✕

होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

लंदन ने अभी वह काम किया है जिसका मैं लंबे समय से इंतजार कर रहा था कि कोई, कहीं भी, करे. उसने इस बात के लिए एक संग्रहालय खोला है कि किशोर होना वास्तव में क्या मायने रखता है. कैम्बडेन स्थित म्यूजियम ऑफ यूथ कल्चर को बनने में लगभग तीस वर्ष लगे. इसकी शुरुआत एक बगीचे की छोटी-सी शेड से हुई थी, जहां इसके संस्थापक ने ब्रिटिश उपसंस्कृतियों की तस्वीरें एकत्र करना शुरू किया था, और अंततः यह एक लाख वस्तुओं के अभिलेखागार और एक स्थायी भौतिक स्थान तक पहुंच गया.

इस संग्रह में मॉड्स, रॉकर्स, रेवर्स, स्किनहेड्स, ग्राइम और इमो जैसी संस्कृतियों से लेकर उन स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की शर्ट तक शामिल हैं, जिन पर फेल्ट-टिप पेन से विदाई संदेश लिखे गए थे, और उन कस्टमाइज्ड हैंडबैग्स तक, जिन्हें युवाओं ने अपनी पहचान का प्रतीक बना दिया था. सबसे उल्लेखनीय दान में से एक एक वेल्डिंग मास्क है, जिस पर "हेट" शब्द उकेरा गया है. इसे 1976 में एक किशोर ने पंक संगीत कार्यक्रमों में पहना था क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसे पहचान न लिया जाए और उसकी अप्रेंटिसशिप न चली जाए. यह एक वस्तु ही उस विशेष दशक में युवा होने के अनुभव के बारे में उतना कुछ कह देती है, जितना कई बार पूरी लाइब्रेरी भर की पाठ्यपुस्तकें भी नहीं कह पातीं.

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है और जिसे संस्थागत अधिकार के बजाय आम लोगों के दान से बनाया गया है. कार्यक्रम के एक प्रमुख सदस्य के अनुसार, अधिकांश संग्रहालय बचपन का दस्तावेजीकरण लगभग तेरह या चौदह वर्ष की उम्र पर आकर रोक देते हैं, ठीक उसी समय जब चीजें वास्तव में रोचक होना शुरू होती हैं. यह संग्रहालय विशेष रूप से वहीं से आगे बढ़ने के लिए अस्तित्व में आया है, जहां अन्य संग्रहालय चुपचाप रुक जाते हैं.

मैं बिना किसी संकोच के इसका स्वागत करूंगा. यह बिल्कुल वैसी ही संस्था है, जिसका समर्थन म्यूज़ियम लर्निंग नेटवर्क करता है. आखिरकार किसी ने युवाओं को एक ऐसे विषय के रूप में देखा है, जो गंभीर और स्थायी क्यूरेशन के योग्य है, न कि जीवन के एक ऐसे चरण के रूप में जिसे "वास्तविक" इतिहास शुरू होने से पहले पीछे छोड़ दिया जाए. कैम्बडेन ने यह साबित कर दिया है कि किशोरावस्था और उपसंस्कृतियों के इर्द-गिर्द एक पूरा संग्रहालय बनाया जा सकता है और लोग उसमें दान भी करेंगे, उसे देखने भी आएंगे और उसकी परवाह भी करेंगे. लेकिन यहीं मैं केवल तालियां बजाकर आगे नहीं बढ़ सकता. ब्रिटेन ने अपनी अपेक्षाकृत छोटी युवा आबादी के लिए एक संग्रहालय बनाया है.

भारत में पंद्रह से उनतीस वर्ष की आयु के लगभग 37.1 करोड़ लोग हैं, जो दुनिया में किसी भी देश की सबसे बड़ी युवा आबादी है. यह 1.45 अरब की आबादी वाले देश में मौजूद है, जहां आधी आबादी 29 वर्ष से कम आयु की है. यदि ब्रिटेन की सौ वर्षों की किशोर संस्कृति एक अभिलेखागार की हकदार है, तो भारत की कई पीढ़ियों की युवा संस्कृति, जो दर्जनों भाषाओं, क्षेत्रों और ऐसी समानांतर उपसंस्कृतियों में फैली है जो शायद ही एक-दूसरे से संवाद करती हों, वास्तव में क्या पाने की हकदार है?

यही वह बात है, जो हमें रातों को जागकर सोचने पर मजबूर कर सकती है, और वह भी एक अच्छे अर्थ में. भारत कोई एक युवा संस्कृति नहीं है, जो एक संग्रहालय की प्रतीक्षा कर रही हो. यह दर्जनों संस्कृतियों का समूह है, जो दशकों और भौगोलिक सीमाओं के पार एक-दूसरे पर परतों की तरह मौजूद हैं. 1970 के दशक की कोलकाता की कॉलेज संस्कृति, अपनी अड्डेबाजी और राजनीतिक पैम्फलेट संस्कृति के साथ, एक बिल्कुल अलग अभिलेखागार छोड़ गई है. वहीं आज बेंगलुरु के टेक-कैंपसों की सड़कों पर विकसित हो रही संस्कृति, छोटे शहरों में तेजी से फैलती आकांक्षी हसल संस्कृति, या इंस्टाग्राम पर बीस की उम्र के युवाओं द्वारा संचालित विवाह-मौसम की फैशन अर्थव्यवस्था, एक बिल्कुल अलग कहानी कहती है.

