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मोदी @76: शिक्षा के क्षेत्र में कैसे बदला फोकस, यूनिवर्सिटी विस्तार से डिजिटल अकादमिक आईडी तक
नई शिक्षा नीति से स्किल इंडिया और APAAR तक, नरेंद्र मोदी सरकार के दौर में शिक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर बदलाव की कोशिश
किरण हजारिका 2 hours ago
17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 76 वर्ष के हो गए हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन और उनके नेतृत्व में सरकार के कामकाज को देखने के कई आयाम हैं, लेकिन शिक्षा ऐसा क्षेत्र है जहां पिछले एक दशक से अधिक समय में नीति, संस्थानों, कौशल विकास और तकनीक के स्तर पर कई पहल सामने आई हैं.
उच्च शिक्षा के विस्तार से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, स्किल इंडिया, समग्र शिक्षा और APAAR जैसी डिजिटल पहलों तक शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का एक बड़ा हिस्सा दिखाई देता है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2013-14 में देश में 723 विश्वविद्यालय थे, जबकि 2021-22 तक विश्वविद्यालय स्तर के संस्थानों की संख्या बढ़कर 1,168 हो गई. इसी अवधि में उच्च शिक्षा में कुल नामांकन भी बढ़ा. 2021-22 में यह 4.33 करोड़ था, जो 2014-15 के मुकाबले 91 लाख अधिक है.
NEP 2020: शिक्षा को नए ढांचे में ढालने की कोशिश
मोदी सरकार के शिक्षा एजेंडे में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा. इसका जोर केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित शिक्षा के बजाय बहुविषयक अध्ययन, कौशल, व्यावहारिक सीख, तकनीक और भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर रहा है.
NEP के तहत उच्च शिक्षा में Multiple Entry-Exit और Academic Bank of Credits जैसी व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाया गया. इससे विद्यार्थियों को अलग-अलग संस्थानों और पाठ्यक्रमों के बीच क्रेडिट ट्रांसफर तथा अपनी पढ़ाई को अधिक लचीले तरीके से आगे बढ़ाने का विकल्प मिलता है.
प्रधानमंत्री ने NEP के क्रियान्वयन पर जोर देते हुए शिक्षा को 21वीं सदी की जरूरतों और कौशल से जोड़ने की बात भी कही है. सरकार की विभिन्न पहलों में भारतीय ज्ञान प्रणालियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की दिशा भी शामिल है.
डिग्री के साथ कौशल पर जोर
मोदी सरकार के शिक्षा और रोजगार एजेंडे में स्किल डेवलपमेंट को लगातार महत्व दिया गया है. Skill India Mission के जरिए व्यावसायिक शिक्षा, प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया.
2025 में केंद्र सरकार ने Skill India Programme को 2026 तक जारी रखने और पुनर्गठित करने को मंजूरी दी. इसमें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0, प्रधानमंत्री नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम और जन शिक्षण संस्थान को एक संयुक्त कार्यक्रम के तहत रखा गया. सरकार ने Skill Hubs को IIT, NIT, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, PM SHRI स्कूलों समेत विभिन्न संस्थानों से जोड़ने की भी व्यवस्था की है. यानी शिक्षा को केवल कक्षा और परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार और बदलती अर्थव्यवस्था की जरूरतों से जोड़ने की कोशिश भी इस दौर की नीतियों में दिखाई देती है.
समग्र शिक्षा: स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से डिजिटल क्लासरूम तक
स्कूल शिक्षा के स्तर पर समग्र शिक्षा योजना को NEP 2020 के उद्देश्यों के साथ जोड़ा गया. योजना में बुनियादी ढांचे, डिजिटल शिक्षा, ICT, स्मार्ट क्लासरूम, शिक्षक प्रशिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा और समावेशी शिक्षा जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है.
समग्र शिक्षा के तहत डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट क्लासरूम और ICT इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के साथ स्कूलों में पुस्तकालय, परिवहन और स्वच्छता जैसी सुविधाओं को भी मजबूत करने का प्रावधान है.
