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महंगाई काबू में नहीं आई तो 6.5% तक बढ़ सकती है RBI की रेपो रेट: रिपोर्ट
Systematix Institutional Equities का अनुमान है कि अक्टूबर-नवंबर तक खुदरा महंगाई 6% के पार जा सकती है. खाद्य कीमतों, कच्चे तेल और थोक महंगाई में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
महंगाई का दबाव लंबे समय तक बना रहा तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रेपो रेट मौजूदा 5.25% से बढ़कर करीब 6.5% तक जा सकती है. Systematix Institutional Equities की एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर-नवंबर तक खुदरा महंगाई 6% के पार जा सकती है, जिससे RBI के 4% के महंगाई लक्ष्य के मुकाबले दबाव बढ़ेगा.
Systematix ने ऊंची थोक महंगाई, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और खाद्य आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारणों में गिनाया है. ब्रोकरेज का कहना है कि इन कारणों से महंगाई पहले के अनुमान से ज्यादा समय तक RBI के लक्ष्य से ऊपर रह सकती है.
अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़ी
भारत में खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45% थी. यह लगातार तीसरा महीना है जब CPI महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही है. इस दौरान कोर महंगाई भी बढ़कर 4.2% हो गई, जो जुलाई में 3.86% थी. इससे संकेत मिलता है कि कीमतों का दबाव सिर्फ खाद्य और ईंधन जैसे अस्थिर घटकों तक सीमित नहीं है. अगस्त में खाद्य महंगाई बढ़कर 5.95% हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.23% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.31% थी.
थोक महंगाई में भी तेजी
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% हो गई, जो जुलाई में 9.78% थी. ईंधन और बिजली की कीमतों में सालाना आधार पर 22.93% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई बढ़कर 8.37% हो गई. Systematix के मुताबिक, खाद्य आपूर्ति से जुड़े जोखिम और वैश्विक कमोडिटी कीमतों में तेजी आने वाले महीनों में महंगाई को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती है.
6.5% रेपो रेट का अनुमान क्यों?
Systematix का अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए RBI को करीब 1% की वास्तविक ब्याज दर बनाए रखने की जरूरत पड़ सकती है. इसी आधार पर ब्रोकरेज ने महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहने की स्थिति में रेपो रेट के करीब 6.5% तक पहुंचने का अनुमान लगाया है. हालांकि, 6.5% का स्तर Systematix का आकलन है. यह RBI की ओर से रेपो रेट बढ़ाने की कोई घोषित योजना नहीं है. केंद्रीय बैंक का फैसला महंगाई, आर्थिक वृद्धि, लिक्विडिटी और अन्य व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
सरकारी बॉन्ड यील्ड पर भी असर
ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगर रेपो रेट बढ़कर 6.5% तक पहुंचती है तो सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर भी ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है. Systematix ने 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड के 7.45-7.50% तक जाने का अनुमान जताया है.
कच्चा तेल और रुपये का दबाव बढ़ा सकता है महंगाई
वैश्विक कमोडिटी बाजार की स्थिति भी महंगाई के लिए जोखिम बनी हुई है. Brent क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है. वहीं, रुपये पर दबाव और आयातित ऊर्जा की बढ़ती लागत घरेलू महंगाई को और प्रभावित कर सकती है. RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5.1% रखा है. केंद्रीय बैंक ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की अवधि को लेकर अनिश्चितता का भी उल्लेख किया है.
Systematix ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है और घरेलू वेतन एवं आय की वृद्धि कमजोर रहती है तो अर्थव्यवस्था में स्टैगफ्लेशन का दबाव बन सकता है. ऐसे में RBI के लिए महंगाई पर काबू पाने और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. आने वाले समय में RBI की मौद्रिक नीति का रुख इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगा कि हाल में बढ़ी खुदरा और थोक महंगाई अस्थायी है या लंबे समय तक बनी रहने वाली प्रवृत्ति में बदलती है.
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