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बजट के मौके पर प्रॉपर्टी में निवेश: मेट्रो या टियर II शहर में कौन सा बेहतर
रियल एस्टेट अब स्थिर उछाल के दौर में है और भरोसेमंद बिल्डर्स के प्रोजेक्ट्स में निवेश करने का सही समय अभी है.
रितु राणा 3 months ago
केंद्रीय बजट नजदीक है और निवेशक सोच रहे हैं कि रियल एस्टेट में अभी निवेश करना सही है या बजट की नीतियों का इंतजार करना चाहिए. इस विषय पर जामश्री रियल्टी के फाउंडर एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश दमानी ने BW हिन्दी की सीनियर कॉरेस्पोंडेंट रितु राणा से अपने अनुभव और सुझाव साझा किए.
प्रश्न : केंद्रीय बजट नजदीक आ रहा है, तो क्या अभी रियल एस्टेट में निवेश करने का सही समय है, या निवेशकों को नीतियों की स्पष्टता मिलने का इंतजार करना चाहिए?
राजेश दमानी: कई निवेशक बजट में वित्त मंत्री की झोली खुलने के लिए "वेट एंड वॉच" की नीति अपनाते हैं. लेकिन मेरा मानना है कि रियल एस्टेट अब एक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले उछाल के दौर में प्रवेश कर चुका है, जो सिर्फ एक बजट पर निर्भर नहीं है. पहले का जमाना जहां सिर्फ सट्टेबाजी से बाजार चलता था, वो अब खत्म हो रहा है. अब बाजार असली खरीदारों की मांग और RERA द्वारा लाई गई पारदर्शिता से चल रहा है. बजट के इंतजार में "नीति स्पष्ट होने का" वक्त अक्सर "बजट से पहले वाली कीमतों" को मिस करने का कारण बन जाता है.
अभी प्रमुख शहरों के अच्छे इलाकों में उपलब्ध फ्लैट्स/प्रॉपर्टी की संख्या तेजी से कम हो रही है. बजट में कुछ अतिरिक्त टैक्स छूट या ब्याज सब्सिडी मिल भी सकती है, लेकिन आय में बढ़ोतरी, शहरीकरण और असली मांग जैसे मुख्य कारण तो पहले से ही काम कर रहे हैं. अगर आपको किसी भरोसेमंद बिल्डर का प्रोजेक्ट मिल रहा है, जिसकी डिलिवरी और काम की गुणवत्ता पर भरोसा हो, तो "सही समय" अभी है. अभी प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, और इंतजार करने से मिलने वाली छोटी-मोटी बजट राहत से ज्यादा फायदा इस समय मिलने वाले कैपिटल गेन से हो रहा है.
प्रश्न : हाल के वर्षों में हुए जीएसटी संशोधन से प्रमुख सामग्रियों की कीमतें कम होने से निर्माण लागत कम होने की संभावना थी, क्या वास्तव में खरीदारों के लिए प्रॉपर्टी की कीमतें कम हुई हैं, या निवेशक बजट से कुछ उम्मीद कर सकते हैं?
राजेश दमानी : लोग अक्सर गलतफहमी में रहते हैं कि सीमेंट जैसी सामग्रियों पर जीएसटी कम होने से प्रॉपर्टी की कीमतें फौरन बहुत गिर जाएंगी. हकीकत में, इन बदलावों से निर्माण लागत में करीब 3–5% की कमी आई है. पर यह कमी ज्यादातर जमीन की बढ़ती कीमतों और मजदूरी में महंगाई के खिलाफ एक बफर बनकर काम कर रही है. खरीदारों के लिए इसका मतलब यह नहीं है कि घर "बहुत सस्ते" हो गए हैं, लेकिन कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी जरूर रुकी है या धीमी हुई है. आगामी बजट में हम मुख्य रूप से डेवलपर्स के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट की बहाली की मांग कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है, तो प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता में सुधार आएगा, लागत बचत असली रूप से घर खरीदारों तक पहुंच सकती है, खासकर किफायती हाउसिंग सेगमेंट में.
प्रश्न 3 : क्या अब टियर II और टियर III शहरों में निवेश का मामला मेट्रो शहरों से ज्यादा मजबूत हो गया है, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर के जोर, शहरी प्रवास और किफायत को देखते हुए?
