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ईंधन और खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी, जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38% पर पहुंची
जनवरी 2025 से लागू नई CPI श्रृंखला के तहत यह पहला मौका है, जब खुदरा महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
जून में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर है. नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला लागू होने के बाद यह पहली बार है जब महंगाई केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से आगे निकली है. ईंधन की बढ़ती कीमतों, परिवहन लागत और खाद्य महंगाई में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही. हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगस्त की मौद्रिक नीति बैठक में RBI फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करेगा.
इतनी बढ़ गई महंगाई
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में 3.93% रही खुदरा महंगाई जून में बढ़कर 4.38% हो गई. जनवरी 2025 से लागू नई CPI श्रृंखला के तहत यह पहला मौका है, जब खुदरा महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है. बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण परिवहन, खाद्य और रेस्तरां सेवाओं की लागत में इजाफा हुआ, जिससे महंगाई दर में तेजी आई.
खाद्य महंगाई ने बढ़ाया दबाव
उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) के आधार पर जून में खाद्य महंगाई बढ़कर 5.32% हो गई, जो मई में 4.78% थी. अदरक की कीमतों में 50.41% और टमाटर में 31.92% की बढ़ोतरी ने खाद्य महंगाई को ऊपर पहुंचाया. खाद्य एवं पेय पदार्थों की महंगाई भी 5.05% रही, जो नई CPI श्रृंखला में पहली बार 5% के पार पहुंची है.
ईंधन महंगा होने से बढ़ी परिवहन और सेवाओं की लागत
मई के मध्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का पूरा असर जून के आंकड़ों में देखने को मिला. परिवहन क्षेत्र में महंगाई मई के 1.75% से बढ़कर जून में 4.31% हो गई. वहीं रेस्तरां और होटल सेवाओं में महंगाई 6.91% तथा पान एवं तंबाकू श्रेणी में 6.89% दर्ज की गई.
ग्रामीण इलाकों में महंगाई ज्यादा
जून में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई 4.74% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.92% दर्ज की गई. इससे साफ है कि महंगाई का असर गांवों में शहरों की तुलना में अधिक देखने को मिला.
क्या बढ़ेगी ब्याज दर?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 5 अगस्त को होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल कम है. इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि अप्रैल के मुकाबले वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से दरें बढ़ाने का दबाव कम हुआ है. हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मानसून की स्थिति पर RBI की नजर बनी रहेगी.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा महंगाई?
राज्यों की बात करें तो जून में सबसे अधिक खुदरा महंगाई तेलंगाना में 6.36% दर्ज की गई. इसके बाद आंध्र प्रदेश (5.39%), तमिलनाडु (5.24%), ओडिशा (5.15%) और मध्य प्रदेश (5.09%) का स्थान रहा. विशेषज्ञों के मुताबिक, इन राज्यों में खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह रहीं.
आगे क्या है अनुमान?
DBS Bank, ICRA, Crisil और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई संस्थानों का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव बना रह सकता है. क्रिसिल ने पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत खुदरा महंगाई 5.1% रहने का अनुमान जताया है, जबकि इक्रा का अनुमान है कि जुलाई में खुदरा महंगाई बढ़कर करीब 4.6% तक पहुंच सकती है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और खाद्य वस्तुओं के दाम आगे महंगाई की दिशा तय करेंगे.
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