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60 साल से पहले रिटायरमेंट की चाह बढ़ी, लेकिन लक्ष्य का सिर्फ 28% रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार: रिपोर्ट

एक्सिस मैक्स लाइफ की IRIS 6.0 स्टडी के मुताबिक, शहरी भारतीयों ने अपने लक्ष्य रिटायरमेंट कॉर्पस का औसतन सिर्फ 28% जमा किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारत में रिटायरमेंट को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है. बड़ी संख्या में शहरी भारतीय पारंपरिक रिटायरमेंट उम्र का इंतजार नहीं करना चाहते, लेकिन रिटायरमेंट के लिए वित्तीय तैयारी उनकी इस इच्छा के मुकाबले काफी पीछे है. एक्सिस मैक्स लाइफ (Axis Max Life) और कंतार (Kantar) की 'भरोसा टॉक्स इंडिया रिटायरमेंट इंडेक्स स्टडी 6.0’ (Bharosa Talks IRIS 6.0) के मुताबिक, आर्थिक रूप से सक्षम होने पर 10 में से 7 शहरी भारतीय 58-60 साल की उम्र से पहले रिटायर होना चाहते हैं. इनमें से करीब आधे लोग 50 साल की उम्र से पहले फाइनेंशियल इंडिपेन्डेंस एंड रिटायर अर्ली (FIRE) का लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं.

हालांकि, सर्वे में शामिल लोगों ने अपने लक्ष्य रिटायरमेंट फंड का औसतन सिर्फ 28% ही जमा किया है. यही नहीं, सिर्फ 11% लोगों को भरोसा है कि उनकी रिटायरमेंट बचत पूरी जिंदगी चलेगी, जबकि 39% को आशंका है कि उनका फंड रिटायरमेंट के बाद पांच साल भी नहीं चल पाएगा.

Gen X+ को काम जारी रखने की चिंता

रिटायरमेंट के करीब पहुंच रही पीढ़ी के बीच वित्तीय चिंता ज्यादा स्पष्ट दिखाई देती है. 45 साल से अधिक उम्र वाले Gen X+ वर्ग के 82% लोगों को लगता है कि नियमित आय की जरूरत के कारण उन्हें शायद कभी काम या बिजनेस से पूरी तरह रिटायर होने का मौका नहीं मिलेगा. इस वर्ग में 91% लोगों को इस बात का अफसोस है कि उन्होंने रिटायरमेंट के लिए निवेश पहले शुरू नहीं किया. Gen X+ ने अपने लक्ष्य रिटायरमेंट कॉर्पस का औसतन 29% जमा किया है.

पहली सैलरी से शुरू करना चाहते हैं रिटायरमेंट प्लानिंग

रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर युवा पीढ़ी में जल्दी शुरुआत करने की सोच मजबूत हो रही है. सर्वे के मुताबिक, हर दो में से एक शहरी भारतीय का मानना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग पहली सैलरी मिलने के साथ ही शुरू कर देनी चाहिए. लोगों के मुताबिक रिटायरमेंट सेविंग्स के बारे में सोचना औसतन 31 साल की उम्र में शुरू होना चाहिए. Gen Z के लिए यह उम्र 29 साल, Millennials के लिए 31 साल और Gen X+ के लिए 34 साल है. वहीं, Gen Z के 62% लोगों ने रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू कर दिया है. Millennials में यह आंकड़ा 70% और Gen X+ में 75% है.

1 करोड़ रुपये के रिटायरमेंट फंड पर भरोसा घटा

रिटायरमेंट के लिए कितने फंड की जरूरत होगी, इसे लेकर भी लोगों की धारणा बदली है. 1 करोड़ रुपये या उससे कम की रकम को आरामदायक रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त मानने वालों का अनुपात 2025 के 77% से घटकर 2026 में 70% हो गया. 15 लाख रुपये से ज्यादा सालाना घरेलू आय वाले लोगों में सिर्फ 51% लोगों ने 1 करोड़ रुपये या उससे कम के रिटायरमेंट कॉर्पस को पर्याप्त माना. मेट्रो शहरों में यह आंकड़ा 63% रहा.

