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महिला सशक्तिकरण की दिशा में SBI का बड़ा कदम, 2029 तक कर्मचारियों में 30% होंगी महिलाएं
SBI की यह पहल भारत में कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम है. इससे बैंकिंग सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि होगी और उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं में सक्रिय रूप से शामिल होने का अवसर मिलेगा.
रितु राणा 6 months ago
भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम घोषणा की है. बैंक ने अगले पांच वर्षों में महिला कर्मचारियों की संख्या को बढ़ाकर 30% तक करने का लक्ष्य तय किया है. इस कदम से न केवल बैंकिंग सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि यह कार्यस्थल पर समावेशी संस्कृति को भी मजबूती देगा.
वर्तमान में 2.4 लाख से अधिक कर्मचारी, जिनमें फ्रंटलाइन पर 33% महिलाएं
वर्तमान में SBI के पास देशभर में 2.4 लाख से ज्यादा कर्मचारी हैं. इनमें लगभग 33% महिलाएं यानी करीब 65,000 महिला कर्मचारी फ्रंटलाइन स्टाफ के तौर पर कार्यरत हैं, जबकि कुल महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी 27% है. एसबीआई के केंद्रीय बोर्ड में गैर कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक स्वाति गुप्ता ने बताया कि बैंक अब इस अंतर को कम करने और लैंगिक संतुलन को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है. बैंक सभी स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल महिलाओं को सशक्त बनाएगा, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देगा.
महिलाओं के लिए बेहतर कार्यस्थल की पहल
स्वाति गप्ता ने बताया कि एसबीआई लंबे समय से अपनी महिला कर्मचारियों के लिए एक सहयोगी वातावरण बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है. इसके लिए SBI ने क्रेच भत्ता, महिला स्वास्थ्य पहल, फैमिली कनेक्ट प्रोग्राम, और लंबी छुट्टी के बाद वापस लौटने वाली महिला कर्मचारियों के लिए विशेष ट्रेनिंग जैसी कई योजनाएं चलाई हैं. बैंक की ओर से इस समय देशभर में 340 से अधिक ऐसी शाखाएं चलाई जा रही हैं, जहां सिर्फ महिला कर्मचारी तैनात हैं. आने वाले वर्षों में इनकी संख्या बढ़ाने की योजना है.
'Empower Her' पहल से मिलेगी नेतृत्व में भागीदारी
SBI की एक विशेष पहल ‘Empower Her’ के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व की भूमिकाओं के लिए तैयार किया जा रहा है. इसका उद्देश्य है एक ऐसी महिला नेतृत्व टीम तैयार करना जो भविष्य में बैंक का प्रतिनिधित्व कर सके. स्वाति गुप्ता ने कहा SBI की यह पहल केवल भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनात्मक संस्कृति में बदलाव की दिशा में भी प्रयास हो रहे हैं. बैंक नेतृत्व विकास, रोल रिडिजाइन और महिला प्रतिभाओं को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखने के लिए विशेष कार्यक्रम चला रहा है. इसके साथ ही, तकनीकी और नेतृत्व क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए कोचिंग, मेंटरिंग और स्पेशल ट्रेनिंग की व्यवस्था की जा रही है, जिससे एक समावेशी और भविष्य-तैयार कार्यबल का निर्माण हो सके.
महिला कर्मकारियों के लिए गरिमा नीति
एसबीआई की “गरिमा नीति” भी महिलाओं को यौन उत्पीड़न और भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करती है. इस नीति के अंतर्गत बैंक ने कॉर्पोरेट स्तर, एलएचओ, एओ और आरबीओ स्तरों पर चार सदस्यीय आंतरिक समिति गठित की है, जो किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या भेदभाव से महिला कर्मचारियों की रक्षा करती है. 30% आरक्षण नीति से बैंकिंग उद्योग में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और इससे महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा.
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