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W.O.R.L.D. मॉडल: आपके संगठन की अदृश्य संरचना को देखने के लिए एक विश्व-निर्माण ढांचा

इस लेख में नवाचार रणनीतिकार रंजन मलिक ने W.O.R.L.D. मॉडल पेश किया है, जो बताता है कि किसी भी संगठन में वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत उसकी 'अदृश्य दुनिया' को समझने से होती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

अधिकांश संगठन इसलिए परिवर्तन करने में विफल नहीं होते क्योंकि उनके पास रणनीति की कमी होती है. वे इसलिए विफल होते हैं क्योंकि वे उन अदृश्य दुनियाओं के भीतर रहकर बदलाव लाने की कोशिश कर रहे होते हैं, जिन्हें वे स्वयं देख नहीं पाते. यही वह छिपा हुआ पैटर्न है, जो अधूरे पुनर्गठन, असफल संगठनात्मक संस्कृति कार्यक्रमों, धीमी डिजिटल पहलों और लगातार निराशाजनक साबित हो रहे AI कार्यान्वयन के पीछे दिखाई देता है.

नेता प्रक्रियाओं को फिर से डिजाइन करते हैं, संगठनात्मक ढांचे (Org Charts) बदलते हैं और परिवर्तन की नई रूपरेखाएं (Transformation Roadmaps) पेश करते हैं, फिर भी संगठन का व्यवहार आश्चर्यजनक रूप से पहले जैसा ही बना रहता है.

समस्या शायद ही कभी स्वयं रणनीति में होती है.

समस्या उस दुनिया में होती है, जो रणनीति के नीचे मौजूद होती है.

सफलता का जाल

हर संगठन की शुरुआत एक जिज्ञासु बच्चे की तरह होती है, जो लगातार प्रयोग करता है, असफल होता है और बार-बार पूछता है- "और क्या? और क्या?"

यह खोज तब तक जारी रहती है, जब तक कोई तरीका सफल नहीं हो जाता.

फिर पूरी प्रक्रिया बदल जाती है.

जो काम करता है, उसे नियमों में बदल दिया जाता है.

वे नियम लागू किए जाते हैं.

समय के साथ संगठन प्रयोग करना छोड़ देता है और अपनी स्थापित व्यवस्था की रक्षा करने लगता है.

खोज की जीवंत प्रक्रिया धीरे-धीरे दोहराव की स्थिर प्रणाली में बदल जाती है.

लेकिन इस दिखाई देने वाले बदलाव के नीचे एक और गहरी प्रक्रिया चल रही होती है.

हर सफल अनुभव के साथ संगठन अपनी एक दुनिया बना रहा होता है.

यह कोई भौतिक दुनिया नहीं होती.

यह एक व्याख्यात्मक (Interpretive) दुनिया होती है— ऐसी सुव्यवस्थित संरचना, जो तय करती है कि कौन-से प्रश्न पूछे जाएंगे, कौन-से विकल्प व्यवहारिक माने जाएंगे और कौन-सी संभावनाएं हमेशा के लिए दृष्टि से बाहर रह जाएंगी.

मैं इस संरचना को "Meaningplex" कहता हूं.

इसमें चार तत्व शामिल होते हैं.

धारणाएं (Assumptions): ऐसे विश्वास, जो इतने गहरे बैठ चुके होते हैं कि अब वे विश्वास भी नहीं लगते.

सीमाएं (Boundaries): वे क्षेत्र जिन्हें वर्जित माना जाता है या वे बाज़ार जिन्हें ब्रांड के स्तर से नीचे समझा जाता है.

अनलिखे नियम (Unwritten Rules): वह वास्तविक संचालन तंत्र, जो तय करता है कि वास्तव में निर्णयों पर प्रभाव किसका होगा.

साझा अर्थ (Shared Meanings): व्यवहार में "नवाचार" जैसे शब्दों का वास्तविक अर्थ क्या है, न कि संगठन दावा क्या करता है.

यहां सबसे महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है.

नेता अपने Meaningplex के बारे में नहीं सोचते.

