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मोदी @76: शिक्षा और कौशल से विकसित भारत की ओर
डॉ. विनोद बछेती लिखते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और कौशल विकास पर बढ़ा फोकस
डॉ. विनोद बछेती 1 hour ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का आज जन्मदिन है. मेरे लिए यह दिन केवल देश के प्रधानमंत्री के जन्मदिन का अवसर नहीं है, बल्कि पिछले एक दशक से अधिक समय में देश में हुए बदलावों को देखने और यह समझने का अवसर भी है कि इन बदलावों का आने वाली पीढ़ियों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.
करीब 30 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े होने के नाते मैंने संगठन और सरकार के स्तर पर कई बदलावों को करीब से देखा है. इन बदलावों में शिक्षा का क्षेत्र मेरे लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मेरा मानना है कि किसी भी देश के भविष्य की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था और युवा शक्ति से तैयार होती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में 2014 के बाद शिक्षा को लेकर जिस तरह नई नीतियों, तकनीक, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया गया, उसे मैं भारत के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण मानता हूं.
नई शिक्षा नीति से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की कोशिश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के रूप में सामने आया. इस नीति में शिक्षा को केवल रटने और परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय समग्र विकास, रचनात्मकता, कौशल और व्यावहारिक सीखने पर जोर दिया गया.
मेरे विचार में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के दौर में बच्चों को केवल जानकारी देने से काम नहीं चलेगा. उन्हें यह भी सिखाना होगा कि उस जानकारी का इस्तेमाल कैसे किया जाए, समस्याओं का समाधान कैसे किया जाए और बदलती दुनिया के साथ खुद को कैसे तैयार किया जाए.
NEP 2020 के तहत शिक्षा में लचीलापन, कौशल आधारित सीखने और अलग-अलग विषयों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है.
पीएम श्री स्कूलों से आधुनिक शिक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में PM SHRI यानी Prime Minister's Schools for Rising India योजना शुरू की गई. इसका उद्देश्य 14,500 से अधिक स्कूलों को ऐसे मॉडल स्कूलों के रूप में विकसित करना है, जहां आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ बेहतर और समग्र सीखने का वातावरण तैयार किया जा सके.
मेरे लिए PM SHRI योजना की अहमियत इस बात में है कि स्कूल शिक्षा में केवल भवन और सुविधाओं की बात नहीं की गई, बल्कि तकनीक, सीखने के नए तरीकों और विद्यार्थियों के समग्र विकास को भी महत्व दिया गया है.
स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल संसाधन, कंप्यूटर लैब और बेहतर शैक्षणिक वातावरण आज की शिक्षा व्यवस्था की जरूरत हैं. सरकारी स्कूलों में इन सुविधाओं का विस्तार उन विद्यार्थियों के लिए भी अवसर बढ़ा सकता है, जिनके पास निजी संस्थानों की सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं.
डिजिटल शिक्षा को मिला नया विस्तार
पिछले वर्षों में शिक्षा और तकनीक का संबंध और मजबूत हुआ है. PM e-VIDYA जैसे कार्यक्रमों के जरिए ऑनलाइन, डिजिटल और ऑन-एयर माध्यमों से शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया. आधिकारिक जानकारी के अनुसार PM e-VIDYA का उद्देश्य डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े विभिन्न प्रयासों को एक साथ लाकर बहु-माध्यमीय शिक्षा की पहुंच बढ़ाना है.
मेरा मानना है कि डिजिटल शिक्षा का सबसे बड़ा लाभ यह हो सकता है कि विद्यार्थी अपने स्थान की सीमाओं से आगे बढ़कर ज्ञान के नए स्रोतों तक पहुंच बना सकें. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों के विद्यार्थियों के लिए तकनीक शिक्षा के नए अवसर खोल सकती है. हालांकि इसके साथ डिजिटल पहुंच और गुणवत्ता की चुनौती पर भी लगातार काम करना जरूरी है.
समग्र शिक्षा से स्कूल शिक्षा को एक साथ देखने की कोशिश
समग्र शिक्षा योजना के जरिए प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा को एक व्यापक ढांचे में देखने का प्रयास किया गया है. सरकार के अनुसार यह योजना NEP 2020 के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण और सीखने के परिणामों को मजबूत करने पर केंद्रित है.
मेरे विचार में शिक्षा व्यवस्था को अलग-अलग हिस्सों में देखने के बजाय बच्चे की पूरी शैक्षणिक यात्रा को एक साथ देखना जरूरी है. शुरुआती कक्षाओं में मजबूत आधार से लेकर उच्च कक्षाओं में कौशल और करियर की तैयारी तक हर स्तर महत्वपूर्ण है.