रिटायरमेंट की तैयारी में थोड़ा सुधार

स्टडी के अनुसार, 2026 में ‘Bharosa Talks IRIS 6.0’ का कुल स्कोर 49 रहा, जबकि 2025 में यह 48 और 2022 में 44 था. वित्तीय तैयारी का स्कोर 51 से बढ़कर 52 हुआ. वहीं, हेल्थ प्रिपेयर्डनेस का स्कोर 46 पर स्थिर रहा और इमोशनल प्रिपेयर्डनेस का स्कोर 58 से घटकर 57 हो गया.

टियर-2 शहरों में तैयारी बढ़ी

रिटायरमेंट की तैयारी में टियर-2 शहरों का प्रदर्शन सुधरा है. इन शहरों का IRIS स्कोर 2025 के 44 से बढ़कर 2026 में 48 हो गया. मेट्रो शहरों का स्कोर 50 पर स्थिर रहा, जबकि टियर-1 शहरों का स्कोर 48 रहा.

क्षेत्रों के आधार पर पूर्वी भारत का स्कोर 52 रहा. पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र 49-49 के स्कोर के साथ रहे, जबकि उत्तरी क्षेत्र का स्कोर 47 रहा. दक्षिणी क्षेत्र में हेल्थ प्रिपेयर्डनेस का स्कोर 43 से बढ़कर 47 हो गया.

रिटायरमेंट के लिए सेहत भी अहम

रिटायरमेंट प्लानिंग में वित्तीय तैयारी के साथ स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता सामने आई है. सर्वे में 75% लोगों ने उम्मीद जताई कि वे रिटायरमेंट के बाद स्वस्थ और फिट रहेंगे. 52% लोगों ने हेल्थ इंश्योरेंस होने की बात कही. नियमित शारीरिक गतिविधियों में शामिल लोगों में 44% रोजाना ऐसी गतिविधियां करते हैं, जबकि 21% लोग अपनी सेहत पर नजर रखने के लिए वियरेबल डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं.

परिवार भी रिटायरमेंट के बाद की योजना का अहम हिस्सा बना हुआ है. 87% लोगों को उम्मीद है कि वे रिटायरमेंट के बाद अपने बच्चों के साथ रहेंगे. हालांकि, परिवार और समाज से भविष्य में मिलने वाले सहयोग को लेकर भरोसा 87% से घटकर 84% हो गया.

महिलाओं और पुरुषों का स्कोर बराबर

महिलाओं का IRIS 6.0 स्कोर 49 रहा, जो पुरुषों के बराबर है. सर्वे में 62% महिलाओं ने कहा कि उन्हें पता है कि रिटायरमेंट के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी. 52% महिलाओं के पास हेल्थ इंश्योरेंस है, जबकि 41% महिलाएं नियमित शारीरिक गतिविधियों में शामिल रहती हैं. वहीं, 30% महिलाओं का मानना है कि उनका रिटायरमेंट फंड 10 साल से ज्यादा समय तक चल सकता है.

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के MD एवं CEO सुमित मदान ने कहा कि स्टडी से पता चलता है कि कई भारतीयों के लिए रिटायरमेंट अब भी वित्तीय चुनौती बना हुआ है. उन्होंने कहा कि Gen X+ के 82% लोगों को नियमित आय के लिए काम जारी रखने की आशंका है, जबकि युवा भारतीय रिटायरमेंट की तैयारी पहले शुरू कर रहे हैं. कंतार की साउथ एशिया की मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ क्लाइंट ऑफिसर सौम्या मोहंती के मुताबिक, अलग-अलग पीढ़ियों और क्षेत्रों में रिटायरमेंट प्लानिंग का तरीका बदल रहा है. उन्होंने कहा कि युवा भारतीय जल्दी प्लानिंग शुरू कर रहे हैं और टियर-2 शहरों में भी रिटायरमेंट की तैयारी में सुधार हुआ है.
 


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