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गुजरात का स्वर्णिम अवसर: क्यों अगली वैश्विक विनिर्माण क्रांति की शुरुआत यहीं से हो सकती है

लेखक के अनुसार, यह समय गुजरात के लिए बेहद अनुकूल है. CETA के तहत भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन में लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

दुनिया का विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) परिदृश्य तेजी से बदल रहा है. कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को विविध बनाने, भरोसेमंद उत्पादन केंद्र तलाशने और स्वच्छ व प्रौद्योगिकी-आधारित विनिर्माण को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. इसके साथ ही दुनिया के देशों और राज्यों के बीच वैश्विक निवेश का पसंदीदा केंद्र बनने की नई प्रतिस्पर्धा शुरू हो चुकी है. भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर है और गुजरात के लिए यह बदलावकारी साबित हो सकता है.

भारत-यूके CETA: गुजरात के लिए नए अवसरों का द्वार

15 जुलाई 2026 से लागू हो रहा भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) केवल शुल्क में कटौती तक सीमित नहीं है. यह एक रणनीतिक आर्थिक साझेदारी है, जिसका उद्देश्य व्यापार बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना, प्रौद्योगिकी सहयोग को मजबूत करना और कुशल पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाना है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह समझौता भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) से और अधिक जोड़ता है. इस अवसर का सबसे अधिक लाभ उठाने की क्षमता यदि किसी राज्य में है, तो वह गुजरात है.

इतिहास बताता है कि हर बड़ा आर्थिक परिवर्तन वैश्विक विनिर्माण के नए केंद्रों को जन्म देता है. 1960 के दशक में जापान ने औद्योगिक पुनर्जागरण का नेतृत्व किया, 1980 के दशक में दक्षिण कोरिया विनिर्माण चमत्कार बनकर उभरा, 1990 के दशक में चीन ने वैश्विक उत्पादन प्रणाली को बदल दिया और पिछले एक दशक में वियतनाम एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित हुआ. आज जब दुनिया 'चीन+1' रणनीति अपना रही है, भारत भी ऐसे ही एक निर्णायक अवसर के द्वार पर खड़ा है. भारत के भीतर गुजरात के पास मजबूत बुनियादी ढांचे, उद्यमशीलता, नीतिगत स्थिरता और औद्योगिक क्षमता का ऐसा संगम है, जो उसे इस परिवर्तन का नेतृत्व करने योग्य बनाता है.

शुल्क मुक्त बाजार से बढ़ेगा निर्यात का दायरा

यह समय गुजरात के लिए बेहद अनुकूल है. CETA के तहत भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन में लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. इससे भारतीय उत्पादों के लिए दुनिया के सबसे परिष्कृत उपभोक्ता बाजारों में प्रवेश आसान होगा. इसके साथ लागू होने वाला डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन योग्य भारतीय पेशेवरों को ब्रिटेन में सामाजिक सुरक्षा अंशदान से मिलने वाली छूट को तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर देगा. इससे विदेशी नियुक्तियां अधिक आकर्षक बनेंगी और भारत के सेवा निर्यात को भी मजबूती मिलेगी.

गुजरात के लिए यह केवल नीतिगत घोषणा नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का बड़ा उत्प्रेरक है. राज्य पहले ही भारत से ब्रिटेन होने वाले कुल निर्यात में लगभग 15 प्रतिशत का योगदान देता है और देश के सबसे विविधीकृत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक विकसित कर चुका है. विश्वस्तरीय बंदरगाह, औद्योगिक कॉरिडोर, उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स, निवेशक-अनुकूल नीतियां और मजबूत उद्यमशील संस्कृति उसे विशिष्ट प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करती हैं.

सूरत के हीरा पॉलिशिंग उद्योग, अहमदाबाद और जेतपुर के वस्त्र क्लस्टर, दहेज, अंकलेश्वर और जामनगर के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स गुजरात की औद्योगिक ताकत का प्रमाण हैं. ब्रिटेन में शुल्क समाप्त होने के बाद रत्न एवं आभूषण, वस्त्र, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, ऑटो कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक जैसे क्षेत्रों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है.

पारंपरिक उद्योगों से लेकर एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग तक मजबूत पकड़

विश्वविख्यात सूरत हीरा उद्योग, जिसमें तेजी से विकसित हो रहा लैब-ग्रोन डायमंड इकोसिस्टम भी शामिल है, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अग्रणी स्थिति और मजबूत करेगा. राज्य के लाखों लोगों को रोजगार देने वाला वस्त्र उद्योग बांग्लादेश, वियतनाम और तुर्किये जैसे देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा. गुजरात का रसायन और फार्मा उद्योग, जो पहले ही देश के सबसे मजबूत उद्योगों में शामिल है, उच्च मूल्य वाले वैश्विक बाजारों तक अधिक सहज पहुंच प्राप्त करेगा. वहीं साणंद, राजकोट, हालोल और मेहसाणा के इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल हब वैश्विक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने की स्थिति में हैं.

हालांकि गुजरात का भविष्य केवल पारंपरिक विनिर्माण तक सीमित नहीं है. राज्य तेजी से भारत के एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है. सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और प्रिसीजन इंजीनियरिंग में बड़े निवेश उसके औद्योगिक स्वरूप को नई पहचान दे रहे हैं. धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, समर्पित माल ढुलाई नेटवर्क और 200 से अधिक औद्योगिक क्षेत्रों का विशाल इकोसिस्टम एशिया के चुनिंदा क्षेत्रों में ही देखने को मिलता है.