राजेश दमानी : टियर II और III शहरों में अब प्रॉपर्टी की कीमत में बढ़ोतरी के मामले में निवेश का केस निश्चित तौर पर मेट्रो शहरों से ज्यादा मजबूत हो गया है. वहीं मेट्रो शहर अभी भी किराए की अच्छी कमाई और आसानी से खरीद-बिक्री के मामले में अव्वल हैं. अब हम "इंफ्रास्ट्रक्चर के नेतृत्व वाले शहरीकरण" के दौर में हैं. रिंग रोड, मेट्रो का विस्तार, और क्षेत्रीय हवाई अड्डे लखनऊ, जयपुर, नागपुर जैसे शहरों को उच्च विकास वाले कॉरिडोर में बदल रहे हैं.
इन बाजारों में एंट्री पॉइंट कम है और कीमतों में बढ़ोतरी का "डेल्टा" यानी अंतर बहुत ज्यादा है. लेकिन मेट्रो शहर अभी भी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और बेहतरीन ऑफिस स्पेस की मांग के मुख्य केंद्र हैं. एक निवेशक के तौर पर, यदि आप स्थिर संपत्ति संरक्षण चाहते हैं और कम जोखिम लेना पसंद करते हैं, तो टॉप 7 मेट्रो शहरों में ही रहें. लेकिन अगर आप 5–7 साल के लंबे समय में बहुत तेज बढ़ोतरी की तलाश में हैं, तो टियर II शहरों में असली "अल्फा" मिलेगा, खासकर "विकसित भारत" के इंफ्रास्ट्रक्चर पुश के कारण ये शहर अब तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
प्रश्न 4 : लंबे समय के निवेशकों के लिए मौजूदा चक्र में कौन सा ज्यादा आकर्षक है - रेजिडेंशियल या कमर्शियल रियल एस्टेट, और क्यों?
राजेश दमानी : मौजूदा चक्र में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए रेजिडेंशियल रियल एस्टेट साफ तौर पर विजेता है. कोरोना के बाद लोगों में बड़ी और बेहतर "लाइफस्टाइल-अपग्रेडेड" घरों की बहुत मजबूत इच्छा है. हम "प्रीमियमाइजेशन" का ट्रेंड देख रहे हैं, जहां हाई-एंड और लग्जरी रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स तेजी से बिक रहे हैं.
लेकिन संस्थागत निवेशकों या एचएनआई के लिए कमर्शियल रियल एस्टेट अभी भी आकर्षक है - खासकर ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस और डेटा सेंटर्स. आरईआईटी (REITs) अब भरोसेमंद एसेट क्लास बन चुके हैं, जो फिजिकल कमर्शियल प्रॉपर्टी में नहीं मिलने वाली लिक्विडिटी देते हैं.
प्रश्न 5 : केंद्रीय बजट में रियल एस्टेट की मांग पर असर डालने वाले सबसे महत्वपूर्ण ऐलान कौन से हो सकते हैं, टैक्स प्रोत्साहन, हाउसिंग सब्सिडी, ब्याज दर नीतियां या इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटन?
राजेश दमानी : रियल एस्टेट की मांग पर सबसे बड़ा असर "अफोर्डेबल हाउसिंग" की परिभाषा को फिर से तय करने से आएगा. अभी 45 लाख रुपये की सीमा काफी पुरानी हो गई है. अगर इसे बढ़ाकर 75–80 लाख रुपये कर दिया जाए, तो मिड-सेगमेंट के बहुत सारे घर तुरंत सब्सिडी और सरकारी लाभों के दायरे में आ जाएंगे.
दूसरा बड़ा बदलाव पूरे रियल एस्टेट सेक्टर को "इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा" देना गेम चेंजर हो सकता है. इससे डेवलपर्स को सस्ता कर्ज मिलेगा, और ये बचत खरीदारों तक पहुंचेगी.
आखिर में, धारा 24(B) के तहत टैक्स छूट की सीमा पर नजर रखें. अभी यह 2 लाख रुपये है, अगर इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया जाए, तो यह उन लोगों को जो अभी फैसला नहीं ले पा रहे हैं, बेहद आवश्यक प्रोत्साहन देगा. इससे मेट्रो के साथ ही नए उभरते शहरों में भी घरों की खरीदारी की रफ्तार बहुत तेज हो जाएगी.
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