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टाटा संस में चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट पर नोएल टाटा की आपत्ति, बोले- ‘अब आगे बढ़ने का समय’
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा- चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला पहले ही स्वीकार किया जा चुका था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने गुरुवार को कंपनी की बोर्ड बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि चंद्रशेखरन का पहले दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला बहुमत शेयरधारक द्वारा पहले ही स्वीकार किया जा चुका था और अब उत्तराधिकार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.
बोर्ड के समक्ष पेश किए गए एक बयान में नोएल टाटा ने कहा कि चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को बोर्ड को सूचित किया था कि 20 फरवरी, 2027 को उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे.
नोएल टाटा ने कहा, “यह उनका अपना फैसला था. यह स्वतंत्र रूप से लिया गया था और स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया था.” उन्होंने कहा कि “यह फैसला इस बोर्ड ने उनसे नहीं मांगा था, न ही यह इस बोर्ड के किसी प्रस्ताव का विषय था और न ही यह किसी समीक्षा प्रक्रिया का परिणाम था.”
इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के फैसले को स्वीकार कर लिया और टाटा संस से कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार उत्तराधिकारी नियुक्त करने के लिए एक चयन समिति गठित करने को कहा.
नोएल टाटा ने कहा कि इस फैसले को सार्वजनिक भी किया गया था और “ग्रुप के कर्मचारियों, उसके ऋणदाताओं, उसके कारोबारी साझेदारों और बाजार ने इसी आधार पर आगे कदम बढ़ाया है. बहुमत शेयरधारक ने भी ऐसा ही किया है. अब पिछला पन्ना पलट चुका है.”
नोएल टाटा ने दोबारा नियुक्ति पर उठाई आपत्ति
नोएल टाटा ने कहा, “इस बैठक में दोबारा नियुक्ति के लिए अब कोई प्रस्ताव लाना इस बोर्ड से एक साथ तीन चीजों को दरकिनार करने के लिए कहेगा: चेयरमैन का खुद का स्पष्ट रूप से बताया गया फैसला, बहुमत शेयरधारक द्वारा उस फैसले की स्वीकृति और वह आगे की प्रक्रिया जिसे उस शेयरधारक ने इस कंपनी को शुरू करने के लिए कहा है.”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या बोर्ड चेयरमैन पद पर विचार कर सकता है, जबकि टाटा संस के निदेशक के रूप में चंद्रशेखरन की स्थिति का समाधान अभी नहीं हुआ है. उनके बयान के अनुसार, जिस आम बैठक में इस सवाल का फैसला होना था, वह कोरम पूरा नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी.
नोएल टाटा ने यह भी कहा कि अगर बाद में यह पाया गया कि चंद्रशेखरन के निदेशक पद की स्थिति अनसुलझी रहने के दौरान चेयरमैन पद पर फैसला लिया गया था, तो यह फैसला “गंभीर कानूनी चुनौती के दायरे में आ सकता है.”
बाद में टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए लाया गया बोर्ड प्रस्ताव “कानूनी रूप से शून्य” था. ट्रस्ट्स ने कहा कि चार निदेशकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि नोएल टाटा ने इसके खिलाफ वोट दिया. ट्रस्ट्स ने तर्क दिया कि आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार चेयरमैन की नियुक्ति या दोबारा नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के बहुमत का समर्थन जरूरी है.
ट्रस्ट्स ने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का दिया हवाला
ट्रस्ट्स के बयान के अनुसार, संबंधित प्रक्रिया चेयरमैन की पहली नियुक्ति और मौजूदा चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति, दोनों पर लागू होती है. इसमें आगे कहा गया कि बोर्ड द्वारा ऐसे प्रस्ताव पर विचार किए जाने के समय दोनों ट्रस्ट नामित निदेशकों का मौजूद रहना जरूरी है और प्रस्ताव को वैध होने के लिए दोनों का पक्ष में मतदान करना आवश्यक है.
नोएल टाटा ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ से प्राप्त एक कानूनी राय भी बोर्ड के समक्ष पेश की, जिसमें ट्रस्ट्स के रुख की शुद्धता से संबंधित राय दी गई थी. टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि बोर्ड ने इस राय पर ध्यान नहीं दिया.
अपने बयान में नोएल टाटा ने कहा कि चंद्रशेखरन के फैसले को ट्रस्ट्स की स्वीकृति औपचारिक रूप से कंपनी को बता दी गई थी और अब कंपनी को उत्तराधिकार की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए. उन्होंने कहा, “पन्ना पलट चुका है. अब आगे बढ़ने का समय है.”
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि वह व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं.
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