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World Cancer Day: 2025 तक भारत बन जाएगा कैंसर कैपिटल, लगातार बढ़ रहे हैं मामले

भारत में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. कैंसर को लेकर सब के मन में बहुत से सवाल होते हैं जिनके जवाब जानने के लिए बिज़नेसवर्ल्ड ने डॉक्टर अंशुमान कुमार से ख़ास बातचीत की.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

भारत में हर साल कैंसर के लगभग 14 लाख मामले सामने आते हैं जिनमें से 8.5 लाख लोगों को हर साल इससे लड़ते हुए अपनी जान गंवानी पड़ती है. कैंसर के इलाज, रोकथाम और इलाज में होने वाले खर्चे को लेकर सबके मन में बहुत से सवाल होते हैं. इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए World Cancer Day पर बिजनेस वर्ल्ड ने धर्मशिला नारायण सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कैंसर विज्ञान के डायरेक्टर, डॉक्टर अंशुमान कुमार से ख़ास बातचीत की.  

बढ़ रहे हैं मामले, ज़रूरी हैं ये कदम

डॉक्टर अंशुमान ने सबसे पहले कैंसर से जुडी इकोनॉमिक्स को जनता को समझाने का प्रयास करने के लिए बिजनेस वर्ल्ड को धन्यवाद कहा. डॉक्टर ने बताया कि World Cancer Day को लेकर हमें सांकेतिक नहीं होना चाहिए यह केवल जागरूकता के लिए मनाया जाता है. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए वो हर वर्ष World Cancer Day पर कैंसर के इलाज, रोकथाम और स्क्रीनिंग को लेकर कुछ लक्ष्य बनाये और अगले साल देखे की क्या हम उन लक्ष्यों को तय कर पाए या नहीं. भारत से सामने आते कैंसर के मामलों पर डॉक्टर ने चिंता जताई और कहा - अगर कैंसर पर सही से रोकथाम की जाए तो 100 में से 72 लोगों को कैंसर होने से बचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि भारत साल 2025 तक कैंसर कैपिटल बन जाएगा जो बहुत ही भयानक है. डॉक्टर ने बताया कि हमें स्क्रीनिंग करके सही समय पर सही जांच करना बहुत जरुरी है ताकि कैंसर के शुरूआती स्टेज में ही उसका पता लग जाए और हम पेशेंट को बचा सकें.

सही स्क्रीनिंग की बदौलत इलाज में लगेगा कम वक़्त और पैसा

जब बात कैंसर के इलाज की आती है तो बहुत से सवाल और मुश्किलें सामने खड़े हो जाते हैं. कैंसर का इलाज बहुत ही लंबा चलता है और इसके साथ ही यह बहुत खर्चीला भी होता है जिसकी वजह से बहुत से लोगों को कैंसर के बाद आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इसके साथ-साथ कैंसर का इलाज बहुत कम और गिने चुने अस्पतालों में ही किया जाता है. इतना ही नहीं, अगर किसी व्यक्ति को कैंसर हो जाए और उसे सरकारी अस्पताल में इलाज करवाना पड़े तो उसे बहुत लंबा इंतज़ार करना पड़ता है. इन्हीं विषयों पर बात करते हुए डॉक्टर कहते हैं, कि सरकार को सबसे पहले कैंसर की स्क्रीनिंग और रोकथाम पर जोर देना चाहिए. जिन कारणों से कैंसर होता है, जैसे ज़हरीले पानी से सब्जी की तराई, हैवी मेटल्स, एयर पोल्यूशन, प्लास्टिक इत्यादि, हमें पहले उनकी तरफ अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए और इन्हें रोकना चाहिए.

डॉक्टर कहते हैं इसके बाद सरकार को कैंसर के इलाज का विकेंद्रीकरण करने पर ध्यान लगाना चाहिए. अभी केवल केन्द्रीय सरकारी अस्पतालों में ही कैंसर का इलाज होता है. डॉक्टर कहते हैं कि सरकार को एक ऐसा सिस्टम बना चाहिए कि जिला और राज्य स्तर पर भी कैंसर का इलाज संभव हो सके. साथ ही, सरकार को इंश्योरेंस कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए वन नेशन-वन इंश्योरेंस पॉलिसी लानी चाहिए और इस मुद्दे को सरकार को अपने हाथों में लेना चाहिए. अंत में डॉक्टर अंशुमान कहते हैं कि डेमोक्रेटिक देश में कैपिटलिस्ट थ्योरी ठीक नहीं है.  


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