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क्या CBG से बदलेगी भारत की ऊर्जा तस्वीर? नीतियों से आगे बढ़कर मजबूत इकोसिस्टम बनाने की चुनौती

इस लेख में लेखक विशाल खाल्दे ने संस्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में CBG की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से अपने विचार साझा किए हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago

भारत का स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, और कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) इसके सबसे आशाजनक विकास इंजनों में से एक के रूप में उभर रही है. कृषि अवशेषों, नगर निगम के जैविक कचरे और औद्योगिक बायोमास को नवीकरणीय ऊर्जा में परिवर्तित करके, CBG में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, उत्सर्जन को कम करने और एक परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को आगे बढ़ाने की क्षमता है.

जैसे-जैसे भारत अपने नेट-ज़ीरो लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आयातित जीवाश्म ईंधनों पर अपनी निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है, CBG जैसे नवीकरणीय ईंधनों से देश के ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है. कई अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विपरीत, CBG एक साथ दो महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करती है, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन. यही दोहरा लाभ इसे भारत के व्यापक सतत विकास एजेंडा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है.

SATAT जैसी सरकारी पहल ने इस क्षेत्र में मजबूत गति प्रदान की है. हालांकि, नीतियाँ केवल अवसरों के द्वार खोल सकती हैं. दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) कैसे विकसित किया जाता है.

लक्ष्यों से अधिक महत्वपूर्ण होगा प्रभावी क्रियान्वयन

भारत के पास प्रचुर मात्रा में बायोमास संसाधन और सहायक नीतिगत ढाँचा मौजूद है. लेकिन CBG का व्यापक स्तर पर विस्तार केवल महत्वाकांक्षी लक्ष्यों से संभव नहीं होगा. विश्वसनीय फीडस्टॉक आपूर्ति, कुशल अवसंरचना, वित्त तक पहुँच और परिचालन उत्कृष्टता यह तय करेंगे कि परियोजनाएँ लंबे समय तक आर्थिक रूप से व्यवहार्य रह पाएँगी या नहीं.

फीडस्टॉक का संग्रहण और एकत्रीकरण आज भी इस क्षेत्र की सबसे बड़ी परिचालन चुनौतियों में से एक है. कृषि अवशेष अक्सर विभिन्न क्षेत्रों में बिखरे हुए होते हैं, जबकि नगर निगम के कचरे में स्रोत स्तर पर उचित पृथक्करण (Segregation) का अभाव रहता है. यदि संग्रहण, परिवहन और भंडारण की कुशल व्यवस्था नहीं होगी, तो संयंत्रों का निरंतर संचालन बनाए रखना कठिन हो जाएगा. इसलिए इन आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना व्यावसायिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक होगा.

इसी प्रकार, दीर्घकालिक वित्तपोषण तक पहुँच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. चूँकि CBG परियोजनाओं में पर्याप्त पूंजी निवेश और अपेक्षाकृत लंबी विकास अवधि होती है, इसलिए परियोजना डेवलपर्स को ऐसे पूर्वानुमेय राजस्व मॉडल और वित्तीय व्यवस्थाओं की आवश्यकता होती है जो दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करें. वित्तीय संस्थान और निजी निवेशक भी नवीकरणीय गैस परियोजनाओं के दीर्घकालिक मूल्य को पहचानते हुए इसमें बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

कचरा ही भारत का सबसे बड़ा अवसर है

CBG का भविष्य इस सोच में निहित है कि कचरे को समस्या नहीं, बल्कि एक संसाधन के रूप में देखा जाए. कृषि अवशेष, नगर निगम का जैविक कचरा, पशुधन अपशिष्ट और खाद्य अपशिष्ट, इन सभी को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है, साथ ही लैंडफिल पर निर्भरता, मीथेन उत्सर्जन और खेतों में पराली जलाने जैसी समस्याओं को भी कम किया जा सकता है. यहीं पर CBG केवल एक वैकल्पिक ईंधन नहीं रह जाती, बल्कि परिपत्र अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण सक्षमकर्ता बन जाती है.