वे उसी के भीतर रहकर सोचते हैं.

वह विश्लेषण का विषय नहीं होता.

बल्कि वही वह चश्मा होता है, जिसके माध्यम से बाकी हर चीज़ का विश्लेषण किया जाता है.

एक पारंपरिक कहानी इसे अच्छी तरह समझाती है.

एक युवा मछली एक बूढ़े मेंढक से पूछती है-

"आप अक्सर पानी के बाहर की दुनिया की बात करते हैं. मुझे बताइए, पानी क्या होता है?"

मेंढक कुछ क्षण रुकता है.

मछलियों से अधिक पानी को कौन समझ सकता है?

फिर उसे एहसास होता है-

मछली पानी को इसलिए नहीं देख सकती क्योंकि वही उसके चारों ओर हर जगह मौजूद है.

संगठन भी अपनी धारणाओं को ठीक इसी तरह अनुभव करते हैं.

और जिसे आप देख नहीं सकते, उसे आप बदल भी नहीं सकते.

हर संगठन के तीन रूप

हर संगठन एक ही समय में तीन अलग-अलग रूपों में मौजूद होता है.

प्रदर्शित संगठन (Projected Organisation) वह है, जिसे नेतृत्व दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है, रणनीति दस्तावेज, निवेशकों के लिए प्रस्तुतियां और संगठन के मूल्य (Values Statements).

वास्तविक संगठन (Real Organisation) वह है, जिसे उसके भीतर काम करने वाले लोग रोज़ अनुभव करते हैं, कौन-से नियम वास्तव में लागू होते हैं, किसकी राय पद से अधिक प्रभावशाली होती है और कौन-सा व्यवहार वास्तव में पदोन्नति दिलाता है, चाहे आधिकारिक मानदंड कुछ भी कहें.

अनुभूत संगठन (Perceived Organisation) वह है, जिसे बाहरी दुनिया ग्राहक, नियामक और साझेदार, वास्तव में देखती और अनुभव करती है.

एक नए संगठन में ये तीनों रूप लगभग एक जैसे होते हैं.

लेकिन सफलता इन्हें धीरे-धीरे अलग कर देती है.

और जब नेता इस अंतर को देखते हैं, तो वे प्रायः नए संदेश (Messaging) या संशोधित प्रोत्साहन (Incentives) लेकर आते हैं.

बहुत कम लोग रुककर यह मूलभूत प्रश्न पूछते हैं-

"आखिर हम वास्तव में किस दुनिया में रह रहे हैं?" 

W.O.R.L.D. मॉडल

नेता अपने संगठन को बदलने से पहले उस छिपी हुई दुनिया को सामने लाएं, जिसे संगठन ने वर्षों में स्वयं निर्मित किया है. मैं इस प्रक्रिया को विश्व-निर्माण कहता हूं. यह किसी काल्पनिक दुनिया की रचना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक अनुशासन है.

यह अवधारणा कथा-सिद्धांत (Narrative Theory) से प्रेरित है.

इससे पहले कि J. R. R. Tolkien ने अपनी किसी पुस्तक का पहला अध्याय लिखा होता, उन्होंने वर्षों तक Middle-earth की भौगोलिक संरचना, भाषाएं और उसका इतिहास तैयार किया.

उस कहानी में कुछ भी आकस्मिक नहीं था.

हर चीज़ उस दुनिया की संरचना से उत्पन्न होती थी.

संगठन भी लगभग इसी तरह अपनी दुनिया बनाते हैं, हालांकि अधिकांश मामलों में यह प्रक्रिया जानबूझकर नहीं होती.

W.O.R.L.D. मॉडल उन पांच आयामों का मानचित्र प्रस्तुत करता है, जो इस दुनिया को आकार देते हैं.

1. W - Waters (पानी): हम वास्तव में कौन-सा खेल खेल रहे हैं?

यह वह अदृश्य माध्यम है, जिसके भीतर संगठन काम करता है.

यानी बाजार की परिभाषाएं, प्रतिस्पर्धा से जुड़ी धारणाएं और पूरे उद्योग की कार्यप्रणाली.