बेटियों और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए लक्षित योजनाएं
शिक्षा व्यवस्था में सामाजिक और लैंगिक समावेशन पर भी सरकार की योजनाओं में जोर रहा है. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के साथ तकनीकी शिक्षा में छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए PRAGATI और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए SAKSHAM जैसी छात्रवृत्ति योजनाएं लागू की गईं.
इसका उद्देश्य उच्च और तकनीकी शिक्षा में उन वर्गों की भागीदारी बढ़ाना है जिनके लिए आर्थिक या सामाजिक कारणों से शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
APAAR ID: विद्यार्थी की डिजिटल अकादमिक पहचान
शिक्षा के डिजिटलीकरण में APAAR ID एक महत्वपूर्ण पहल है. APAAR यानी Automated Permanent Academic Account Registry को 'One Nation, One Student ID' के उद्देश्य से विकसित किया गया है.
इस व्यवस्था में विद्यार्थी को एक स्थायी 12 अंकों की अकादमिक पहचान मिलती है, जिसमें उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड, क्रेडिट, डिग्री, डिप्लोमा और अन्य उपलब्धियों को डिजिटल रूप से जोड़ा जा सकता है. APAAR को Academic Bank of Credits और DigiLocker से भी जोड़ा गया है.
इसका मकसद यह है कि विद्यार्थी के शैक्षणिक रिकॉर्ड अलग-अलग कागजी दस्तावेजों में बिखरे रहने के बजाय डिजिटल रूप से उपलब्ध रहें और जरूरत पड़ने पर संस्थानों के बीच क्रेडिट ट्रांसफर आसान हो.
नए IIT और IIM: उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार
उच्च शिक्षा के विस्तार का एक पहलू नए उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना भी रहा. IIT सिस्टम के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार IIT पालक्काड और IIT तिरुपति 2015 में शुरू हुए, जबकि 2016 में IIT भिलाई, IIT गोवा, IIT जम्मू और IIT धारवाड़ समेत नए IIT अस्तित्व में आए.
IIM के क्षेत्र में भी नए संस्थानों का विस्तार हुआ. नोट्स में शामिल IIM गुवाहाटी को 2025 के IIM संशोधन कानून के जरिए IIM अधिनियम की अनुसूची में शामिल किया गया.
शिक्षा में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल
मोदी सरकार के शिक्षा विजन में तकनीक का इस्तेमाल लगातार महत्वपूर्ण रहा है. DigiLocker, APAAR, Academic Bank of Credits, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम जैसी पहलों ने शिक्षा के प्रशासन और विद्यार्थियों के अकादमिक रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में काम किया है.
समग्र शिक्षा के तहत भी डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल कंटेंट और ICT आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है.
मोदी @76: शिक्षा में नीति से लेकर तकनीक तक का सफर
नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के मौके पर उनके शासनकाल के शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कामों को देखें तो तस्वीर कई स्तरों पर बनती है. एक तरफ विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार की दिशा में काम हुआ, दूसरी तरफ NEP 2020 के जरिए शिक्षा के ढांचे में बदलाव का प्रयास किया गया. इसके साथ Skill India ने कौशल और रोजगार की कड़ी को मजबूत करने पर जोर दिया, जबकि APAAR जैसी पहल ने विद्यार्थी के अकादमिक रिकॉर्ड को डिजिटल पहचान से जोड़ने की दिशा खोली.
इस पूरी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिक्षा को अब केवल स्कूल-कॉलेज की चारदीवारी में होने वाली गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि *कौशल, तकनीक, रोजगार, डिजिटल रिकॉर्ड, भारतीय ज्ञान और आजीवन सीखने* से जुड़े व्यापक इकोसिस्टम के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है. यही पिछले एक दशक से अधिक समय में शिक्षा नीति के स्तर पर सामने आए प्रमुख बदलावों का एक अहम हिस्सा है.
अतिथि लेखक: प्रो. किरण हजारिका
(प्रो. किरण हजारिका वर्तममान में केंद्रीय पंजाब विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर हैं. वह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के पूर्व प्रो-वाइस चांसलर और पूर्व UGC सदस्य भी रह चुके हैं.)
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