इनमें से कोई भी एक ही कैम्बडेन-शैली की इमारत में समाहित नहीं हो सकता. इन्हें एक संग्रहालय में समेटने की कोशिश वही काम करेगी, जिससे कैम्बडेन के संस्थापक बचना चाहते हैं, यानी जीवंत और बहुस्तरीय अनुभवों को एक साफ-सुथरी, एकल कथा में बदल देना. इसलिए महत्वाकांक्षा एक भारतीय युवा संस्कृति संग्रहालय बनाने की नहीं होनी चाहिए. यह एक नेटवर्क होना चाहिए, शहर-दर-शहर और पीढ़ी-दर-पीढ़ी, जहां प्रत्येक संग्रहालय उस चीज़ को संजो सके जिसे दूसरा संरचनात्मक रूप से नहीं कर सकता. मुंबई का संग्रहालय लखनऊ जैसा नहीं होगा. चेन्नई का संग्रहालय शिलांग जैसा नहीं होगा. यह इस विचार की कमजोरी नहीं, बल्कि इसके पक्ष में सबसे बड़ा तर्क है.

यदि आप पर्याप्त संख्या में भौतिक संग्रहालय नहीं बना सकते, तो आइए इसे ऑनलाइन बनाएं. लेकिन आइए इसे करें. कैम्बडेन को बधाई, जिसने साबित कर दिया कि यह मॉडल काम करता है. अब भारत की बारी है कि वह इसे बड़े पैमाने पर साबित करे, और वह भी कई बार.

 

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं और आवश्यक नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करें.)

अरिहान सिंह, अतिथि लेखक

(अरिहान सिंह द बॉम्बे इंटरनेशनल स्कूल की कक्षा 10 के छात्र हैं. उन्हें भारतीय इतिहास में गहरी और विकसित होती रुचि है. उनका उद्देश्य संग्रहालयों की शक्ति को सीखने के एक मंच के रूप में जीवंत बनाना है.)

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

कविता में एक शोकगीत: मेरे मित्र और बैचमेट, हेमचंद सिरोही, IAS

केजे अल्फोंस लिखते हैं, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और बिहार के पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में, हेमचंद सिरोही को प्रशासनिक कुशलता, जन-केंद्रित शासन और जनसेवा में योगदान के लिए व्यापक सम्मान प्राप्त था. उनके योगदानों में महाबोधि मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर की मान्यता दिलाना और जमीनी स्तर पर विकास की पहल शामिल थीं.

4 days ago

दो दुनियाओं के बीच जिंदगी: उथल-पुथल भरे समय की चुनौती

लेखक के अनुसार, हमारे आसपास की दुनिया उतनी नहीं बदली है, जितनी हमारे दिमाग के भीतर की दुनिया बदल गई है. लगातार आती खबरों, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा होने वाली चिंताओं के इस दौर में चुनौती है अपना ध्यान फिर से अपने नियंत्रण में लेना और उन चीजों पर फोकस करना, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं.

4 days ago

कलाकार की अनंत रेखाएं: जोगेन चौधरी को श्रद्धांजलि

87 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले प्रख्यात कलाकार अपने पीछे ऐसी विशिष्ट कला छोड़ गए हैं, जो उनकी खास क्रॉस-हैचिंग शैली, असामान्य रेखाओं और गहराई से मानवीय चित्रों के लिए पहचानी जाती है.

5 days ago

समुद्र मंथन का अर्थशास्त्र: समृद्धि के लिए विरोधी शक्तियों की जरूरत क्यों है

लेखिका प्रियंका शर्मा कैंतुरा इस लेख में बताती हैं कि देवताओं, असुरों और लक्ष्मी के प्राकट्य की प्राचीन कथा प्रतिस्पर्धा, सहयोग और धन सृजन के बारे में क्या सीख देती है.

1 week ago

जेमी बीटन: असाधारण दिमाग और अरबों डॉलर के कारोबार के पीछे ज्योतिषीय गणना

क्रिमसन एजुकेशन के संस्थापक की शैक्षणिक महत्वाकांक्षा, उद्यमशीलता में उभार और 2027 की संभावनाओं का ज्योतिषीय विश्लेषण

1 week ago


बड़ी खबरें

दिल्ली में 1 नवंबर से BS-6 से पुराने वाहनों की नो एंट्री, जानें किन गाड़ियों को मिलेगी छूट

इस फैसले का असर दिल्ली से सटे हरियाणा के शहरों से आने वाले वाहनों पर भी पड़ेगा. खासतौर पर गुरुग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को इस नियम का ध्यान रखना होगा.

1 day ago

सरदार पटेल के विचारों पर आगे बढ़ रहा भारत, रक्षा उत्पादन 1.80 लाख करोड़ रुपये के पार: राजनाथ सिंह

सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर भारत-भारती ने दिल्ली में आयोजित किया राष्ट्रीय समारोह, रक्षा मंत्री ने कहा- राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों के खिलाफ देश एकजुट रहेगा

18 hours ago

तमिलनाडु में 5 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को मिलेगा ब्रॉडबैंड कनेक्शन, केंद्र ने दी सब्सिडी को मंजूरी

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत तमिलनाडु के 4,767 गांवों तक मांग के आधार पर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाई जाएगी. केंद्र की वित्तीय सहायता से ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी.

1 day ago

सोना 4,200 रुपये और चांदी 10 हजार रुपये टूटी, एक साल के निचले स्तर पर पहुंचे भाव; जानें गिरावट की वजह

MCX पर चांदी करीब 5 फीसदी और सोना 3 फीसदी तक टूट गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई.

1 day ago

IDBI बेच रही थी LIC, उसी दौरान Fairfax की कंपनी के बोर्ड में भी रहे LIC के निदेशक

पूर्व नीति आयोग प्रमुख, RBI के डिप्टी गवर्नर, SEBI बोर्ड के सदस्य, रक्षा सचिव और LIC के चेयरमैन जैसे सार्वजनिक पदों पर रह चुके लोगों को Fairfax की भारतीय कंपनियों ने अपने साथ जोड़ा.

1 day ago