फोकस केवल व्यावसायिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सामाजिक क्षेत्रों पर भी होना चाहिए. AI शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, टिकाऊ कृषि पद्धतियों, रोग पहचान, भारतीय भाषाओं में ज्ञान के अनुवाद और सार्वजनिक सेवाओं की पहुंच में सुधार कर सकता है.

जापान में AI पहले ही वृद्धजनों की देखभाल, आपदा तैयारी, दूरस्थ स्वास्थ्य निगरानी, शहरी नियोजन और दिव्यांगजनों के लिए सहायक तकनीकों के विकास में योगदान दे रहा है.

भारत और जापान के लिए मानव-केंद्रित AI एजेंडा को पांच प्रमुख सामाजिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए: स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, वृद्ध होती आबादी और आपदा प्रबंधन.

संस्कृति, भाषा और सभ्यतागत विरासत की सुरक्षा

AI को संस्कृति, भाषा और सभ्यतागत विरासत का सम्मान करना चाहिए. यह चिंता वास्तविक है कि अंग्रेजी भाषा के डेटा और पश्चिमी सांस्कृतिक प्रणालियों पर आधारित प्रमुख AI मॉडल सांस्कृतिक विविधता को हाशिए पर डाल सकते हैं.

भारत और जापान मिलकर यह तर्क प्रस्तुत कर सकते हैं कि AI गवर्नेंस को भाषाई विविधता, स्थानीय ज्ञान, सामुदायिक सहभागिता, सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत, बहुलतावादी सोच और नैतिक परंपराओं की रक्षा करनी चाहिए.

भारतीय सभ्यता की गहराई और जापानी तकनीकी दक्षता के संयोजन से ऐसा AI मॉडल विकसित किया जा सकता है जो स्मृति, संस्कृति, परंपरा, इतिहास और विविधता का संरक्षण और उत्सव मनाए.

भारत-जापान मानव-केंद्रित AI साझेदारी के पांच स्तंभ

भारत और जापान के बीच एक दुर्लभ, रणनीतिक और ऐतिहासिक रूप से विकसित मित्रता है. इस सद्भावना को विश्वास में बदलकर AI अनुसंधान, सेमीकंडक्टर, डेटा गवर्नेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर गवर्नेंस, इंटरनेट सुरक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सकता है.

भारत और जापान को पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस साझेदारी शुरू करनी चाहिए: संयुक्त अनुसंधान, सामाजिक क्षेत्रों के लिए AI, नैतिक AI मानक, AI कौशल एवं प्रतिभा विनिमय तथा AI आधारित सार्वजनिक नीति पहल.

आगे का रास्ता: वैश्विक AI के लिए चौथा मार्ग

वैश्विक AI के लिए चौथे मार्ग की परिकल्पना के लिए भारत और जापान को यह समझना होगा कि भविष्य में AI का मूल्यांकन केवल तकनीकी कार्यक्रमों और एल्गोरिदम की जटिलता से नहीं होगा, बल्कि इस आधार पर होगा कि तकनीक मानव स्वतंत्रता को कितना मजबूत करती है.

क्या तकनीक मानव गरिमा सुनिश्चित कर सकती है? क्या AI मानव रचनात्मकता को बढ़ावा दे सकता है? क्या AI नए रोजगार अवसर पैदा कर सकता है? क्या AI दिव्यांगों, बुजुर्गों और वंचित समुदायों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित कर सकता है? और अंततः, क्या AI वह सार्वजनिक विश्वास पैदा कर सकता है जो मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस के केंद्र में होना चाहिए?

जब भारत और जापान साथ आएंगे, तब AI गवर्नेंस का एक चौथा मार्ग विकसित किया जा सकेगा. यह मार्ग अनूठा होगा क्योंकि यह केवल बाजार-आधारित, नौकरशाही-प्रेरित या राज्य-नियंत्रित नहीं होगा, बल्कि मानव-केंद्रित, गहन लोकतांत्रिक, सचेत रूप से समावेशी और सभ्यतागत विरासत पर आधारित होगा.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं और जरूरी नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों का प्रतिनिधित्व करते हों.)

अतिथि लेखक- सी. राज कुमार

(प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार रोड्स स्कॉलर हैं और हरियाणा के सोनीपत स्थित ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (JGU) के संस्थापक कुलपति हैं.)
 


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