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IMS 2025: नवाचार, निवेश के साथ भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक उत्पादक बनाने का मंच

यह आयोजन भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, तकनीकी नवाचार और “Make in India” अभियान को मजबूती प्रदान करता है.

रितु राणा 7 months ago

बेंगलुरु में 6 से 8 नवंबर, 2025 को IMS 2025 का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें 400 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है. यह सम्मेलन भारत के मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स के भविष्य को उजागर करेगा और निवेश, साझेदारी व वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नए अवसर प्रदान करेगा. आयोजन में उद्योग जगत की प्रतिष्ठित हस्तियां जैसे बाबा कल्याणी, अरुण रामचंदानी, सत्यनारायण नुवाल और शौर्य दोवल भी मौजूद रहेंगी.

बिजनेसवर्ल्ड हिंदी की सीनियर कॉरेस्पॉन्डेंट रितु राणा ने IMS 2025 एडवायजरी बोर्ड के सदस्य और My Home India के संस्थापक सुनील देवधर से इस सम्मेलन के महत्व, MSMEs, नई तकनीक और “Make in India” अभियान के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की, प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:

प्रश्न : सर, IMS 2025 में अब तक कितने प्रतिभागी (participants) जुड़े हैं और आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर : IMS 2025 में अब तक लगभग 410 प्रतिभागी पंजीकृत हो चुके हैं जो अपने-अपने स्टॉल्स लगाने की तैयारी में हैं. इस आयोजन का उद्देश्य भारत की उत्पादन क्षमता, तकनीकी नवाचार और आत्मनिर्भरता को एक ही मंच पर प्रदर्शित करना है. इसमें देश-विदेश के उद्योगपति, निवेशक और स्टार्टअप्स भाग ले रहे हैं ताकि एक साझा मंच पर सहयोग, निवेश और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा दिया जा सके. इस बार प्रदर्शनी में नई पीढ़ी की तकनीकों, हरित ऊर्जा समाधान और रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता पर विशेष फोकस रहेगा.

प्रश्न : इस बार किन-किन क्षेत्रों के स्टार्टअप्स भाग ले रहे हैं?

उत्तर : इस वर्ष का शो टेक्नोलॉजी और नवाचार के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है. क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, एविएशन और 5th जनरेशन फाइटर जेट्स के कॉम्पोनेंट बनाने वाले स्टार्टअप्स इस आयोजन में शामिल हैं. इसके अलावा हेलिकॉप्टर, सैटेलाइट, रक्षा उपकरण, कृषि तकनीक और पर्यावरण-हितैषी मैन्युफैक्चरिंग में भी कई नवाचार सामने आ रहे हैं. यह सभी उद्यमी “Make in India” की भावना को साकार कर रहे हैं और भारतीय तकनीक को वैश्विक स्तर पर पहुंचा रहे हैं.

प्रश्न :  छोटे उद्योगों (MSMEs) को IMS 2025 से क्या लाभ मिलेगा?

उत्तर : यह आयोजन MSMEs के लिए एक बड़ा अवसर है. यहाँ उन्हें न केवल अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का मौका मिलता है बल्कि नए खरीदार, निवेशक और साझेदार भी मिलते हैं. कई बार छोटे उद्योगों को बाजार तक पहुंचने में कठिनाई होती है, लेकिन ऐसे आयोजनों से उन्हें पहचान और बिक्री के अवसर एक ही जगह मिल जाते हैं. इससे बिजनेस नेटवर्किंग मजबूत होती है, नई तकनीक सीखने का मौका मिलता है और गुणवत्ता सुधार के लिए प्रेरणा मिलती है. इसके अलावा, नीति निर्माताओं से सीधा संवाद होने से उद्योगों की समस्याएं भी जल्दी सुलझाई जा सकती हैं.

प्रश्न :  MSME सेक्टर किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए कितना महत्वपूर्ण है?

उत्तर : MSME किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं. भारत में 6 करोड़ से अधिक MSMEs हैं जो देश के GDP में लगभग 30% योगदान देते हैं और 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं. अगर ये इकाइयाँ मजबूत होती हैं तो देश की आत्मनिर्भरता और निर्यात क्षमता दोनों बढ़ती हैं. यह सेक्टर छोटे स्तर पर बड़े परिवर्तन लाने की ताकत रखता है क्योंकि यह स्थानीय संसाधनों, श्रम और कौशल को जोड़ता है. जब MSMEs आगे बढ़ते हैं, तो बड़े उद्योगों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ होता है.

