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जन्मदिन विशेष: गुजरात से राष्ट्रीय मंच तक मोदी की 25 साल की यात्रा पर एक नजर
7 अक्टूबर 2001 को मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने और इस अक्टूबर में वह सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे करेंगे, पहले गुजरात में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर, यह एक ऐसी उपलब्धि है, जिसे समकालीन भारत में बहुत कम राजनेता हासिल कर सकते हैं.
डॉ. अनुराग बत्रा 4 hours ago
17 सितंबर, नरेंद्र मोदी का जन्मदिन, एक ऐसी राजनीतिक यात्रा पर नजर डालने का उपयुक्त अवसर है, जो जितनी असामान्य रही है, उतनी ही महत्वपूर्ण भी रही है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में एक जमीनी कार्यकर्ता के शुरुआती वर्षों से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री और अंततः भारत के प्रधानमंत्री बनने तक, मोदी ने सार्वजनिक जीवन में एक लंबा सफर तय किया है.
इस यात्रा को खास तौर पर उल्लेखनीय बनाने वाली बात यह है कि इसकी शुरुआत कहां से हुई. मोदी किसी स्थापित राजनीतिक परिवार के जरिए राजनीति में नहीं आए और न ही उन्हें सत्ता का कोई पद विरासत में मिला. उनके शुरुआती वर्ष संगठन के अनुशासन को सीखने और जमीनी स्तर पर काम करने में बीते. उन्होंने धीरे-धीरे RSS और बाद में भारतीय जनता पार्टी के भीतर अधिक जिम्मेदारियां संभालीं और संगठनात्मक सीढ़ी पर आगे बढ़ते गए, जिसके बाद 2001 में उन्हें गुजरात का नेतृत्व करने का अवसर मिला.
7 अक्टूबर 2001 को मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने. इस अक्टूबर में वह सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे करेंगे, पहले गुजरात में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर. यह एक ऐसी उपलब्धि है, जिसे समकालीन भारत में बहुत कम राजनेता हासिल कर सकते हैं.
गुजरात रहा निर्णायक अध्याय
गुजरात के वर्षों ने मोदी की उस राजनीतिक शैली को काफी हद तक स्थापित किया, जिसे बाद में उनके साथ जोड़ा गया. उनके कार्यकाल के दौरान बुनियादी ढांचे, निवेश, औद्योगिक विकास और प्रशासनिक डिलीवरी पर काफी जोर दिया गया.
इसके बाद "गुजरात मॉडल" उनके राजनीतिक आख्यान का एक प्रमुख हिस्सा बन गया. इसे एक ऐसे दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश को बढ़ावा देने को साथ लेकर चलना था. गुजरात के अनुभव ने राष्ट्रीय स्तर पर मोदी को विकास-केंद्रित एजेंडे वाले नेता के रूप में स्थापित करने में भी मदद की.
इसलिए 2014 में गांधीनगर से नई दिल्ली का उनका बदलाव दिशा में पूरी तरह बदलाव का प्रतिनिधित्व नहीं करता था. गुजरात के वर्षों को परिभाषित करने वाले कई विषय उनके साथ राष्ट्रीय मंच पर भी आए.
विकास लगातार बना रहा प्रमुख विषय
प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी ने लगातार विकास और भारत के आर्थिक परिवर्तन को अपने राजनीतिक संदेश के केंद्र में रखा है. भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की महत्वाकांक्षा उनके मौजूदा कार्यकाल के प्रमुख विषयों में से एक बन गई है.
उनके दृष्टिकोण में एक निरंतरता भी दिखाई देती है: बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य तय करना, उन्हें सीधे नागरिकों तक पहुंचाना और क्रियान्वयन तथा डिलीवरी पर काफी जोर देना.
कोई व्यक्ति उनकी राजनीति के हर पहलू से सहमत हो या नहीं, इस बात से इनकार करना मुश्किल है कि मोदी ने भारत में राजनीतिक संवाद के पैमाने और शैली को बदला है. तकनीक, सोशल मीडिया और नागरिकों से सीधे संवाद के उनके इस्तेमाल ने संचार को उनके राजनीतिक नेतृत्व का अभिन्न हिस्सा बना दिया है.
