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रिलायंस जुटाएगी 12,500 करोड़ रुपये, 5 साल के बॉन्ड इश्यू पर 7.47% तक ब्याज की उम्मीद

रिलायंस इंडस्ट्रीज के इस बॉन्ड इश्यू का बेस साइज 10,000 करोड़ रुपये है. इसके अलावा कंपनी के पास 2,500 करोड़ रुपये का ग्रीनशू ऑप्शन भी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) घरेलू बॉन्ड बाजार से 12,500 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है. कंपनी ने 5 साल की अवधि वाले बॉन्ड इश्यू के जरिए फंड जुटाने की योजना बनाई है. इस इश्यू में देश के कई बड़े बैंक निवेश कर रहे हैं, जबकि 2023 के बाद घरेलू बॉन्ड बाजार में रिलायंस का यह पहला बड़ा इश्यू बताया जा रहा है.

18 सितंबर को बंद होगा बॉन्ड इश्यू

रिलायंस इंडस्ट्रीज के इस बॉन्ड इश्यू का बेस साइज 10,000 करोड़ रुपये है. इसके अलावा कंपनी के पास 2,500 करोड़ रुपये का ग्रीनशू ऑप्शन भी है. यानी निवेशकों की मांग अधिक रहने पर कंपनी अतिरिक्त 2,500 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 3,000 करोड़ रुपये की राशि एंकर निवेशकों के लिए पहले ही तय की जा चुकी है. इस बॉन्ड पर करीब 7.47 फीसदी ब्याज मिलने की उम्मीद है. इश्यू 18 सितंबर को बंद होगा.

एक्सिस समेत 4 बैंकों की भागीदारी

रिलायंस के इस बॉन्ड इश्यू में कई प्रमुख बैंक हिस्सा ले रहे हैं. इनमें एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और यस बैंक शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील में सबसे बड़ा हिस्सा एक्सिस बैंक का रहने की उम्मीद है. इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और यस बैंक का स्थान है. हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज या संबंधित बैंकों की ओर से इस संबंध में अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है.

2023 के बॉन्ड इश्यू से इस बार क्या अलग?

रिलायंस ने 2023 में भी रिटेल बॉन्ड जारी किए थे. उस समय बॉन्ड की अवधि 10 साल थी और LIC ने इसमें महत्वपूर्ण भागीदारी की थी. इस बार बॉन्ड की अवधि पांच साल है. रिपोर्ट के अनुसार, LIC की ओर से इस इश्यू में पहले जैसी भागीदारी देखने को नहीं मिल रही है. वहीं, बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त फंड भी इस डील के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बैंकों के पास बढ़ी विदेशी मुद्रा जमा

भारतीय बैंकों के पास उपलब्ध फंड में बढ़ोतरी के पीछे विदेशी मुद्रा जमा भी एक वजह है. रिजर्व बैंक की FCNR-B जमा से जुड़ी विशेष सुविधा के तहत बैंकों ने बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जुटाई है. 31 अगस्त तक भारतीय बैंकों ने FCNR-B के जरिए 127.2 अरब डॉलर जुटाए थे. इनमें ICICI बैंक की हिस्सेदारी 17.88 अरब डॉलर बताई गई है.

बैंक ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी मुद्रा जमा में वृद्धि से भारतीय बैंकों की फंडिंग स्थिति में सुधार हुआ है. पिछले कुछ वर्षों में बैंक डिपॉजिट की धीमी वृद्धि से दबाव में रहे बैंकों के पास अब कॉरपोरेट लोन, प्रोजेक्ट फाइनेंस और बॉन्ड में निवेश के लिए अधिक फंड उपलब्ध है. ऐसे में बैंकों की बढ़ी हुई फंड उपलब्धता से रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों के लिए घरेलू बॉन्ड बाजार से बड़ी रकम जुटाना आसान हो सकता है.
 


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