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रिटायरमेंट बन गया नंबर-1 वित्तीय लक्ष्य, लेकिन प्लानिंग में गिरावट : रिपोर्ट
रिटायरमेंट को लेकर भारतीयों की सोच तेजी से बदल रही है. सुरक्षा-केंद्रित नजरिए से आगे बढ़कर अब लोग आकांक्षा, आत्म-संतुष्टि और जीवनशैली पर ध्यान दे रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago
PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड ने आज अपनी रिटायरमेंट रेडीनेस रिसर्च रिपोर्ट 2025 का तीसरा संस्करण जारी किया है. यह अध्ययन भारतीय परिवारों की बदलती सोच, चिंताओं और महत्वाकांक्षाओं को सामने लाता है. बढ़ती आय और बदलती पहचान के इस दौर में रिपोर्ट एक अहम विरोधाभास उजागर करती है, रिटायरमेंट पहली बार देश की नंबर-1 वित्तीय प्राथमिकता बन गया है, लेकिन इसके लिए ठोस योजना रखने वालों का प्रतिशत तेजी से घटा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में केवल 37 प्रतिशत लोगों के पास रिटायरमेंट प्लान है, जबकि 2023 में यह आंकड़ा 67 प्रतिशत था. आइए इस पूरी रिपोर्ट पर एक नजर डालते हैं.
रिटायरमेंट बनी शीर्ष प्राथमिकता
रिसर्च के अनुसार, 2025 में रिटायरमेंट वित्तीय प्राथमिकताओं की सूची में पहले स्थान पर पहुंच गया है. यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि पहले यह आठवें स्थान पर था. लाइफस्टाइल सुधार, उद्यमिता और व्यक्तिगत लक्ष्यों ने अब पारिवारिक-केंद्रित चिंताओं को पीछे छोड़ दिया है.
इरादे बढ़े, लेकिन योजना कमजोर
रिपोर्ट में बताया गया है कि रिटायरमेंट को लेकर जागरूकता और इरादा बढ़ने के बावजूद योजना बनाने की प्रवृत्ति कमजोर हुई है. 2025 में सिर्फ 37 प्रतिशत लोगों ने रिटायरमेंट प्लान बनाया है. इसकी एक बड़ी वजह बीमा-आधारित अप्रोच से हटकर जोखिम सुरक्षा और वेल्थ क्रिएशन के बीच स्पष्ट अंतर करना मानी जा रही है.
डर से आकांक्षा की ओर बदली सोच
भारतीयों की मनी माइंडसेट में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है. पहले जहां सोच डर और सुरक्षा पर केंद्रित थी, अब वह आकांक्षा, प्रगति और लाइफस्टाइल फ्रीडम की ओर बढ़ रही है. लोग सुरक्षा के साथ-साथ अपने सपनों और व्यक्तिगत लक्ष्यों को भी महत्व देने लगे हैं.
रिटायरमेंट प्लानिंग में म्यूचुअल फंड्स का दबदबा
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए म्यूचुअल फंड्स सबसे पसंदीदा विकल्प बनकर उभरे हैं. म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर को प्राथमिकता देने वालों का आंकड़ा 2023 के 44 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 62 प्रतिशत हो गया है.
म्यूचुअल फंड अपनाने वालों की संख्या भी 24 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है. इसके साथ ही NPS, PPF और रिटायरमेंट-फोकस्ड फंड्स में भी रुचि बढ़ी है. नए जमाने के प्रोडक्ट्स जैसे REITs ने भी रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में शुरुआती एंट्री की है.
वैकल्पिक आय में सुस्ती, लेकिन इरादों में उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, वैकल्पिक आय स्रोत अपनाने वालों की संख्या घटकर 25 प्रतिशत रह गई है. हालांकि, इसे अपनाने की मंशा बढ़कर 44 प्रतिशत तक पहुंच गई है. लाइफस्टाइल लक्ष्यों और ‘नेवर रिटायर’ माइंडसेट के चलते लोग रिटायरमेंट के बाद भी कमाई के नए रास्ते तलाशना चाहते हैं.
सुरक्षा से आत्म-केंद्रित सोच की ओर बदलाव
रिपोर्ट यह भी बताती है कि परिवार की सुरक्षा और हेल्थ इमरजेंसी जैसे मुद्दे, जो पहले सबसे ऊपर थे, अब प्राथमिकता सूची में नीचे खिसक गए हैं. उनकी जगह बेहतर जीवनशैली, बिजनेस शुरू करना और व्यक्तिगत संतुष्टि जैसे लक्ष्य तेजी से उभर रहे हैं.
यह संकेत देता है कि अधिक समृद्ध होते भारत में परिवार और स्वास्थ्य अब “हाइजीन फैक्टर” बनते जा रहे हैं, जबकि लोग केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि अपने सपनों के अनुरूप रिटायरमेंट की कल्पना करने लगे हैं.
PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के अनुसार, “रिटायरमेंट भले ही नंबर-1 प्राथमिकता बन गया हो, लेकिन तैयारी में आई गिरावट को नकारात्मक संकेत के रूप में नहीं देखना चाहिए. यह एक सकारात्मक विकास का संकेत है, जहां भारतीय जोखिम से सुरक्षा और सक्रिय रूप से संपत्ति निर्माण के बीच अंतर समझने लगे हैं और अधिक स्पष्ट, लक्ष्य-आधारित योजना की ओर बढ़ रहे हैं.”
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