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मोदी @76: भारत की विकास गाथा के केंद्र में उद्योग और उद्यमिता
इस लेख में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विजन और भारत को एक मजबूत विनिर्माण, नवाचार और निर्यात अर्थव्यवस्था में बदलने पर विचार रखें हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 44 minutes ago
हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को उनके 76वें जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं. कामना है कि वे इसी ऊर्जा और दृढ़ संकल्प के साथ देश का नेतृत्व करते रहें. इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स में हम भारत के आर्थिक बदलाव के केंद्र में उद्योग और उद्यमिता को रखने पर श्री मोदी द्वारा दिए गए जोर की गहराई से सराहना करते हैं. उनके दृष्टिकोण ने भारत को मुख्य रूप से एक बड़े उपभोक्ता बाजार से अधिक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण, नवाचार और निर्यात केंद्र की ओर ले जाने की कोशिश की है, साथ ही निजी निवेश और उद्यमिता की बुनियाद को मजबूत किया है.
मेक इन इंडिया और विनिर्माण को बढ़ावा
एक महत्वपूर्ण पहल 2014 में शुरू किया गया मेक इन इंडिया अभियान रहा है, जिसने विनिर्माण, निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन को राष्ट्रीय आर्थिक एजेंडे के केंद्र में रखा.
पिछले वर्षों में इस विजन को निवेश आकर्षित करने, घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने और भारतीय कारोबारों को वैश्विक वैल्यू चेन के साथ अधिक गहराई से जोड़ने के उद्देश्य वाली कई नीतिगत पहलों का समर्थन मिला है.
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि इस अवधि के दौरान भारत में पर्याप्त एफडीआई आया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्विक निवेशकों की निरंतर रुचि को दर्शाता है. साथ ही, निवेश माहौल को बेहतर बनाने के प्रयासों का उद्देश्य भारत में कारोबार स्थापित करने और परिचालन का विस्तार करने को आसान बनाना रहा है.
पीएलआई और क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक नीति
प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव कार्यक्रम ने इस विजन को क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक नीति का ढांचा दिया है.
14 क्षेत्रों में पीएलआई योजनाओं ने मार्च 2026 तक 2.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश आकर्षित किया और 15.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात किया. इन योजनाओं से 14.15 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा हुए हैं.
इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, स्पेशलिटी स्टील, सोलर मॉड्यूल, दूरसंचार और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों के लिए यह कार्यक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा है. इसका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत करना भी है.
कारोबारी माहौल में सुधार
समग्र कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने के प्रयास भी उतने ही महत्वपूर्ण रहे हैं.
जीएसटी की शुरुआत ने अप्रत्यक्ष करों के लिए एक अधिक एकीकृत ढांचा तैयार किया, जबकि नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम, नियामकीय अनुपालनों में कमी, एफडीआई सुधार, नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर कार्यक्रम और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप जैसी पहलों का उद्देश्य कारोबारों और निवेशकों के लिए बाधाओं को कम करना रहा है.
ये सुधार इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कारोबार करने में आसानी केवल कागजी कार्रवाई कम करने तक सीमित नहीं है. इसका मतलब उन उद्यमियों, निर्माताओं और निवेशकों के लिए अधिक निश्चितता और दक्षता पैदा करना है, जो लंबे समय के फैसले लेते हैं.
वैश्विक एकीकरण के साथ रणनीतिक आत्मनिर्भरता
प्रधानमंत्री मोदी के औद्योगिक विजन में वैश्विक एकीकरण के साथ रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर भी लगातार जोर दिया गया है.
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के बढ़ते आधार, फार्मास्यूटिकल्स के विस्तार और सेमीकंडक्टर तथा उन्नत-तकनीक क्षमताओं को विकसित करने के प्रयासों से घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के साथ भारतीय कंपनियों को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है.
यह संतुलन महत्वपूर्ण है. आत्मनिर्भरता का मतलब अलगाव नहीं होना चाहिए. बल्कि इसका मतलब ऐसी क्षमताओं, तकनीकों और आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण होना चाहिए, जो भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएं.
नवाचार और इंफ्रास्ट्रक्चर
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया गया कि भारत की ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंकिंग 2019 में 66वें स्थान से सुधरकर 2025 में 38वें स्थान पर पहुंच गई. मेरे लिए यह आर्थिक विकास के वाहक के रूप में नवाचार, तकनीक और उद्यमिता को दिए जा रहे बढ़ते महत्व को दर्शाता है.
इंफ्रास्ट्रक्चर इस बदलाव का एक और प्रमुख स्तंभ रहा है. जिसे कभी कमजोरी माना जाता था, वह अब तेजी से मजबूती का क्षेत्र बन रहा है. पीएम गति शक्ति, औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स सुधार और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार सार्वजनिक निवेश कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और आर्थिक गतिविधियों की बुनियाद मजबूत करने में मदद कर रहे हैं.
बदलती दुनिया के लिए आर्थिक विजन
प्रधानमंत्री मोदी से हमें एक ऐसा आर्थिक विजन मिलता है, जो कई आयामों तक फैला हुआ है, अधिक किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा से लेकर कई मुक्त व्यापार समझौतों में प्रतिबिंबित द्विपक्षीय व्यापार तक, और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने से लेकर भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के लिए प्रोत्साहित करने तक.
भारत कोविड-19 महामारी और वैश्विक आर्थिक माहौल में महत्वपूर्ण बदलावों सहित सामने आई चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ रहा है. मेरे विचार में, यह मजबूती पिछले एक दशक में तैयार की गई बुनियाद और भारत की विकास गति को बनाए रखने पर निरंतर ध्यान का परिणाम है.
आगे की राह
आगे की चुनौती इस गति को बनाए रखने की है.
भारत के पास एक और महत्वपूर्ण विनिर्माण, तकनीक, नवाचार और निर्यात केंद्र बनने का अवसर है. ऐसा करने के लिए भारतीय उद्योग की ओर से निरंतर निवेश, वैश्विक वैल्यू चेन के साथ मजबूत एकीकरण, रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर अधिक जोर और ऐसा माहौल जरूरी होगा, जो उद्यमिता तथा जोखिम लेने को प्रोत्साहित करे.
सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी महत्वपूर्ण बनी रहेगी. नीति ढांचा तैयार कर सकती है, लेकिन अंततः निवेश, नवाचार, रोजगार और निर्यात को आगे बढ़ाने का काम कारोबार करते हैं.
प्रधानमंत्री के लिए जन्मदिन की शुभकामना
उनके 76वें जन्मदिन पर मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं और ऐसे समय में आर्थिक दिशा और स्थिरता प्रदान करने के उनके प्रयासों के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं, जब वैश्विक माहौल अनिश्चित बना हुआ है.
उनके नेतृत्व में भारत ने दिखाया है कि वह उत्पादन, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कर सकता है और विकास कर सकता है. आगे की यात्रा निश्चित रूप से नई चुनौतियां लेकर आएगी, लेकिन यह महत्वपूर्ण अवसर भी पैदा करेगी.
प्रधानमंत्री मोदी को देश की सेवा में निरंतर ऊर्जा और सफलता के लिए मेरी शुभकामनाएं. कामना है कि भारत अपनी विकास यात्रा पर आगे बढ़ता रहे और वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक मजबूत शक्ति के रूप में उभरे.
अतिथि लेखक: डॉ. राजीव सिंह, महानिदेशक, इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC)
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