जिस तरह पानी मछलियों को हर समय घेरे रहता है और इसलिए उन्हें दिखाई नहीं देता, उसी तरह ये परिस्थितियां भी इतनी सर्वव्यापी होती हैं कि संगठन इन्हें देख ही नहीं पाता.

NVIDIA इसका उत्कृष्ट उदाहरण है.

2012 में यह मुख्य रूप से गेम खेलने वालों के लिए ग्राफिक्स चिप बनाने वाली कंपनी थी.

2016 तक उसके नेतृत्व ने उसे AI इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के रूप में पुनर्परिभाषित कर दिया.

2024 तक उसके CEO Jensen Huang अपने ग्राहकों को "AI Factories" संचालित करने वाले संगठनों के रूप में वर्णित करने लगे.

आज यह दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक है.

यह केवल ब्रांडिंग नहीं थी.

इस बदलाव ने भर्ती प्रक्रिया, साझेदारियों, पूरे इकोसिस्टम की रणनीति और निवेश के दृष्टिकोण को बदल दिया.

कई संगठन इसलिए परिवर्तन में विफल नहीं होते क्योंकि वे खराब क्रियान्वयन करते हैं.

वे इसलिए विफल होते हैं क्योंकि वे पुराने खेल को पहले से अधिक दक्षता के साथ खेलते रहते हैं.

2. O - Origins (उत्पत्ति): हमारा अतीत आज भी हमें कैसे संचालित कर रहा है?

हर संगठन अपने साथ कुछ विरासत में मिले स्वभाव लेकर चलता है.

कुछ उसकी स्थापना के साथ ही जुड़ जाते हैं.

कुछ उद्योग या समय के प्रभाव से अनजाने में विकसित होते हैं.

और कुछ संकटों या नेतृत्व के विशेष निर्णयों के कारण जानबूझकर विकसित किए जाते हैं.

Patagonia की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता इसका उदाहरण है.

1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी लगभग दिवालिया होने की स्थिति में पहुंच गई थी.

तब उसके संस्थापक Yvon Chouinard ने महसूस किया कि स्वयं उनकी कंपनी की सप्लाई चेन पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है.

उस संकट ने ऐसे स्वभाव को जन्म दिया, जो आज कंपनी के हर बड़े निर्णय को प्रभावित करता है.

यहां तक कि 2022 में कंपनी का स्वामित्व एक पर्यावरण ट्रस्ट को सौंपने का निर्णय भी उसी सोच का परिणाम था.

यह एक Induced Instinct (संकट से उत्पन्न स्वभाव) था, जो तीन दशकों में कंपनी की मूल पहचान जैसा बन गया.

जब नेता कहते हैं-

"हमारे उद्योग में हमेशा से ऐसा ही होता आया है."

तो अधिकांश मामलों में वे किसी वस्तुनिष्ठ सत्य का नहीं, बल्कि अपने भीतर समाए हुए Imbibed Instinct (सीखे हुए स्वभाव) का वर्णन कर रहे होते हैं.

3. R - Roles (भूमिकाएं): हम किन लोगों की दुनिया को समझने में विफल हो रहे हैं?

हितधारक (Stakeholders) केवल वे लोग नहीं हैं, जिनकी सेवा की जानी है.

वे स्वयं अपनी-अपनी दुनिया में रहने वाले सक्रिय पात्र (Agents) हैं, जिनकी अपनी अलग सोच और तर्क प्रणाली होती है.

जब IKEA ने 2018 में Hyderabad में अपना पहला स्टोर खोला, तब उसका वैश्विक मॉडल यह मानकर चल रहा था कि ग्राहक अपना फर्नीचर स्वयं जोड़ना पसंद करेंगे.

लेकिन भारत में 800 से अधिक घरों का अध्ययन करने के बाद कंपनी को पता चला कि यहां स्वयं फर्नीचर जोड़ने को लोग सुविधा नहीं, बल्कि लागत बचाने का तरीका समझते हैं.

इसके अलावा घरेलू सहायकों की उपलब्धता के कारण यह मॉडल काफी हद तक अप्रासंगिक था.