गुजरात से दुनिया तक
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोदी का उभरना रहा है.
हाल ही में नई दिल्ली में संपन्न BRICS शिखर सम्मेलन इसका एक और उदाहरण रहा. मेजबान के तौर पर भारत ने ग्लोबल साउथ के साथ भारत के जुड़ाव को मजबूत करने और वैश्विक शासन तथा बहुपक्षीय संस्थानों से जुड़ी चर्चाओं में देश को बड़ी आवाज देने पर काफी जोर दिया. दुनिया भर के नेताओं के साथ मोदी की बातचीत ने यह भी दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति उनके राजनीतिक नेतृत्व का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है.
जिस व्यक्ति के राजनीतिक करियर की शुरुआत जमीनी स्तर पर संगठनात्मक कार्य से हुई थी, उसका प्रमुख देशों के राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के साथ एक मेज पर बैठकर बातचीत करने तक का सफर उल्लेखनीय है.
मोदी की संवाद शैली
मोदी ने बदलते संचार परिवेश की एक असामान्य समझ भी दिखाई है. उन्होंने यह पहचाना है कि आज राजनीतिक नेतृत्व केवल संसद, प्रेस कॉन्फ्रेंस या पारंपरिक मीडिया तक सीमित नहीं है.
'मन की बात' से लेकर सोशल मीडिया, सार्वजनिक कार्यक्रमों और अत्यधिक व्यवस्थित अंतरराष्ट्रीय आयोजनों तक, उन्होंने कई ऐसे माध्यम बनाए हैं, जिनके जरिए वह आबादी के विभिन्न वर्गों के साथ सीधे संवाद करते हैं.
यह संवाद क्षमता उनकी राजनीतिक अपील का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही है और इसने उन्हें मतदाताओं के बड़े वर्गों के साथ सीधा संबंध बनाने में मदद की है.
बड़ी तस्वीर
मोदी के जन्मदिन के अवसर पर शायद अधिक दिलचस्प कहानी स्वयं जन्मदिन नहीं, बल्कि संगठनात्मक कार्य के शुरुआती दिनों से अब तक तय की गई असाधारण दूरी है.
अक्टूबर में, जब वह सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे करेंगे, तो यह लगातार 25 वर्षों के कार्यकारी नेतृत्व का प्रतीक होगा, पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और फिर भारत के प्रधानमंत्री के रूप में.
बहुत कम राजनीतिक करियर ने ऐसी यात्रा तय की है.
शाखा से गुजरात तक, गुजरात से नई दिल्ली तक और नई दिल्ली से वैश्विक मंच तक, नरेंद्र मोदी की यात्रा समकालीन भारत की महत्वपूर्ण राजनीतिक कहानियों में से एक है.
और शायद इस यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण धागा उनका यह घोषित विश्वास रहा है कि भारत को लगातार आगे बढ़ना, प्रतिस्पर्धा करना और दुनिया में बड़ी जगह तलाशना चाहिए.
उनके जन्मदिन पर, स्वयं जन्मदिन के बजाय, यह यात्रा विचार करने योग्य है.
डॉ. अनुराग बत्रा, BW रिपोर्टर्स
(डॉ. अनुराग बत्रा BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ तथा exchange4media Group के संस्थापक हैं. पहली पीढ़ी के उद्यमी और मीडिया लीडर होने के साथ-साथ वह एंजल निवेशक, लेखक, टेलीविजन होस्ट और उद्यमियों तथा मीडिया पेशेवरों के मेंटर भी हैं. वह कई कॉरपोरेट और संस्थागत बोर्ड में सेवाएं देते हैं और प्रबंधन शिक्षा के साथ उनका लंबे समय से जुड़ाव रहा है. MDI गुड़गांव के पूर्व छात्र, वह इसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में सेवाएं दे चुके हैं और MDI Alumni Association के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. वह International Academy of Television Arts & Sciences के सदस्य भी हैं. एक उत्साही पाठक, डॉ. बत्रा का मानना है कि जब जुनून किसी का पेशा बन जाता है, तो काम उद्देश्य की गहरी भावना हासिल कर लेता है.)
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