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जनसमर्थ पोर्टल पर 43% लोन आवेदन रिजेक्ट, वित्त मंत्रालय ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश

मंत्रालय का कहना है कि पोर्टल को बैंकिंग सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से इंटीग्रेट करने और प्रोसेसिंग तेज करने से अधिक योग्य आवेदकों तक समय पर कर्ज पहुंचाया जा सकेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

सरकारी योजनाओं के तहत आसान और तेज कर्ज उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए जनसमर्थ पोर्टल पर बड़ी संख्या में लोन आवेदन खारिज होने के बाद वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को सख्त निर्देश दिए हैं. मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे जनसमर्थ पोर्टल को अपने लोन मैनेजमेंट सिस्टम से जल्द जोड़ें, आवेदन निपटाने की प्रक्रिया तेज करें और वित्त वर्ष 2026 में 43.2 फीसदी तक पहुंची रिजेक्शन दर को कम करने के लिए जरूरी सुधार लागू करें.

जनसमर्थ पोर्टल पर लोग अपनी पात्रता की जांच कर सकते हैं, ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और कई सरकारी क्रेडिट-लिंक्ड योजनाओं के तहत डिजिटल मंजूरी भी प्राप्त कर सकते हैं. मंत्रालय और संबंधित विभाग इसी प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रदर्शन की निगरानी करते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने पाया कि बड़ी संख्या में आवेदन अधूरे दस्तावेज, गलत जानकारी और शुरुआती मंजूरी मिलने के बाद भी आवेदकों द्वारा प्रक्रिया बीच में छोड़ देने के कारण अंतिम मंजूरी तक नहीं पहुंच पाते. इसी वजह से बैंकों को अपनी डिजिटल लेंडिंग प्रक्रिया और आवेदन सत्यापन प्रणाली मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं.

कन्वर्जन रेट बढ़ाने पर जोर

मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे अपने बिजनेस रूल इंजन को नियमित रूप से अपडेट करें ताकि डिजिटल मंजूरी के बाद आवेदन बीच में छोड़ने (ड्रॉप-ऑफ) की घटनाएं कम हों. इसके अलावा सभी पंजीकृत शाखाओं को जनसमर्थ पोर्टल से जोड़ने, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (BCs) के जरिए ग्राहकों की मदद बढ़ाने, बैंक शाखाओं, वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर पोर्टल का प्रचार करने तथा बैंक अधिकारियों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं का प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए गए हैं.

सूत्रों के मुताबिक, जनसमर्थ पोर्टल को बैंकों के लेंडिंग मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ने पर आवेदन से लेकर अंतिम भुगतान तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी, जिससे लोन मंजूरी का समय काफी कम हो सकता है.

तीन गुना बढ़ी मंजूरियां

वित्त वर्ष 2026 में जनसमर्थ पोर्टल के जरिए करीब 1.31 करोड़ (13.1 मिलियन) लोन आवेदनों को मंजूरी मिली, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह संख्या करीब 40 लाख थी. यानी एक साल में मंजूरियों की संख्या तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई.

हालांकि, बैंक अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल मंजूरी मिलने के बावजूद कई आवेदन अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाते. इसकी प्रमुख वजह अधूरे दस्तावेज, गलत जानकारी और आवेदकों का बाद में लोन नहीं लेने का फैसला करना है.

जनसमर्थ का बढ़ा दायरा

फरवरी में सरकार ने जनसमर्थ पोर्टल का दायरा बढ़ाते हुए इसमें CGTMSE और ECLGS 5.0 जैसी योजनाओं को भी शामिल किया. इसके साथ ही MSME के लिए नया क्रेडिट असेसमेंट मॉडल और महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा गुजरात की कई राज्य सरकारों की योजनाएं भी जोड़ी जा रही हैं.

फिलहाल जनसमर्थ पोर्टल पर 46 सरकारी क्रेडिट-लिंक्ड योजनाएं उपलब्ध हैं. इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम स्वनिधि, पीएमईजीपी, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, DAY-NRLM, स्टार्टअप लोन, रूफटॉप सोलर फाइनेंसिंग, फिशरीज किसान क्रेडिट कार्ड, होम लोन योजनाएं, SRMS, बुनकर मुद्रा योजना, ECLGS 5.0 और MSME माइक्रो क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएं शामिल हैं.

आवेदन की गुणवत्ता भी अहम

BLS E-Services के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) लोकनाथ पांडा के अनुसार, केवल लोन प्रोसेसिंग का समय कम करना पर्याप्त नहीं है. आवेदन की गुणवत्ता में सुधार भी उतना ही जरूरी है. उनका कहना है कि अधिकतर आवेदन पात्रता के अभाव में नहीं, बल्कि अधूरे दस्तावेज या गलत जानकारी के कारण खारिज होते हैं.

उन्होंने कहा कि यदि बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स आवेदकों को दस्तावेज तैयार करने, जानकारी सत्यापित कराने और सरकारी योजनाओं के बारे में सही मार्गदर्शन देने में मदद करें, तो रिजेक्शन दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में.

विशेषज्ञों के अनुसार मंत्रालय के निर्देश प्रभावी ढंग से लागू होने पर डिजिटल लेंडिंग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. उनके अनुसार, बैंकिंग सिस्टम से पूर्ण इंटीग्रेशन होने पर आवेदन तेजी से प्रोसेस होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स की भूमिका भी और मजबूत होगी.


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