कंपनी ने इसे ग्राहकों की गलती नहीं माना.

उसने स्वयं से पूछा-

"हम किसकी दुनिया को समझने में असफल रहे?"

इसके बाद IKEA ने 150 लोगों की असेंबली टीम बनाई, अपने उत्पादों में बदलाव किए और लगभग एक हजार वस्तुओं की कीमत 200 रुपये से कम रखी.

उसने अपनी मूल पहचान को बनाए रखा, लेकिन स्थानीय दुनिया की संरचना का सम्मान किया.

4. L - Load-Bearing Frictions (भार वहन करने वाले तनाव): कौन-से तनाव हमारी पहचान तय करते हैं?

यह मॉडल का सबसे उल्टा लगने वाला लेकिन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है.

प्रबंधन की पारंपरिक सोच में घर्षण (Friction) को अक्षम्यता माना जाता है.

लेकिन कुछ तनाव ऐसे होते हैं, जो संगठन की मूल संरचना का हिस्सा होते हैं.

यही उसकी विशिष्ट पहचान बनाते हैं.

लक्ज़री ब्रांड हमेशा **विशिष्टता बनाम विस्तार** के बीच संतुलन रखते हैं.

सामाजिक उद्देश्य वाले संगठन **प्रभाव बनाम वित्तीय स्थिरता** के बीच संतुलन रखते हैं.

समाचार पत्र **संपादकीय स्वतंत्रता बनाम राजस्व** के बीच संतुलन बनाए रखते हैं.

ये तनाव बोझ नहीं हैं.

ये संगठन की संरचना को संभालने वाले स्तंभ हैं.

यदि इनमें से किसी एक पक्ष को अधिकतम करने की कोशिश की जाए, तो वही चीज़ नष्ट हो जाती है जो संगठन को अलग पहचान देती थी.

5. D - Doctrine (सिद्धांत): वास्तव में हमारे संगठन को कौन-से नियम संचालित करते हैं?

यह पुरस्कार और परिणाम का वह अनलिखा नियम है, जो वास्तव में संगठन को चलाता है.

यह वह नहीं है जो संगठन अपने मूल्यों में लिखता है.

यह वह है, जिसे वह वास्तव में पुरस्कृत करता है, पदोन्नति देता है और सहन करता है.

2014 में Amazon ने उम्मीदवारों की भर्ती के लिए एक AI प्रणाली विकसित की.

2015 तक यह स्पष्ट हो गया कि यह प्रणाली महिलाओं के साथ व्यवस्थित रूप से भेदभाव कर रही थी.

जिस बायोडाटा में "Women's" शब्द होता, उसे यह कम अंक देती थी.

आम तौर पर इसका कारण पक्षपाती डेटा को माना गया.

लेकिन वास्तविकता यह थी कि AI को पिछले दस वर्षों के वास्तविक भर्ती निर्णयों पर प्रशिक्षित किया गया था.

उसने Amazon के वास्तविक संचालन सिद्धांत (Doctrine) को सीख लिया था, जिसमें घोषित विविधता लक्ष्यों की तुलना में सांस्कृतिक अनुकूलता और तेज़ी को अधिक महत्व दिया जाता था.

2017 में इस परियोजना को बंद कर दिया गया.

AI ने पक्षपात पैदा नहीं किया था.

उसने केवल उसी दुनिया को ईमानदारी से सीख लिया था, जिसके भीतर उसे प्रशिक्षित किया गया था. 

AI क्यों बदल देता है पूरा परिदृश्य

AI प्रणालियां नेतृत्व की प्रस्तुतियों, विज़न दस्तावेज़ों या संगठन के घोषित मूल्यों (Values Statements) से नहीं सीखतीं.

वे व्यवहार से सीखती हैं.

वे कार्यप्रवाह (Workflows) से सीखती हैं.

वे उन निर्णयों से सीखती हैं, जिन्हें संगठन बार-बार दोहराता है.

दूसरे शब्दों में, AI का संपर्क Projected Organisation (प्रदर्शित संगठन) से नहीं, बल्कि Real Organisation (वास्तविक संगठन) से होता है.

