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PM मोदी @76: ड्रोन विजन से इनोवेशन से इम्पैक्ट की ओर बढ़ता भारत
कृषि, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर सर्वे और आपदा प्रबंधन तक बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल, नीति सुधार, मैन्युफैक्चरिंग, स्किलिंग और उद्यमिता से सेक्टर को मिल रही रफ्तार
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर भारत की विकास यात्रा के उन क्षेत्रों पर नजर डालना महत्वपूर्ण है, जहां तकनीक और उद्यमिता मिलकर नए अवसर पैदा कर रहे हैं. ड्रोन सेक्टर इसका एक प्रमुख उदाहरण है. पिछले एक दशक में भारत में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल केवल उभरती टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, भूमि सर्वेक्षण, रक्षा, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाओं तक इसका दायरा बढ़ा है.
भारत की आर्थिक प्रगति अब केवल अर्थव्यवस्था के आकार से नहीं, बल्कि इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में घरेलू कंपनियों और उद्यमियों की बढ़ती भूमिका से भी जुड़ी है. स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक, स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी आधारित विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों ने ऐसी कंपनियों के लिए अवसर तैयार किए हैं, जो देश की बड़ी चुनौतियों के समाधान विकसित करने के साथ वैश्विक बाजारों में भी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं.
कृषि से लेकर रक्षा तक ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल
ड्रोन तकनीक ने भारत में कृषि क्षेत्र में विशेष रूप से अपनी उपयोगिता साबित की है. फसलों पर निगरानी, कीटनाशकों और उर्वरकों के छिड़काव तथा कृषि सर्वेक्षण जैसे कामों में ड्रोन के इस्तेमाल से खेती में तकनीक का दायरा बढ़ा है.
सरकार की ‘नमो ड्रोन दीदी’ पहल के जरिए भी ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक को पहुंचाने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए नए आजीविका अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया है. वहीं, ‘स्वामित्व’ (SVAMITVA) जैसी योजनाओं में ड्रोन के जरिए बड़े पैमाने पर भूमि और संपत्ति का सर्वेक्षण किया गया है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड तैयार करने और संपत्ति के अधिकारों को दर्ज करने में तकनीक के इस्तेमाल का उदाहरण सामने आया है.
‘किसान ड्रोन यात्रा’ से बढ़ा भरोसा
ड्रोन क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए सरकार की नीतियों और विभिन्न कार्यक्रमों ने बाजार तैयार करने में भूमिका निभाई है. गरुड़ एयरोस्पेस के संस्थापक और सीईओ अग्निश्वर जयप्रकाश के मुताबिक, कंपनी की सरकार के ड्रोन विजन के साथ यात्रा ‘किसान ड्रोन यात्रा’ से शुरू हुई, जब प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर में 100 किसान ड्रोन की तैनाती की शुरुआत की थी.
इसके बाद कंपनी ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ कार्यक्रम में भी भागीदारी की. कंपनी के अनुसार, उसके द्वारा निर्मित किसान ड्रोन महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोन में शामिल रहे हैं.
ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ाने के साथ-साथ इस क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है. ड्रोन दीदियों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ट्रेन-द-ट्रेनर जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्किलिंग और क्षमता निर्माण की पहल की जा रही है.
तकनीक से आगे रोजगार और उद्यमिता का अवसर
ड्रोन सेक्टर का विस्तार केवल नई तकनीक के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है. इसके साथ मैन्युफैक्चरिंग, ऑपरेशन, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और ड्रोन आधारित सेवाओं में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी बन रहे हैं.
कृषि के अलावा रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, आपदा प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में ड्रोन के संभावित इस्तेमाल का दायरा बढ़ रहा है. ऐसे में आने वाले वर्षों में ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े कारोबार और सेवाओं के लिए नए बाजार विकसित होने की संभावना है.
‘Made in India’ से वैश्विक तकनीक तक
भारत के ड्रोन उद्योग के सामने अगला लक्ष्य केवल देश में ड्रोन का निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है जिसे वैश्विक बाजारों में भी इस्तेमाल किया जा सके. इसे ‘Made in India’ से आगे बढ़कर ‘Designed, Developed and Deployed from India for the World’ की दिशा में कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
भारत के 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के संदर्भ में टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों की भूमिका अहम हो सकती है. ड्रोन सेक्टर का अनुभव दिखाता है कि नीतिगत समर्थन, उद्यमिता और तकनीकी विकास साथ मिलकर किस तरह किसी उभरते क्षेत्र को व्यापक आर्थिक और सामाजिक इस्तेमाल की दिशा में ले जा सकते हैं.
डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं और जरूरी नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों.
अतिथि लेखक: अग्निश्वर जयप्रकाश, फाउंडर और सीईओ, गरुड़ एयरोस्पेस
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