नवीकरणीय ईंधन के उत्पादन के अलावा, CBG संयंत्र उप-उत्पाद (By-product) के रूप में पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद भी उत्पन्न करते हैं, जिससे कृषि क्षेत्र के लिए अतिरिक्त मूल्य सृजित होता है. यह परिपत्र अर्थव्यवस्था के उस सिद्धांत को मजबूत करता है जिसमें एक क्षेत्र द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट दूसरे क्षेत्र के लिए एक मूल्यवान संसाधन बन जाता है. इस प्रकार का एकीकृत संसाधन उपयोग न केवल पर्यावरणीय परिणामों को बेहतर बनाता है, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों पारिस्थितिकी तंत्रों में नए आर्थिक अवसर भी उत्पन्न करता है.

प्रौद्योगिकी और सहयोग से ही होगा विस्तार

अधिक मीथेन उत्पादन, बेहतर गैस शुद्धिकरण, स्वचालन और डिजिटल निगरानी जैसी तकनीकें CBG संयंत्रों को अधिक कुशल और व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी बना रही हैं. साथ ही, नगर निकायों, किसानों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, गैस वितरण कंपनियों और निजी उद्योग के बीच मजबूत सहयोग फीडस्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित करने और परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए अत्यंत आवश्यक होगा.

आने वाले वर्षों में तकनीकी नवाचार इस क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने की संभावना रखते हैं. एनारोबिक डाइजेशन, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, प्रक्रिया स्वचालन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी प्रौद्योगिकियों में प्रगति संयंत्रों की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ परिचालन लागत को भी कम कर रही है. ये नवाचार संयंत्रों के संचालन समय को बढ़ाने, मीथेन रिकवरी को अधिकतम करने और परियोजनाओं की समग्र आर्थिक व्यवहार्यता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

हालाँकि, केवल तकनीक एक सफल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण नहीं कर सकती. नगर निकायों, कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों, किसानों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों और नीति निर्माताओं के बीच प्रभावी समन्वय यह तय करेगा कि परियोजनाओं को कितनी दक्षता से लागू और विस्तारित किया जा सकता है. सहयोगात्मक दृष्टिकोण लॉजिस्टिक चुनौतियों को दूर करने, फीडस्टॉक की उपलब्धता बढ़ाने और निवेशकों का विश्वास मजबूत करने में सहायक होगा.

नीतियों से आगे की सोच

नीतियाँ गति प्रदान करती हैं. पारिस्थितिकी तंत्र उद्योगों का निर्माण करते हैं.

भारत के पास एक सफल CBG पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए आवश्यक सभी आधारभूत तत्व मौजूद हैं. अब चुनौती बेहतर अवसंरचना, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं, तकनीकी नवाचार और निरंतर निवेश के माध्यम से प्रभावी क्रियान्वयन की है.

जैसे-जैसे यह क्षेत्र परिपक्व होगा, वैसे-वैसे ऐसे व्यावसायिक रूप से टिकाऊ मॉडल विकसित करने पर अधिक ध्यान देना होगा जो केवल नीतिगत समर्थन पर निर्भर न रहें. दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के लिए अवसंरचना, नवाचार, कौशल विकास और संस्थागत क्षमता में निवेश भी समान रूप से आवश्यक होगा.

CBG केवल एक वैकल्पिक परिवहन ईंधन के उत्पादन तक सीमित नहीं है. इसमें कचरे को एक मूल्यवान आर्थिक संसाधन में बदलने, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, संगठित बायोमास संग्रहण के माध्यम से ग्रामीण आजीविकाओं को समर्थन देने, कचरा प्रबंधन प्रणालियों में सुधार लाने और देश को परिपत्र एवं निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ाने की क्षमता है. इस क्षमता को साकार करने के लिए नीति निर्माताओं, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और स्थानीय निकायों—सभी को निरंतर और सामूहिक प्रयास करने होंगे.

भारत की CBG महत्वाकांक्षाओं की सफलता केवल घोषित लक्ष्यों या स्थापित किए गए संयंत्रों की संख्या से नहीं आँकी जाएगी. इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि देश कितनी प्रभावी ढंग से मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाएँ विकसित करता है, कचरा प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ बनाता है, तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करता है और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य मॉडल तैयार करता है. यदि ये सभी आधारभूत तत्व एक साथ आते हैं, तो CBG केवल एक नीतिगत आकांक्षा नहीं रहेगी, बल्कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और परिपत्र अर्थव्यवस्था की आधारशिला बन सकती है.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखिका के अपने हैं और आवश्यक नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करें.)

अतिथि लेखक: विशाल खाल्दे, संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), ब्लू प्लैनेट बायोफ्यूल्स

 


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