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SEBI ने कर्मचारियों के लिए कड़े किए नियम, नौकरी छोड़ने के बाद 2 साल तक नहीं कर सकेंगे पैरवी, निवेश नियम भी बदले
संशोधित नियमों के तहत निवेश, वित्तीय खुलासे, नौकरी बदलने और उपहार स्वीकार करने से जुड़े प्रावधान पहले के मुकाबले अधिक सख्त कर दिए गए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 13 hours ago
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने कर्मचारियों के सेवा नियमों में बड़ा बदलाव किया है. बोर्ड ने हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के मकसद से निवेश, नई नौकरी, उपहार स्वीकार करने और वित्तीय खुलासों से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है. नए प्रावधानों के तहत नौकरी छोड़ने के बाद कर्मचारी दो साल तक सेबी के समक्ष किसी भी व्यक्ति या संस्था का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेंगे.
परिवार और आश्रित की परिभाषा का दायरा बढ़ा
नए नियमों के तहत 'परिवार' और 'आश्रित' की परिभाषा को पहले से अधिक व्यापक बनाया गया है. अब इसमें गोद लिए गए बच्चे, सौतेले बच्चे और ऐसे व्यक्ति भी शामिल होंगे, जो किसी कर्मचारी पर आर्थिक रूप से काफी हद तक निर्भर हैं. इस बदलाव के बाद निवेश और अन्य वित्तीय जानकारियों के खुलासे से जुड़े नियम इन सभी लोगों पर भी लागू होंगे.
नौकरी छोड़ने के बाद दो साल तक नहीं कर सकेंगे प्रतिनिधित्व
SEBI ने पूर्व कर्मचारियों के लिए दो साल की अनिवार्य 'कूलिंग-ऑफ' अवधि लागू कर दी है. इसका मतलब है कि नौकरी छोड़ने के बाद अगले दो वर्षों तक कोई भी पूर्व कर्मचारी किसी व्यक्ति, कंपनी या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष लंबित मामलों, सेटलमेंट, मंजूरी या अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) कार्यवाही में प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेगा. इसके अलावा, यदि कोई कर्मचारी नई नौकरी के लिए किसी कंपनी से बातचीत शुरू करता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी जानकारी सेबी को देना अनिवार्य होगा.
निवेश नियमों में भी सख्ती
संशोधित नियमों के तहत कर्मचारियों के लिए 'अनुमत' और 'प्रतिबंधित' निवेश की स्पष्ट श्रेणियां तय की गई हैं. अब कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य सेवा अवधि के दौरान सीधे शेयरों, इक्विटी में बदलने वाले वित्तीय साधनों और डेरिवेटिव्स में नया निवेश नहीं कर सकेंगे. हालांकि म्यूचुअल फंड, REITs और अन्य विनियमित सामूहिक निवेश माध्यमों में निवेश की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी.
कुछ निवेश उत्पादों पर तय हुई सीमा
SEBI ने कुछ विनियमित निवेश उत्पादों में निवेश की अधिकतम सीमा भी तय कर दी है. नए नियमों के अनुसार, ऐसे निवेश कर्मचारी के कुल निवेश का 25% से अधिक नहीं हो सकेंगे. हालांकि जीवनसाथी को मिलने वाले Employee Stock Options (ESOPs) और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन जैसी कुछ श्रेणियों को सीमित छूट दी गई है.
गिफ्ट स्वीकार करने के नियम भी बदले
SEBI ने उपहार स्वीकार करने से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया है. अब कर्मचारियों को 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के किसी भी उपहार की जानकारी देना अनिवार्य होगा. पहले यह सीमा 10,000 रुपये थी. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक और पारंपरिक अवसरों पर मिलने वाले सामान्य उपहार किन परिस्थितियों में स्वीकार किए जा सकते हैं.
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