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कोरोना के कारण इस बीमारी के मरीजों में हुई बड़ी बढ़ोतरी

कोरोना के कारण हुए संपूर्ण लॉकडाउन के कारण पिछले कुछ समय में ये नोटिस किया गया है कि अल्‍जाइमर के मरीजों की संख्‍या में बड़ी बढोतरी हुई है. इस बीमारी के मरीजों में 20 से 30 प्रतिशत की बढोतरी हुई है. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

देश में कोरोना के मामले भले ही कम हो गए हों लेकिन उस महामारी के बाद साइड इफेक्‍ट अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं. इस बीमारी के कारण हुए संपूर्ण लॉकडाउन के कारण पिछले कुछ समय में ये नोटिस किया गया है कि अल्‍जाइमर के मरीजों की संख्‍या में बड़ी बढोतरी हुई है. हालात ये हैं कि बुढ़ापे में होने वाली इस बीमारी के मरीजों में 20 से 30 प्रतिशत की बढोतरी हुई है. 

कोविड के बाद तेजी से बढ़े हैं मरीज
 पिछले दो सालों से कोरोना के कारण इस बीमारी के मरीजों की संख्‍या में बड़ी बढोतरी हुई है.  एम्‍स के न्‍यूरो डिपार्टमेंट की सीनियर प्रोफेसर डा. मंजरी त्रिपाठी बताती हैं कि कोविड के दौरान हम सब  लोग घर पर बंद थे.  इसी के कारण जो बुजुर्ग लोग हैं वो भी घर पर बंद थे,  जिस तरह से हम कहते हैं कि डिमेंशिया के मरीजों की फिजिकली एक्टिव होना चाहिए, उनकी नेटवर्किंग होनी चाहिए, कम्‍यूनिटी में लगाव होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. जिसके कारण इनके मरीजों की संख्‍या में इजाफा हो गया.  

क्‍या होता है अल्‍जाइमर
अल्‍जाइमर एक ऐसी बीमारी है जो सामान्‍य रूप से 60 साल के बाद होती है.  60 से 70 वर्ष की उम्र मे होने वाली इस बीमारी में कई तरह के लक्षण होते हैं. इस बीमारी के बारे में बताते हुए एम्‍स के न्‍यूरो डिपार्टमेंट की सीनियर प्रोफेसर डा. मंजरी त्रिपाठी बताती हैं कि दिमाग में कई तरह के दौरों के कारण जब कोई इंसान अपने रोज के कामों के बारे में भूल जाता हो, मसलन अपने घर का रास्‍ता भूल जाना,  अपने परिचितों का न पहचानना तो समझ लेना चाहिए कि घर के बुजुर्ग इस बीमारी से ग्रसित हो चुके हैं.
 
क्‍या-क्‍या होते हैं इसके लक्षण 

इस बीमारी के कई लक्षण होते हैं जिनमें अलग-अलग परिस्थितियों में दिमाग के निर्णय न ले पाने के कारण रोजमर्रा के कामों में कठिनाई आना, बोल चाल में रूकावट आना, कुछ भी सीखने में कठिनाई होना, व्‍यक्तित्‍व में बदलाव होना, समय और दिशा में भ्रम होना,  इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं.  

कैसे करें इस बीमारी का बचाव 
बढ़ती उम्र के साथ ये बीमारी बढ़ जाती है.  इस बीमारी से बचाव के लिए जरूरी है कि आप दिन में 7 से 8 घंटे की नींद जरूर लें.  हर रोज 20 मिनट वॉक जरूर करें.  अगर आप साइकिलिंग और स्‍वीमिंग कर सकते हैं तो ये आपके लिए ज्‍यादा फायदेमंद साबित होते हैं। हेल्‍दी फूड खाएं, जिसमें ताजा बना खाना, फल फ्रूट, ड्राय फूट, जैसी चीजों को अपने खान-पान में बढ़ावा दें.  

क्‍या है इस बीमारी का इलाज
अगर इस बीमारी को जल्‍दी डिटेक्‍ट कर लिया जाए और इसका इलाज शुरु कर दिया जाए तो इस पर काबू पाया जा सकता है.  लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है और अगर इसका इलाज शुरु नहीं हुआ तो ये आगे चलकर और परेशानी में डाल सकती है. इसलिए   उम्र बढ़ने के साथ ही अगर इस बीमारी से जुड़े कोई भी लक्षण आएं तो उसे लेकर डॉक्‍टर के पास जरूर जाएं.    


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