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भारत में बढ़ेगी अस्पतालों की कमाई, बढ़ाई जा रही है बेडों की संख्या

वित्त वर्ष 2022 में CRISIL द्वारा की गयी जांच से पता चलता है कि अस्पतालों ने सबसे ज्यादा, लगभग 19% की प्रॉफिटेबलिटी कोविड के दौरान दर्ज की थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

 

डाटा रिसर्च फर्म CRISIL ने अपनी एक रिपोर्ट जारी कर दावा किया है कि वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2024 के दौरान भारत में प्राइवेट अस्पतालों की कमाई में 10-11% की वृद्धि देखने को मिल सकती है. रिपोर्ट की मानें तो अस्पतालों की कमाई में वृद्धि के पीछे पर्याप्त बेड होना, ज्यादा ARPOB (इस्तेमाल किये जा रहे हर बेड से होने वाली औसत कमाई) मिलना, घरेलु मांग में वृद्धि होना, और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलने जैसे कारण शामिल हैं. 

कोविड के दौरान अस्पतालों को हुआ था इतना फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि, वित्त वर्ष 2024 तक प्राइवेट अस्पतालों में ऑपरेटिंग मार्जिन 16-17% के साथ स्वस्थ बना रहेगा. हालांकि कर्मचारियों के बढ़ते खर्च, सही साइज के बेड उपलब्ध करवाने जैसी प्री-ऑपरेटिव कीमतों और बढ़ते कॉम्पिटिशन की वजह से ऑपरेटिंग मार्जिन को 200-250 BPS (बेसिस पॉइंट्स) द्वारा सीमित किया गया है. वित्त वर्ष 2022 में CRISIL द्वारा की गयी जांच से पता चलता है कि प्राइवेट अस्पतालों ने अब तक की सबसे ज्यादा, लगभग 19% की प्रॉफिटेबलिटी दर्ज की थी. इस वृद्धि की वजह, कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान इलाज करवाने वाले लोगों की संख्या में हुई बढ़त है. 

जारी रहेगी वृद्धि
रिपोर्ट में कहा गया है कि, हेल्थी कैश जनरेशन की वजह से ज्यादा कैपेक्स को फंड करने के लिए बाहर से लोन नहीं लेना पड़ेगा और इससे प्राइवेट अस्पतालों को पर्याप्त डेब्ट प्रोटेक्शन और स्थिर क्रेडिट रिस्क प्रोफाइल मिलती है. CRISIL रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर अनुज सेठी ने कहा कि, कोविड के बाद से जिस तरह स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैल रही है उसकी वजह से घरेलु मांग में भी बढ़ोत्तरी हो रही है और साथ मेडिकल टूरिज्म की हालत में भी सुधार हो रहा है. इन सभी कारणों की वजह से बेड ऑक्यूपेंसी को सभी जगहों पर लगभग 60% के लेवल पर बनाकर रखा जाएगा, फिर चाहे अतिरिक्त बेड ही क्यों न जुड़ते रहें. कोविड के पहले फेज के दौरान बेड ऑक्यूपेंसी सिर्फ एक बार 53% के स्तर से नीचे पहुंची थी. बढ़ते इंश्योरेंस कवरेज की बदौलत लोगों को अच्छी क्वालिटी का इलाज और आसानी से मिल पायेगा और इससे मांग को भी समर्थन मिलेगा. इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2022 में ARPOB में 20% की वृद्धि देखने को मिली है और इसमें अभी साधारण तरीके से वृद्धि जारी रहेगी. 

बढ़ाई जा रही है बेडों की संख्या
रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि, इलाज की कम कीमतों, आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ ज्यादा कुशल मेडिकल कर्मचारियों और बेहतर होती हवाई कनेक्टिविटी की बदौलत मेडिकल टूरिज्म कोविड महामारी से पहले वाले स्तर पर पहुँच जाएगा और इससे अस्पातालों की कमाई भी महामारी से पहले वाले स्तर पर पहुंच जायेगी. CRISIL की डायरेक्टर पूनम उपाध्याय का कहना है कि अच्छी वृद्धि को देखते हुए CRISIL द्वारा रेट किये गए खिलाड़ियों ने बेड की संख्या बढ़ाने पर जोर देना शुरू कर दिया है. वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2024 के दौरान ये खिलाड़ी पहले से मौजूद बेडों की संख्या में 12% यानी 6000 अतिरिक्त बेडों को जोड़ देंगे. 

सीमित रहेगा अस्पतालों का खर्च
पूनम उपाध्याय ने आगे बताते हुए कहा कि, इन खिलाड़ियों को अतिरिक्त बेडों के लिए कुल 13,000 करोड़ रुपयों का खर्चा उठाना पड़ेगा. वित्त वर्ष 2018 से लेकर 2022 यानी 4 वित्त वर्षों के दौरान लगभग इतने ही अतिरिक्त बेड इन अस्पतालों द्वारा अपने बेड़े में जोड़े गए थे जिसके लिए उस वक्त 11,500 करोड़ रुपयों का खर्चा आया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि CRISIL द्वारा रेट किये गए इन खिलाड़ियों के इंटरेस्ट कवरेज और डेब्ट या फिर EBITDA (अर्निंग्स बिफोर टैक्स डेप्रिसिएशन एंड अमोर्टाइजेशन) रेशो वित्त वर्ष 2024 तक सीमित रहेंगे.
 

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