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आखिर क्यों आईटी कंपनियों में लोग छोड़ रहे हैं नौकरी, रिकॉर्ड पर पहुंचा Attrition level

टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस और टेक महिंद्रा में कर्मचारियों द्वारा कंपनी छोड़ने की दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्लीः देश की दिग्गज आईटी कंपनियां इस वक्त एक भयंकर समस्या से जूझ रही हैं, जिसका तोड़ नहीं निकल पा रहा है. टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस और टेक महिंद्रा में कर्मचारियों द्वारा कंपनी छोड़ने की दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. कोविड के बाद कंपनियों ने अपनी हायरिंग को 50 हजार तक बढ़ा दिया है. इससे कंपनियों की लागत बढ़ गई है और मार्जिन पर दबाव महसूस किया जा रहा है. 

इतनी हो गई कर्मचारियों द्वारा नौकरी छोड़ने की दर

वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में इंफोसिस की नौकरी छोड़ने की दर 28.4 फीसदी थी, जो भारतीय आईटी क्षेत्र के लोगों में सबसे अधिक थी. विप्रो 23.3 फीसदी के एट्रिशन रेट के साथ दूसरे स्थान पर आया, जबकि टेक महिंद्रा में एट्रिशन रेट 22 फीसदी बताया गया. टीसीएस की एट्रिशन रेट बढ़कर 19.7 फीसदी हो गई, जो पिछली तिमाही की तुलना में 2.3 फीसदी ज्यादा है, हालांकि यह अन्य कंपनियों की तुलना में कम है. सबसे बड़ी भारतीय आईटी कंपनी टीसीएस के सीईओ राजेश गोपीनाथन ने तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद बताया कि फर्म की नौकरी छोड़ने की दर में अभी कमी नहीं आई है, लेकिन आने वाली तिमाहियों में ऐसा हो सकता है.
 
टेक महिंद्रा के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीपी गुरनानी ने तर्क दिया कि उद्योग में तेजी से विस्तार के लिए उच्च एट्रिशन दरों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. उन्होंने कहा, "सामान्य तौर पर जब कोई उद्योग तेजी से उछाल से गुजरता है, तो 23-24% पर एट्रिशन रेट के साथ झटका लगता है, मुझे लगता है कि शॉक स्टेज अब नीचे आ रहा है."

क्यों है इतनी ज्यादा आईटी कंपनियों में नौकरी छोड़ने की दर

भारतीय आईटी कंपनियों में नौकरी छोड़ने की दर अन्य उद्योगों की तुलना में अधिक है. बेंगलुरु स्थित आईटी क्षेत्र के एक कर्मचारी ने बताया कि क्यों भारतीय आईटी विशेषज्ञ इतनी बार नौकरी बदलते हैं. उन्होंने कहा, "अगर हम एक ही कंपनी में 1-2 साल से अधिक समय तक बने रहें तो ग्रोथ के अवसर बहुत कम हैं.  शीर्ष भारतीय आईटी कंपनियों में से किसी में भी ग्रोथ के चांस वैसे नहीं है जैसा पहले हुआ करते थे, हमारे इंडस्ट्री में कड़ी प्रतिस्पर्धा है. "

इंफोसिस के पूर्व निदेशक टीवी मोहनदास पई ने भी जोर देकर कहा कि भारतीय आईटी उद्योग में काम करने वाले लोगों की अधिकता है. उन्होंने बताया, “सिस्टम में लोगों का सरप्लस है. ये सभी बड़ी कंपनियों से जुड़कर अपना करियर बनाना चाहते हैं और अच्छी ट्रेनिंग लेना चाहते हैं.”

आईटी क्षेत्र के एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि उच्च नौकरी छोड़ने की दर उसी क्षेत्र में अन्य बहुराष्ट्रीय निगमों द्वारा बेहतर वेतन के कारण हो सकती है. "मैं और मेरे आस-पास के अधिकांश लोग भारतीय आईटी नौकरियों को क्यों छोड़ते हैं क्योंकि आईबीएम, कैपजेमिनी, एक्सेंचर इत्यादि जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में वित्तीय रूप से बेहतर सैलरी के अवसर हैं. वे समान भूमिकाओं के लिए अपेक्षाकृत अधिक सैलरी देते हैं."

क्या भारतीय आईटी कंपनियों में नौकरी छोड़ने से जुड़ी कोई लागत है?

नौकरी छोड़ने की लागत में एक नए कर्मचारी को प्रशिक्षित करने का खर्च, उस समय सीमा में भुगतान किया गया वेतन और प्रशिक्षण चरण में अन्य खर्चों के अलावा बकाया बिल शामिल हैं. पई ने बताया कि कैसे एक आईटी कंपनी के लिए नौकरी छोड़ने की लागत बढ़ जाती है. "एट्रिशन की लागत बहुत अधिक है. यह $5,000 प्रति व्यक्ति है. मैं आपको एक उदाहरण देता हूं, अगर कोई छोड़ देता है तो आप किसी नए को नौकरी पर लेते हैं और आपको उन्हें छह महीने के लिए ट्रेंड करना होता है. वे उस समय के लिए कोई काम नहीं करते हैं और कंपनियों उस समय के लिए भी वेतन देना पड़ता है.”

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