होम / बिजनेस / हाई BP से HIV तक, 39 जरूरी दवाओं के रेट फिक्स, ज्यादा वसूली पर होगी कार्रवाई
हाई BP से HIV तक, 39 जरूरी दवाओं के रेट फिक्स, ज्यादा वसूली पर होगी कार्रवाई
सरकार के इस फैसले के बाद कोई भी दवा कंपनी या मेडिकल स्टोर निर्धारित कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकेगा. नियमों का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज सहित लौटानी होगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
महंगी दवाओं से परेशान मरीजों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, HIV और आंखों के संक्रमण समेत 39 जरूरी दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (Retail Price) तय कर दी है. अब कोई भी दवा कंपनी या मेडिकल स्टोर निर्धारित कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकेगा. नियमों का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज सहित लौटानी होगी.
39 जरूरी दवाओं की कीमत हुई तय
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से 8 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत 39 नई दवा फॉर्मूलेशन की अधिकतम खुदरा कीमत निर्धारित की गई है. इन दवाओं का उपयोग हाई BP, डायबिटीज, हृदय रोग, HIV और आंखों के संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है. सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य जरूरी दवाओं को आम लोगों के लिए किफायती बनाना और इलाज का खर्च कम करना है.
तय कीमत से ज्यादा वसूली पर होगी सख्त कार्रवाई
NPPA ने स्पष्ट किया है कि कोई भी दवा निर्माता, मार्केटिंग कंपनी या विक्रेता निर्धारित खुदरा कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकता. यदि कोई कंपनी या विक्रेता नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे अतिरिक्त वसूली गई पूरी राशि ब्याज सहित जमा करनी होगी. यह कार्रवाई ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत की जाएगी.
मेडिकल स्टोर पर प्राइस लिस्ट लगाना होगा अनिवार्य
सरकार ने सभी मेडिकल स्टोर और दवा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे दवा कंपनियों द्वारा जारी नवीनतम प्राइस लिस्ट दुकान में ऐसी जगह प्रदर्शित करें, जहां ग्राहक उसे आसानी से देख सकें. इस व्यवस्था का उद्देश्य दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों को अधिक कीमत वसूले जाने से बचाना है.
मरीजों को कैसे मिलेगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को जरूरी दवाएं निर्धारित कीमत पर उपलब्ध होंगी. इससे इलाज की लागत कम होगी, दवा कंपनियों और विक्रेताओं की मनमानी पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी. सरकार का मानना है कि यह कदम आम लोगों तक सस्ती और जरूरी दवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
टैग्स