होम / बिजनेस / AI से हर साल 2.7 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ रही उत्पादकता, लेकिन अमीर देशों को ही मिल रहा ज्यादा फायदा: स्टडी
AI से हर साल 2.7 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ रही उत्पादकता, लेकिन अमीर देशों को ही मिल रहा ज्यादा फायदा: स्टडी
रिपोर्ट के अनुसार, AI फिलहाल हर साल लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर के बराबर उत्पादकता बढ़ा रहा है. यह अध्ययन में शामिल 86 देशों की कुल GDP का करीब 3.4% है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वैश्विक अर्थव्यवस्था में हर साल करीब 2.7 ट्रिलियन डॉलर की उत्पादकता बढ़ा रहा है, लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभ अब भी अमीर देशों और अधिक वेतन पाने वाले पेशेवरों को मिल रहा है. एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी के मुताबिक, यदि विकासशील देश AI से जुड़े नियमों, बुनियादी ढांचे और स्थानीय AI इकोसिस्टम को मजबूत नहीं करते हैं, तो वे AI क्रांति में और पीछे छूट सकते हैं.
100 से ज्यादा देशों के डेटा पर आधारित है अध्ययन
यह अध्ययन जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच 100 से अधिक देशों में लगभग 10 लाख AI बातचीत (AI Conversations) के विश्लेषण पर आधारित है. इसमें Anthropic Economic Index के पांच संस्करणों के डेटा का इस्तेमाल किया गया.
शोधकर्ताओं ने AI के आर्थिक प्रभाव को मापने के लिए दो नए पैमाने विकसित किए हैं. पहला 'लेबर कॉस्ट इक्विवेलेंट' (LCE), जो AI से होने वाले उत्पादकता लाभ का अनुमान लगाता है. दूसरा 'AI कंसंट्रेशन इंडेक्स' (ACI), जो यह बताता है कि AI से होने वाले लाभ विभिन्न पेशों में कितनी समानता से बंट रहे हैं.
2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा AI का आर्थिक योगदान
रिपोर्ट के अनुसार, AI फिलहाल हर साल लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर के बराबर उत्पादकता बढ़ा रहा है. यह अध्ययन में शामिल 86 देशों की कुल GDP का करीब 3.4% है. यह आंकड़ा 2025 के मध्य में अनुमानित 1.2 ट्रिलियन डॉलर से दोगुने से भी अधिक है. इसकी मुख्य वजह यह है कि AI का उपयोग अब केवल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, सेल्स, ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य बड़े रोजगार वाले क्षेत्रों तक फैल गया है.
AI का उपयोग बढ़ा, लेकिन प्रति बातचीत आर्थिक मूल्य घटा
रिपोर्ट में दिलचस्प तथ्य सामने आया कि प्रत्येक AI बातचीत से मिलने वाला औसत आर्थिक मूल्य कुछ कम हुआ है. जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच AI वार्तालाप का वेतन सूचकांक (Wage Index) 5.5% घटा. हालांकि, AI के इस्तेमाल में तेज बढ़ोतरी ने इस गिरावट की भरपाई कर दी. कुल उत्पादकता लाभ में हुई वृद्धि का 80% से अधिक हिस्सा AI उपयोग की बढ़ती मात्रा से आया.
अमीर देशों को मिल रहा सबसे ज्यादा फायदा
स्टडी के अनुसार, AI से होने वाले आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा अभी भी उच्च आय वाले देशों के पास केंद्रित है. हाई-इनकम देशों में AI से मिलने वाला उत्पादकता लाभ उनकी GDP के लगभग 4.2% के बराबर है. वहीं, मध्यम आय वाले देशों में यह आंकड़ा केवल 0.6% और निम्न आय वाले देशों में महज 0.1% है.
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक कार्यबल में अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी होने के बावजूद अमीर देशों को AI से होने वाले कुल उत्पादकता लाभ का लगभग 96% हिस्सा मिल रहा है.
भारत में सीमित वर्ग तक पहुंचा AI का लाभ
अध्ययन के मुताबिक, भारत में भी AI से होने वाले लाभ मुख्य रूप से उच्च कौशल और अधिक वेतन पाने वाले पेशेवरों तक सीमित हैं. भारत का AI कंसंट्रेशन इंडेक्स (ACI) 0.84 दर्ज किया गया, जो बताता है कि AI से होने वाली अधिकांश उत्पादकता वृद्धि सीमित संख्या में कुशल कर्मचारियों को मिल रही है.
इसके मुकाबले अमेरिका का ACI 0.49 है, जो दर्शाता है कि वहां AI का उपयोग ऑफिस प्रशासन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बिजनेस सर्विसेज जैसे कई क्षेत्रों में व्यापक रूप से हो रहा है.
कई नए क्षेत्रों में बढ़ रहा AI का इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार, AI का उपयोग अब केवल सॉफ्टवेयर और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) क्षेत्रों तक सीमित नहीं है. अध्ययन में शामिल आधे से अधिक देशों में 2025 के अंत से 2026 की शुरुआत के बीच AI कंसंट्रेशन इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई. इसका मतलब है कि AI का इस्तेमाल अब अधिक विविध पेशों में होने लगा है, खासकर मध्यम आय वाले देशों में, हालांकि, कई निम्न आय वाले देशों में AI का उपयोग अब भी सीमित पेशेवर वर्ग तक ही केंद्रित है.
AI से अधिक फायदा दिलाने में नियमों की अहम भूमिका
स्टडी के मुताबिक, किसी देश का AI नियामकीय ढांचा (Regulatory Framework) यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि उसे AI से कितना आर्थिक लाभ मिलेगा. जिन देशों में AI से जुड़े नियम अधिक मजबूत हैं, वहां उत्पादकता लाभ भी ज्यादा है और उसका वितरण विभिन्न पेशों में अपेक्षाकृत संतुलित है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जिन देशों में अंग्रेजी आधिकारिक भाषा है, वहां AI के फायदे अधिक तेजी से अलग-अलग पेशों तक पहुंचे हैं. इसकी वजह यह है कि मौजूदा बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) मुख्य रूप से अंग्रेजी डेटा पर प्रशिक्षित हैं.
चुनौतियां अभी भी बरकरार
शोधकर्ताओं ने कहा कि यह अनुमान केवल AI से बचने वाले समय और उत्पादकता लाभ पर आधारित है. इसमें AI इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा खपत, सब्सक्रिप्शन शुल्क, निवेश लागत और संभावित रोजगार प्रभाव जैसे खर्च शामिल नहीं हैं.
इसके अलावा, अध्ययन में एंटरप्राइज API और अन्य प्रमुख AI प्लेटफॉर्म के उपयोग को भी शामिल नहीं किया गया है. ऐसे में वास्तविक आर्थिक प्रभाव वर्तमान अनुमान से अलग हो सकता है.
विकासशील देशों के लिए बड़ा संदेश
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि AI का दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके लाभ उच्च आय वाले देशों और विशेषज्ञ पेशों से आगे कितनी तेजी से बाकी दुनिया तक पहुंचते हैं.
हालांकि AI अब शिक्षा, बिक्री और प्रशासनिक कार्यों जैसे क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा है, लेकिन विकासशील देशों के बड़े हिस्से को अभी भी वह व्यापक उत्पादकता लाभ नहीं मिल पाया है, जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पहले से देखने को मिल रहा है.
टैग्स