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NSE की लिस्टिंग से पूरा होगा भारत के सूचीबद्ध एक्सचेंजों का 'त्रिकोण': जेफरीज
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी 93 फीसदी, इक्विटी ऑप्शंस में 75 फीसदी और इक्विटी फ्यूचर्स में 100 फीसदी है. यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार में इसका दबदबा लगातार बना हुआ है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की प्रस्तावित लिस्टिंग भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) की इक्विटी रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, NSE के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद भारत के तीनों प्रमुख एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX)लिस्टेड कंपनियां बन जाएंगे. इससे निवेशकों को राजस्व के लिहाज से देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में निवेश का अवसर मिलेगा.
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत के एक्सचेंज उद्योग का कुल समेकित राजस्व 24,400 करोड़ रुपये रहा, जिसमें अकेले NSE की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी थी. कैश इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स और क्लियरिंग जैसे प्रमुख कारोबारों में NSE की मजबूत पकड़ बनी हुई है और अधिकांश प्रमुख बाजार खंडों में उसकी हिस्सेदारी 90 फीसदी से अधिक है.
FY26 में NSE का राजस्व BSE और MCX से कई गुना अधिक
जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में NSE का परिचालन राजस्व 16,600 करोड़ रुपये रहा. इसके मुकाबले BSE का परिचालन राजस्व 4,800 करोड़ रुपये और MCX का 2,300 करोड़ रुपये था. नियामकीय खर्चों को छोड़कर NSE का परिचालन EBITDA 11,100 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 67 फीसदी दर्ज किया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी 93 फीसदी, इक्विटी ऑप्शंस में 75 फीसदी और इक्विटी फ्यूचर्स में 100 फीसदी है. यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार में इसका दबदबा लगातार बना हुआ है.
इक्विटी ऑप्शंस से आती है सबसे ज्यादा कमाई
NSE के ट्रांजैक्शन रेवेन्यू में सबसे बड़ा योगदान इक्विटी ऑप्शंस का है. रिपोर्ट के अनुसार, कुल ट्रांजैक्शन आय का 77 फीसदी हिस्सा इक्विटी ऑप्शंस से आता है. वहीं, कैश सेगमेंट का योगदान 10 फीसदी और इक्विटी फ्यूचर्स का योगदान 9 फीसदी है.
जेफरीज ने बताया कि FY20 से FY26 के बीच भारत के इक्विटी ऑप्शंस बाजार का औसत दैनिक प्रीमियम कारोबार (Average Daily Premium Turnover) 56 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 77,200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. हालांकि, अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए नियामकीय बदलावों के बाद FY26 में इंडेक्स ऑप्शंस के औसत दैनिक कारोबार की वृद्धि दर घटकर 8 फीसदी रह गई.
अमेरिका के मुकाबले अभी भी काफी छोटा है भारतीय ऑप्शंस बाजार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेरिवेटिव बाजार के आकार को लेकर चिंताओं के बावजूद ऑप्शन प्रीमियम कारोबार के लिहाज से भारतीय बाजार अभी भी अमेरिका से काफी छोटा है. ऑप्शन प्रीमियम के आधार पर भारत का कारोबार अमेरिकी बाजार का केवल लगभग पांचवां हिस्सा है, हालांकि छोटे कॉन्ट्रैक्ट आकार के कारण भारत में ट्रेड होने वाले ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या कहीं अधिक है.
कमोडिटी और टेक्नोलॉजी कारोबार पर भी बढ़ रहा फोकस
जेफरीज ने कहा कि NSE अब केवल इक्विटी और डेरिवेटिव्स तक सीमित नहीं है, बल्कि कमोडिटी कारोबार और टेक्नोलॉजी सेवाओं का भी विस्तार कर रहा है. एक्सचेंज के कुल राजस्व में डेटा और टेक्नोलॉजी सेवाओं की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी है. इसके अलावा, बिजली (Electricity) फ्यूचर्स सेगमेंट में भी NSE ने कारोबार के आधार पर लगभग 70 फीसदी बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है.
मजबूत बैलेंस शीट से लिस्टिंग को मिलेगा सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक, NSE की मजबूत बैलेंस शीट, कम पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की आवश्यकता और निवेशकों को उच्च लाभांश (Dividend) देने का रिकॉर्ड उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाता है. जेफरीज का मानना है कि प्रस्तावित लिस्टिंग से पहले ये सभी कारक NSE को निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना सकते हैं.
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