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जून में व्यापार घाटा 5 महीने के हाई पर, आयात में 31% उछाल से बढ़ा दबाव, निर्यात भी रहा मजबूत
वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो मई के 28.21 अरब डॉलर से अधिक है. एक साल पहले जून 2025 में यह आंकड़ा 19.10 अरब डॉलर था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 30.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी के चलते आयात 31% उछल गया. हालांकि, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक सामान की मजबूत मांग के दम पर निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव बढ़ सकता है.
वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया, जो मई के 28.21 अरब डॉलर से अधिक है. एक साल पहले जून 2025 में यह आंकड़ा 19.10 अरब डॉलर था. इस दौरान वस्तु आयात (Merchandise Imports) 31% बढ़कर 70.84 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि निर्यात 16% बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा.
कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोने के आयात ने बढ़ाया दबाव
जून में भारत का कच्चे तेल का आयात 40% बढ़कर 19.33 अरब डॉलर हो गया. वहीं इलेक्ट्रॉनिक सामान का आयात 59% बढ़कर 13.36 अरब डॉलर और सोने का आयात 7% बढ़कर 1.97 अरब डॉलर पर पहुंच गया. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, इन वस्तुओं की ऊंची कीमतें और बढ़ती मांग आयात बढ़ने की प्रमुख वजह रहीं.
सरकार द्वारा कच्चे कपास के आयात पर शुल्क में छूट दिए जाने के बाद इसका आयात लगभग तीन गुना बढ़ गया. वहीं उर्वरक (Fertilizer) का आयात भी जून में तीन गुना बढ़कर 2.30 अरब डॉलर हो गया.
निर्यात में भी रही मजबूत बढ़ोतरी
आयात में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत का निर्यात मजबूत बना रहा. जून में इंजीनियरिंग सामान का निर्यात 21% बढ़कर 11.48 अरब डॉलर हो गया. इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 19% बढ़कर 4.93 अरब डॉलर और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 9% बढ़कर 4.87 अरब डॉलर रहा.
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद इस क्षेत्र में भारत का निर्यात 7% बढ़कर 5 अरब डॉलर पहुंच गया. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना रहा, हालांकि वहां निर्यात मामूली घटकर 8.17 अरब डॉलर रह गया.
सेवा क्षेत्र से मिली राहत
वाणिज्य मंत्रालय के शुरुआती अनुमान के अनुसार, जून में सेवा निर्यात 3% बढ़कर 33.03 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा आयात 13% बढ़कर 17.92 अरब डॉलर पहुंच गया. इससे सेवा क्षेत्र में भारत को 15.11 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) मिला. अंतिम आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस महीने के अंत में जारी करेगा.
चीन से आयात में बड़ा उछाल
जून में चीन से भारत का आयात 40% बढ़कर 13.34 अरब डॉलर हो गया, जिससे वह भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना रहा. वहीं चीन को भारत का निर्यात भी करीब 32% बढ़कर 1.81 अरब डॉलर पहुंच गया.
पहली तिमाही में भी बढ़ा व्यापार घाटा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का कुल वस्तु निर्यात 16% बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 20% बढ़कर 216.18 अरब डॉलर पहुंच गया. इस दौरान देश का व्यापार घाटा 86.86 अरब डॉलर दर्ज किया गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भारत का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) जीडीपी के कम से कम 1% तक पहुंच सकता है. जून में व्यापार घाटा बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स का बढ़ा हुआ आयात है. उनका कहना है कि फिलहाल निर्यात मजबूत बना हुआ है, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं तो चालू खाते के घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. हालांकि, RBI के विदेशी मुद्रा प्रबंधन उपाय इस जोखिम को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं.
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