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प्राइवेट बैंकों की कमाई रहेगी तेज, FY28 तक 15% CAGR से बढ़ेगा बैंकिंग सेक्टर का मुनाफा: रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया लिक्विडिटी उपाय और विदेशी पूंजी का मजबूत प्रवाह बैंकिंग सिस्टम को समर्थन देंगे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 day ago
भारत का बैंकिंग सेक्टर अगले तीन वित्त वर्षों (FY26-FY28) में मजबूत कमाई दर्ज कर सकता है. ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFS) की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार बढ़ती कर्ज मांग, RBI की लिक्विडिटी सपोर्ट और नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में वृद्धि के दम पर बैंकिंग सेक्टर की आय 15% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने का अनुमान है. रिपोर्ट में प्राइवेट बैंकों के सरकारी बैंकों (PSU Banks) से बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना जताई गई है.
FY28 तक 15% CAGR से बढ़ सकती है कमाई
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFS) की रिपोर्ट के अनुसार, FY26 से FY28 के बीच भारतीय बैंकिंग सेक्टर की आय लगभग 15% CAGR की दर से बढ़ सकती है. वहीं, प्राइवेट सेक्टर के बैंकों की कमाई इस अवधि में करीब 20% CAGR से बढ़ने का अनुमान है, जिससे उनके सरकारी बैंकों से बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है.
कर्ज की मजबूत मांग देगी रफ्तार
रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 में कॉरपोरेट, सर्विसेज और इंडस्ट्रियल सेक्टर में मजबूत मांग के चलते क्रेडिट ग्रोथ मिड-टू-हाई टीन्स में बनी रह सकती है. मई 2026 में कॉरपोरेट सेक्टर को दिए गए कर्ज में सालाना आधार पर 18.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि सर्विस सेक्टर को दिए गए कर्ज में 19.1% की वृद्धि हुई.
इंडस्ट्रियल क्रेडिट में आई तेजी
रिपोर्ट के अनुसार, FY26 की पहली छमाही में जहां औद्योगिक क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज की वृद्धि एकल अंक (Mid-Single Digit) में थी, वहीं दिसंबर 2025 के बाद इसमें मिड-टीन्स की वृद्धि दर्ज की गई है. इस तेजी की वजह बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बड़े कॉरपोरेट्स, मिड-साइज कंपनियों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की वर्किंग कैपिटल जरूरतों में इजाफा बताया गया है.
RBI के कदम से मिलेगा सहारा
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया लिक्विडिटी उपाय और विदेशी पूंजी का मजबूत प्रवाह बैंकिंग सिस्टम को समर्थन देंगे. MOFS का अनुमान है कि FCNR(B) डिपॉजिट और विदेशी उधारी से जुड़े नियमों में RBI की ढील के बाद 40 से 50 अरब डॉलर तक का विदेशी निवेश आ सकता है. यह बैंकिंग सिस्टम के कुल डिपॉजिट का करीब 1.5% से 1.8% के बराबर होगा.
डिपॉजिट ग्रोथ अभी भी कमजोर
रिपोर्ट के मुताबिक, डिपॉजिट ग्रोथ अभी भी क्रेडिट ग्रोथ से पीछे चल रही है. मई 2026 तक डिपॉजिट ग्रोथ 12% रही, जबकि पूरे 2026 में यह 10% से 12% के दायरे में बनी हुई है. इसका असर यह हुआ कि बैंकिंग सिस्टम का लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो बढ़कर रिकॉर्ड 83.4% पर पहुंच गया.
मार्जिन पर रहेगा दबाव
MOFS का कहना है कि FY27 की पहली तिमाही में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव बना रह सकता है. इसकी वजह पहले हुई रेपो रेट कटौती का असर, लेंडिंग यील्ड में कमी और डिपॉजिट पर ऊंची ब्याज दरें हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि होलसेल और MSME लेंडिंग का बढ़ता हिस्सा बैंकों की ब्याज दरों में सुधार की क्षमता को सीमित कर सकता है. इसके अलावा, कुछ मिड-साइज बैंकों ने तिमाही के दौरान डिपॉजिट रेट बढ़ाई है. वहीं, चालू खाता-बचत खाता (CASA) अनुपात में गिरावट से बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ने की आशंका है.
मध्यम अवधि का आउटलुक सकारात्मक
हालांकि, निकट अवधि में चुनौतियां बनी रहने की संभावना है, लेकिन MOFS ने बैंकिंग सेक्टर के मध्यम अवधि के आउटलुक को सकारात्मक बताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, उधारी लागत में संभावित कमी और FY27 के अंत तक ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी से बैंकों के मार्जिन और आय में सुधार देखने को मिल सकता है.
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