प्रश्न : सरकार और उद्योग जगत की संयुक्त भूमिका को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर : मेरा मानना है कि सरकार की भूमिका एक facilitator की होती है. सरकार नीतियाँ बनाती है, फंडिंग उपलब्ध कराती है, और व्यवसायिक माहौल को सुगम बनाती है. लेकिन असली परिवर्तन तब होता है जब उद्योगपति और उद्यमी इन नीतियों को जमीन पर लागू करते हैं. सरकार को केवल दिशा देनी होती है, जबकि उद्योग जगत को गति प्रदान करनी होती है. सरकार का सहयोग और उद्योगों की भागीदारी मिलकर ही भारत को एक सशक्त औद्योगिक राष्ट्र बना सकते हैं.

प्रश्न : “Make in India” अभियान से क्या सकारात्मक बदलाव आए हैं?

उत्तर : “Make in India” के तहत देश में मैन्युफैक्चरिंग की सोच बदली है. पहले हम विदेशी वस्तुओं पर निर्भर थे, लेकिन अब स्थिति पलट रही है. उदाहरण के तौर पर खिलौनों का बाजार पहले पूरी तरह चीन के कब्जे में था, लेकिन अब भारत में 75% खिलौने घरेलू स्तर पर बन रहे हैं और कई देशों को निर्यात भी हो रहे हैं. इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस और ऑटो सेक्टर में भी स्थानीय उत्पादन बढ़ा है. इससे न केवल आयात घटा है बल्कि रोजगार और निर्यात दोनों में बढ़ोतरी हुई है.

प्रश्न : AI और ऑटोमेशन को लेकर कई लोग रोजगार घटने की बात करते हैं. आप इसे कैसे देखते हैं?

उत्तर : AI यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर लोगों में डर है, लेकिन मेरा मानना है कि यह डर अनावश्यक है. हर तकनीकी क्रांति अपने साथ नई नौकरियाँ लेकर आती है, बस कौशल बदलता है. जो लोग तकनीक को अपनाते हैं और खुद को अपडेट रखते हैं, उनके लिए AI एक अवसर है. AI के जरिए डेटा विश्लेषण, ऑटोमेशन, साइबर सिक्योरिटी और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में लाखों नई नौकरियाँ बनने जा रही हैं. भारत के पास तकनीकी प्रतिभा की विशाल पूंजी है, इसलिए हमें इस अवसर का उपयोग करना चाहिए, न कि डरना चाहिए.

प्रश्न : भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में मैन्युफैक्चरिंग की क्या भूमिका होगी?

उत्तर : मैन्युफैक्चरिंग किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की नींव होती है. अगर भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को तेजी से बढ़ाना होगा. आज भारत आईटी सर्विसेज में अग्रणी है, लेकिन हमें उत्पादक देश भी बनना होगा. जब हमारे उद्योग उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाएंगे और उन्हें विश्व बाजारों में बेचेंगे, तब डॉलर भारत में आएगा. “Make in India” और “Export from India” यही दो मंत्र हमें उस लक्ष्य तक ले जाएंगे.

प्रश्न : My Home India संगठन पूर्वोत्तर और ग्रामीण क्षेत्रों में लघु उद्योगों को कैसे प्रोत्साहित कर रहा है?

उत्तर : My Home India का उद्देश्य देश के दूरस्थ और अविकसित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ना है. हमने हाल ही में North East Startups Festival आयोजित किया था, जहाँ हमने देखा कि स्टार्टअप्स को फंडिंग और मार्गदर्शन की कितनी आवश्यकता है. हमें 125 आवेदन मिले और 5 स्टार्टअप्स को ₹50 लाख की फंडिंग दी गई. लेकिन अफसोस की बात यह रही कि इनमें से कोई भी स्टार्टअप पूर्वोत्तर से नहीं था. इसलिए अब हमारा विशेष फोकस नॉर्थईस्ट पर है. हम वहाँ प्रशिक्षण, निवेश और मेंटरशिप के जरिए युवाओं को उद्योग शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

निष्कर्ष

IMS 2025 और My Home India जैसे प्रयास भारत के MSMEs, स्टार्टअप्स और युवाओं को नई दिशा दे रहे हैं. जैसा कि सुनील देवधर ने कहा “सरकार मार्गदर्शन दे सकती है, लेकिन आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हमारे उद्यमियों और युवाओं के हाथ में है.” ऐसे आयोजनों से भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि विश्व का उत्पादक और नवाचार केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.


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