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SEBI के आदेश से ₹3,144 करोड़ की फंड जुटाने की योजना पर नहीं पड़ेगा असर: ZEE
कंपनी के अनुसार, इस फंड जुटाने का उद्देश्य उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना तथा हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के हालिया आदेश के बावजूद ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्रस्तावित ₹3,144 करोड़ की फंड जुटाने की योजना पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा. कंपनी ने कहा कि वह सेबी के अंतिम आदेश का कानूनी विशेषज्ञों के साथ अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार करेगी. कंपनी के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, "कंपनी को सेबी का आदेश प्राप्त हो गया है और इस संबंध में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है."
फंड जुटाने की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी
जी ने दोहराया कि सेबी का आदेश उसके पूंजी जुटाने के प्रस्ताव से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है. कंपनी ने कहा कि 31 जुलाई 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक (EGM) में शेयरधारकों की मंजूरी और स्टॉक एक्सचेंजों से आवश्यक नियामकीय स्वीकृतियां मिलने के बाद अब वह फंड जुटाने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी.
कंपनी के अनुसार, इस फंड जुटाने का उद्देश्य उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना तथा हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है.
हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए उठाए जाएंगे कानूनी कदम
जी ने कहा कि कंपनी और उसके प्रमोटरों पर लगाए गए आरोपों के संबंध में वह कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाएगी ताकि सभी हितधारकों के हितों की रक्षा की जा सके.
क्या है पूरा मामला?
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में सेबी ने ज़ी की हैदराबाद स्थित संपत्ति को प्रमोटर समूह से जुड़ी एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए ऋण के लिए बिना अनुमति गिरवी रखने के मामले में अंतिम आदेश जारी किया है.
सेबी ने जी एंटरटेनमेंट को दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया है. वहीं कंपनी के संस्थापक एवं चेयरमैन एमेरिटस सुभाष चंद्र और प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) पुनीत गोयनका पर एक-एक वर्ष तक प्रतिभूति बाजार में भाग लेने पर रोक लगा दी गई है. इसके अलावा कंपनी और दोनों अधिकारियों पर मौद्रिक जुर्माना भी लगाया गया है.
बिना मंजूरी गिरवी रखी गई थी संपत्ति
सेबी के अनुसार, ज़ी की हैदराबाद स्थित संपत्ति को निदेशक मंडल, ऑडिट समिति या शेयरधारकों की मंजूरी के बिना ऋण के लिए संपार्श्विक (Collateral) के रूप में गिरवी रखा गया था. साथ ही इस लेनदेन का पर्याप्त खुलासा भी नहीं किया गया, जो नियामकीय नियमों का उल्लंघन माना गया.
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