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ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हुए आर. वैरामुथु, बोले- साहित्य ने ही जीवन को दिशा दी

वैरामुथु ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले तीसरे तमिल साहित्यकार और पहले तमिल कवि बन गए हैं. उन्होंने इस सम्मान को पूरी तमिल भाषा और भारतीय साहित्य जगत का गौरव बताया. 

रितु राणा 3 months ago

प्रख्यात तमिल कवि, साहित्यकार और गीतकार आर. वैरामुथु को भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. नई दिल्ली में आयोजित समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्ण सिंह ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया. इस उपलब्धि के साथ वैरामुथु ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले तीसरे तमिल साहित्यकार और पहले तमिल कवि बन गए हैं. इस विशेष अवसर पर आर. वैरामुथु को सम्मन के रूप में 11 लाख रुपये की पुरस्कार राशि, मां सरस्वती (वाग्देवी) की कांस्य प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया. यह समारोह उनकी जन्मतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया था.

तीसरे तमिल साहित्यकार, पहले तमिल कवि

ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने के साथ आर. वैरामुथु तमिल भाषा के तीसरे साहित्यकार और पहले तमिल कवि बन गए हैं, जिन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है. उन्होंने इस सम्मान को पूरी तमिल भाषा और भारतीय साहित्य जगत का गौरव बताया.  सम्मान ग्रहण करने के बाद वैरामुथु ने कहा कि यह पुरस्कार उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा के साथ साहित्य सृजन जारी रखने का उत्साह देगा. उन्होंने कहा,  मेरे लिए साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि जीवन को समझने और उसे अभिव्यक्त करने का माध्यम रहा है. विद्यालय ने मुझे अक्षर सिखाए, जीवन के संघर्षों ने मुझे संवेदनाएं दीं और इन्हीं दोनों ने मिलकर मुझे कविता तक पहुंचाया. जीवन की तमाम कड़वाहटों के बीच भाषा ही मेरे लिए सबसे बड़ी मिठास बनी. उसी ने मेरे भीतर साहित्य के प्रति ऐसी भूख जगाई, जिसने मुझे लगातार सृजन की राह पर आगे बढ़ाया. मेरी कविताओं का विषय कहीं बाहर से नहीं आया, बल्कि मेरे जीवन, मेरे अनुभवों और मेरी संवेदनाओं से जन्मा.

गर्व के साथ-साथ गहरी जिम्मेदारी का क्षण

उन्होंने आगे कहा जब मैं सोचता हूं कि जिस परंपरा में सुमित्रानंदन पंत, अमृता प्रीतम, महाश्वेता देवी, गुलजार, प्रतिभा राय, एम. टी. वासुदेवन नायर और अनेक महान साहित्यकारों का नाम दर्ज है, उसी पंक्ति में आज मेरे लिए भी स्थान बनाया गया है, तो यह मेरे लिए गर्व के साथ-साथ गहरी जिम्मेदारी का भी क्षण है.

मेरा विश्वास है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को सबसे अधिक समृद्ध हमारी नदियों और हमारे साहित्य ने किया है. साहित्य केवल यथार्थ का चित्रण नहीं करता, बल्कि मनुष्य को आशा, संवेदना और परिवर्तन की प्रेरणा भी देता है. यदि जीवन हमारी इच्छाओं के अनुसार न चले, तो साहित्य हमें परिस्थितियों को स्वीकारना सिखाता है और यदि आवश्यकता हो, तो उन्हें बदलने का साहस भी देता है.

साहित्य मनुष्य की कल्पना को असीम विस्तार देता है. वह केवल शब्द नहीं, बल्कि मनुष्य की आत्मा को समृद्ध करने वाली शक्ति है. यही मेरे लेखन का उद्देश्य रहा है और यही मेरी सबसे बड़ी आस्था भी है. आप सभी का हृदय से धन्यवाद.

साहित्य और सिनेमा दोनों में छोड़ी गहरी छाप

आर. वैरामुथु ने कविता, उपन्यास, निबंध और फिल्मी गीतों के जरिए भारतीय साहित्य और तमिल सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है. उनकी रचनाएं सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं.

कई बड़े सम्मानों से हो चुके हैं सम्मानित

वैरामुथु के चर्चित उपन्यास 'कल्लिक्कट्टु इथिहासम' को वर्ष 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था. इसके अलावा उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है.

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री कर्ण सिंह ने कहा, भारतीय ज्ञानपीठ का अध्यक्ष रहने के दौरान मुझे लगभग नौ वर्षों तक देश की विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों और विद्वानों से मिलने और उनके साहित्य को पढ़ने का अवसर मिला. यह मेरे जीवन के सबसे समृद्ध और यादगार अनुभवों में से एक रहा. भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी भाषाई और सांस्कृतिक विविधता है. हमारी अनेक भारतीय भाषाएं मिलकर देश की साहित्यिक विरासत को समृद्ध बनाती हैं और तमिल उन सबसे प्राचीन एवं समृद्ध भाषाओं में से एक है. मेरा हमेशा से मानना रहा है कि किसी भी देश को उसके भूगोल या इतिहास से नहीं, बल्कि उसके साहित्य से सबसे बेहतर समझा जा सकता है. भारत जैसा बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक साहित्य संसार दुनिया में बहुत कम देशों के पास है. यही हमारी सबसे बड़ी सांस्कृतिक ताकत है. आज के सम्मानित ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता को मैं हार्दिक बधाई देता हूं और उनके उज्ज्वल साहित्यिक योगदान को नमन करता हूं.

इस अवसर पर भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आर. एन. तिवारी और चयन समिति की अध्यक्ष प्रतिभा रे सहित कई साहित्यकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे. समारोह में वैरामुथु की साहित्यिक यात्रा और भारतीय भाषाओं के प्रति उनके योगदान को विशेष रूप से सराहा गया.


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