हरित ऊर्जा और वैश्विक लॉजिस्टिक्स बनाएंगे गुजरात को मजबूत

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी गुजरात अग्रणी है. भारत के सबसे बड़े सौर और पवन ऊर्जा उत्पादकों में शामिल होने के साथ-साथ राज्य ग्रीन हाइड्रोजन का भी उभरता हुआ केंद्र बन रहा है. इससे उद्योगों को कम कार्बन उत्सर्जन के साथ उत्पादन करने का अवसर मिलेगा, जो आज वैश्विक खरीदारों के लिए एक महत्वपूर्ण मानक बन चुका है.

समुद्री व्यापार में गुजरात की ताकत इस बढ़त को और मजबूत करती है. राज्य के बंदरगाह भारत के कुल कार्गो यातायात का लगभग 40 प्रतिशत संभालते हैं, जिससे गुजरात अंतरराष्ट्रीय व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन गया है. बेहतर लॉजिस्टिक्स लागत कम करते हैं, डिलीवरी समय घटाते हैं और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाते हैं, जो आज की तेज रफ्तार वैश्विक अर्थव्यवस्था में निर्णायक कारक हैं.

नवाचार, रोजगार और 'लोकल टू ग्लोबल' की नई उड़ान

विनिर्माण के साथ-साथ गुजरात भविष्य की फैक्ट्रियों के लिए नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित कर रहा है. आईआईटी गांधीनगर, आईआईएम अहमदाबाद, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पंडित दीनदयाल ऊर्जा विश्वविद्यालय और तेजी से बढ़ते इनक्यूबेशन सेंटर इंडस्ट्री 4.0 के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधन तैयार कर रहे हैं. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, एडवांस्ड मैटेरियल्स और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग अब राज्य की औद्योगिक रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं. भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र GIFT City भी वैश्विक निवेश और वित्तीय सेवाओं के जरिए गुजरात की स्थिति को और मजबूत करता है.

इस परिवर्तन का सबसे बड़ा लाभ रोजगार के रूप में सामने आएगा. हर नया विनिर्माण निवेश केवल फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, डिजाइन, सॉफ्टवेयर विकास, अनुसंधान, वित्त, रखरखाव, गुणवत्ता नियंत्रण और पेशेवर सेवाओं में भी बड़े पैमाने पर अवसर पैदा करेगा. एमएसएमई, स्टार्टअप, कारीगर, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और निर्यातक भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच हासिल कर सकेंगे, जिससे आर्थिक विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचेगा.

इस ऐतिहासिक समझौते के महत्व को रेखांकित करते हुए गुजरात के उद्योग मंत्री बलवंतसिंह राजपूत ने CETA को राज्य के उद्योगों, निर्यातकों और स्टार्टअप्स के लिए विकसित बाजारों तक पहुंच का प्रवेश द्वार बताया है. उनके अनुसार यह समझौता 'वोकल फॉर लोकल' की अवधारणा को 'लोकल टू ग्लोबल' में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उनका यह विश्वास गुजरात की उस क्षमता को दर्शाता है, जिसके बल पर राज्य नीतिगत अवसरों को आर्थिक सफलता में बदलता आया है.

हालांकि केवल व्यापार समझौते समृद्धि नहीं लाते. उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उद्योग कितनी तेजी से नवाचार अपनाते हैं, नई तकनीकों में निवेश करते हैं, गुणवत्ता मानकों को बेहतर बनाते हैं, वैश्विक ब्रांड तैयार करते हैं और टिकाऊ विकास को प्राथमिकता देते हैं. सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों और वित्तीय संस्थाओं को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि गुजरात इस ऐतिहासिक अवसर का पूरा लाभ उठा सके.

CETA केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि गुजरात के भविष्य की नई परिकल्पना है. यह राज्य को भारत की औद्योगिक शक्ति से आगे बढ़ाकर दुनिया के सबसे भरोसेमंद विनिर्माण केंद्रों में शामिल करने का अवसर देता है. यदि इस मौके का दूरदृष्टि और दृढ़ संकल्प के साथ उपयोग किया गया, तो आने वाला दशक गुजरात में नए औद्योगिक पुनर्जागरण का साक्षी बन सकता है, जो लाखों रोजगार पैदा करेगा, वैश्विक निवेश आकर्षित करेगा और विकसित भारत@2047 की दिशा में देश की यात्रा को नई गति देगा.

अगली महान विनिर्माण गाथा किसी और देश में लिखी जाए, यह जरूरी नहीं. उसे अहमदाबाद में डिज़ाइन किया जा सकता है, राजकोट में इंजीनियर किया जा सकता है, साणंद में निर्मित किया जा सकता है, जामनगर में परिष्कृत किया जा सकता है, मुंद्रा बंदरगाह से दुनिया भर में भेजा जा सकता है और अंततः पूरी दुनिया में एक सशक्त पहचान के साथ जाना जा सकता है-"मेड इन गुजरात".

अतिथि लेखक: डॉ. एस. एस. मंथा व डॉ. ए. रामकुमार, कुलपति,

(डॉ. एस. एस. मंथा भारत सरकार की अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के पूर्व अध्यक्ष हैं और डॉ. ए. रामकुमार सूरत स्थित बीएम यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं. )


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