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टूट न जाए IT कंपनी में Job का सपना, Freshers Hiring में आएगी इतनी कमी!
वैश्विक परिस्थितियों के चलते IT कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर्स में कमी आई है, जिसके चलते उनका फोकस कॉस्ट कटिंग पर ज्यादा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
IT सेक्टर में नौकरी की इच्छा रखने वालों के लिए बुरी खबर है. आईटी कंपनियां फाइनेंशियल ईयर- 2024 के लिए की जाने वाली भर्तियों में कटौती करने वाली हैं. एक रिपोर्ट में बताया गया है कि IT कंपनियों ने इस साल फ्रेशर्स की हायरिंग को कम रखने का फैसला लिया है. ये कंपनियां कैंपस हायरिंग में कम से कम 40 फीसदी की कमी करेंगी. यह फैसला घटते क्लाइंट ऑर्डर और मंदी की आहट को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
अभी ट्रेनिंग ही चल रही
आईटी कंपनियों ने 2023 बैच के 230,000 इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को कैंपस सिलेक्शन में चुना था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा घटकर 155,000 रह सकता है. इंफोसिस से लेकर विप्रो तक कई दिग्गज IT कंपनियों ने इस साल फ्रेशर्स की हायरिंग को बेहद सीमित करने का फैसला लिया है. एक रिपोर्ट में इंफोसिस के हवाले से बताया गया है कि कंपनी ने पिछले साल 51000 फ्रेशर्स को नौकरी पर रखा था, उनमें से अधिकांश बेंच पर हैं और उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है. इसलिए FY24 में कितने फ्रेशर्स को हायर किया जाएगा, कुछ नहीं कहा जा सकता.
इन्क्रीमेंट पर भी असर
Tata Consultancy Services के चीफ ह्यूमन रिसोर्सेज ऑफिसर Milind Lakkad ने अप्रैल में कहा था कि कंपनी FY24 के लिए 40000 स्टूडेंट्स को कैंपस रिक्रूटमेंट के तहत भर्ती करेगी. कई दूसरी कंपनियां भी इस वित्तीय वर्ष में हायरिंग को सीमित कर सकती हैं. इसके अलावा, इन्क्रीमेंट पर भी कुछ असर देखने को मिल सकता है. वहीं, आईटी इंडस्ट्री बॉडी नैसकॉम (Nasscom) का कहना है कि अनिश्चित कारोबारी माहौल ने कंपनियों को अपने निर्णयों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है, जिसमें अधिक काम पर रखने से संबंधित मुद्दों को हल करना शामिल है, ताकि लचीला बना रहे.
छंटनी भी कर रहें कंपनियां
पिछले कुछ वक्त से आईटी कंपनियों से छंटनी की खबरें सामने आ रही हैं. हाल ही में Cognizant ने अपने 3500 या एक फीसदी कर्मचारियों की छंटनी करने की बात कही थी. कॉग्निजेंट ने कहा था कि छंटनी सभी विभागों से होगी. अप्रैल में भी एसेंचर ने 19,000 को निकालने की घोषणा की थी. इससे पहले, विप्रो, इंफोसिस, आईबीएम, गूगल, मेटा और ट्विटर जैसी कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर अपने कर्मचारियों को निकाला था. बताया जा रहा है कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते IT कंपनियों को मिलने वाले ऑर्डर्स में कमी आई है, जिसके चलते उनका फोकस कॉस्ट कटिंग पर ज्यादा है.
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