स्किल इंडिया से युवाओं के कौशल पर फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में स्किल इंडिया मिशन के जरिए युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार PMKVY के तहत अक्टूबर 2025 तक 1.64 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षण और प्रमाणन दिया गया था. इसी अवधि तक नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम के तहत 49 लाख से अधिक अप्रेंटिस जुड़े थे.
मैं मानता हूं कि यह बदलाव बहुत जरूरी है. आज केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है. उद्योग की जरूरतें बदल रही हैं और नई तकनीक के साथ रोजगार के नए क्षेत्र सामने आ रहे हैं. ऐसे में युवाओं को अपने कौशल को लगातार अपडेट करने की जरूरत है.
वोकेशनल शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी
मेरे लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण पहल यह है कि वोकेशनल और कौशल आधारित शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया गया है.
हमारे यहां लंबे समय तक शिक्षा को मुख्य रूप से डिग्री हासिल करने के नजरिए से देखा जाता रहा. लेकिन हर विद्यार्थी की रुचि और क्षमता अलग होती है. किसी की रुचि अकादमिक क्षेत्र में हो सकती है, तो कोई तकनीकी या व्यावहारिक क्षेत्र में बेहतर कर सकता है.
इसलिए शिक्षा व्यवस्था में अलग-अलग विकल्प उपलब्ध होना जरूरी है. युवाओं को तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप जैसे अवसरों से जोड़ना रोजगार के लिए उनकी तैयारी को मजबूत कर सकता है.
शिक्षा से रोजगार तक की कड़ी मजबूत करने की जरूरत
मैं शिक्षा और रोजगार को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखता. शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान और दृष्टि देती है, जबकि कौशल उसे उस ज्ञान को व्यवहार में इस्तेमाल करने की क्षमता देता है.
आज जरूरत इस बात की है कि स्कूल और कॉलेज से निकलने वाला युवा केवल प्रमाणपत्र लेकर न निकले, बल्कि उसके पास ऐसी क्षमता भी हो, जिससे वह रोजगार के बदलते अवसरों के अनुसार खुद को तैयार कर सके.
स्किल इंडिया और डिजिटल स्किलिंग जैसे प्रयास इसी दिशा में महत्वपूर्ण हो सकते हैं. Skill India Digital Hub जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग क्षेत्रों में अपस्किलिंग और री-स्किलिंग के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
विकसित भारत की नींव शिक्षा से
मेरे विचार में विकसित भारत की नींव केवल बड़े उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर से नहीं रखी जाएगी. इसकी असली नींव हमारे स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कौशल प्रशिक्षण संस्थानों में तैयार होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में शिक्षा को नई शिक्षा नीति, PM SHRI, समग्र शिक्षा, डिजिटल शिक्षा और स्किल इंडिया जैसे अलग-अलग माध्यमों से व्यापक बनाने का प्रयास हुआ है. इन पहलों का लक्ष्य शिक्षा को बदलती अर्थव्यवस्था और नई तकनीक की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है.
आगे की राह भी उतनी ही महत्वपूर्ण
मैं मानता हूं कि शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डिजिटल तकनीक और नई अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. इसलिए युवाओं को इन क्षेत्रों के लिए तैयार करना जरूरी होगा. हमें शिक्षा को कौशल से, कौशल को रोजगार से और रोजगार को उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ना होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि भारत की युवा शक्ति को ऐसा अवसर मिले, जहां वह अपनी क्षमता को पहचान सके और उसे देश के विकास में इस्तेमाल कर सके.
मेरा मानना है कि यदि हमारे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवाओं को समय के अनुरूप कौशल मिलता है, तो यही मानव संसाधन भारत की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है. विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा और युवा शक्ति को मजबूत करना इसलिए सबसे महत्वपूर्ण निवेशों में से एक है.
अतिथि लेखक: डॉ. विनोद बछेती
(डॉ. विनोद बछेती वर्तमान में दिल्ली प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष हैं. वह दिल्ली पैरामेडिकल व मैनेजमेंट संस्थान, (DPMI) के चेयरमैन भी हैं. प्रदेश में उपाध्यक्ष बनने से पहले
वह भजपा के मंत्री और मयूर विहा जिलाध्य़क्ष भी रह चुके हैं. वह करीब 30 साल से भाजपा से जुड़े हुए हैं.)
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