पहले, यदि किसी संगठन का Meaningplex असंगत होता था, तो उसका प्रभाव धीरे-धीरे वर्षों में दिखाई देता था.

AI इस पूरी प्रक्रिया को बहुत छोटा कर देता है.

यह कुछ ही सप्ताहों में विरोधाभासों को उजागर कर देता है और संगठन की आंतरिक असंगति को अनुमान (Inference) की गति से कई गुना बढ़ा देता है.

इस कारण AI केवल परिवर्तन का एक उपकरण नहीं रह जाता.

वह स्मृति रखने वाला एक दर्पण बन जाता है.

शुरुआत करने के लिए तीन बातचीत

यदि आप अपने संगठन की छिपी हुई संरचना (Hidden Architecture) को सामने लाना चाहते हैं, तो अपने नेतृत्व दल के साथ तीन निदानात्मक (Diagnostic) बातचीत करें.

प्रत्येक बातचीत लगभग बीस मिनट की होगी.

1. Waters पर बातचीत

हर नेता से अलग-अलग यह प्रश्न लिखने के लिए कहिए—

"हम वास्तव में किस व्यवसाय में हैं?"

इसके बाद सभी उत्तरों की तुलना कीजिए.

यदि उत्तर अलग-अलग हैं, तो इसका अर्थ है कि संगठन की दुनिया साझा नहीं है.

2. किसी एक Origin का पता लगाइए

संगठन की किसी ऐसी वर्तमान प्रवृत्ति (Instinct) की पहचान कीजिए, जिसके बारे में सभी कहते हैं—

"हम ऐसा कभी नहीं करेंगे."

अब उसे उसके इतिहास से जोड़िए.

क्या वह संगठन के साथ जन्मी थी?

क्या वह उद्योग से सीखी गई थी?

या किसी संकट अथवा नेतृत्व के निर्णय के कारण विकसित हुई थी?

और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न-

क्या वह परिस्थिति, जिसने इस प्रवृत्ति को जन्म दिया था, आज भी मौजूद है?

3. Doctrine को दर्ज कीजिए

हाल की दस पदोन्नतियों (Promotions) और बंद की गई पांच परियोजनाओं (Discontinued Projects) का अध्ययन कीजिए.

फिर स्वयं से पूछिए-

यदि कोई निष्पक्ष पर्यवेक्षक इन्हें देखे, तो वह संगठन के संचालन के कौन-से नियमों का अनुमान लगाएगा?

संगठन जिन मूल्यों का दावा करता है और जिन नियमों के अनुसार वास्तव में काम करता है, उनके बीच का अंतर प्रायः नेताओं की अपेक्षा से कहीं अधिक बड़ा होता है.

इन तीनों अभ्यासों के लिए किसी सलाहकार (Consultant), किसी नई तकनीक या किसी अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं है.

इनके लिए केवल एक चीज चाहिए-

सतह के नीचे झांकने की इच्छा.

अनुशासन (The Discipline)

रणनीति की शुरुआत यह तय करने से नहीं होती कि आपको कहाँ जाना है.

उसकी शुरुआत यह समझने से होती है कि आप जिस दुनिया से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, वह दुनिया वास्तव में कैसी है.

जो संगठन अपनी स्वयं की संरचना (Architecture) को देख सकता है, वह यह चुन सकता है कि क्या सुरक्षित रखना है, क्या छोड़ देना है और क्या दोबारा बनाना है.

जो संगठन ऐसा नहीं कर सकता, वह लगातार गलत समस्याओं को पहले से अधिक सटीकता के साथ हल करता रहेगा.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखिका के अपने हैं और आवश्यक नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करें.)

अतिथि लेखक- रंजन मलिक

रंजन मलिक, बेंगलुरु स्थित Primalise के सह-संस्थापक हैं. यह संस्था नवाचार रणनीति (Innovation Strategy) और वर्ल्डबिल्डिंग (Worldbuilding) पर केंद्रित एक परामर्श कंपनी (Consultancy) है.
 


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