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मौसम विभाग से आई इस खबर से आप तो खुश होंगे ही, RBI का भी खिल जाएगा चेहरा; ये है पूरा गणित

रिजर्व बैंक को पिछले कुछ समय से महंगाई के मोर्चे पर काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने सोमवार को ऐसी खबर सुनाई है, जिससे आम आदमी के साथ-साथ सरकार और RBI के चेहरे पर भी सुकून भरी मुस्कान खिल जाएगी. दरअसल, मौसम विभाग का कहना है कि इस बार जून से सितंबर तक मानसून सामान्य से बेहतर रहेगा. बता दें कि 104 से 110% के बीच बारिश को सामान्य से बेहतर माना जाता है. मानसून का सामान्य से बेहतर रहने का मतलब है कि फसलों के लिए किसानों को पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा.  

1 जून को देता है दस्तक 
मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल 106% यानी करीब 87 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है. जबकि 4 महीने के मानसून सीजन के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 86.86 सेंटीमीटर होता है. इसका मतलब है कि इस बार के मानसून सीजन में 86.86 सेंटीमीटर बारिश होगी. देश में आमतौर पर मानसून 1 जून के आसपास केरल के रास्ते प्रवेश करता है और सितंबर के अंत में राजस्थान के रास्ते वापस चला जाता है.

ऐसा रहेगा राज्यों का हाल
IMD ने जिन 25 राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश का अनुमान जताया है, उसमें केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, सिक्किम, मेघालय, बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, पुड्डुचेरी, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दमन-दीव, दादरा और नगर हवेली शामिल हैं. जबकि छत्तीसगढ़, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सामान्य बारिश का अनुमान है. 

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Repo Rate में कटौती संभव!
मानसून के सामान्य रहने का अनुमान सरकार और RBI के लिए बड़ी राहत के समान है, जिन्हें महंगाई को नियंत्रित करने को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ी है. मानसून की बेरुखी से खेती प्रभावित होती है. ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ता जाता है. नतीजतन महंगाई का चक्का तेजी से घूमने लगता है. IMD की इस भविष्यवाणी के बाद यह उम्मीद भी बढ़ गई है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नीतिगत ब्याज दरों में कुछ कटौती करे. पिछले ने पिछले कई बार से नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट 6.50% पर यथावत है. हाल ही में कुछ अर्थशास्त्रियों ने कहा था कि RBI ब्याज दरों में कटौती से पहले मानसून की तस्वीर साफ होने का इंतजार करेगा, क्योंकि मानसून की चाल पर महंगाई की चाल निर्भर करती है.  अब जब तस्वीर साफ हो गई है, तो इस मोर्चे पर कुछ राहत मिल सकती है.

RBI के लिए इसलिए है राहत
महंगाई पिछले कुछ समय से सरकार और रिजर्व बैंक की परेशानी की वजह रही है. ऐसे में यदि मानसून सामान्य से कम रहता है, तो इस परेशानी में इजाफा हो सकता है. आरबीआई को केंद्र की तरफ से खुदरा महंगाई दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है. रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत यदि महंगाई के लिए तय लक्ष्य को लगातार तीन तिमाहियों तक हासिल नहीं किया जाता, तो RBI को केंद्र सरकार के समक्ष स्पष्टीकरण देना होता है. कुछ वक्त पहले रिजर्व बैंक को बाकायदा ऐसा करना पड़ा था. मौद्रिक नीति रूपरेखा के 2016 में प्रभाव में आने के बाद यह पहली बार था कि RBI को महंगाई नियंत्रित न कर पाने को लेकर केंद्र को सफाई देनी पड़ी. इस लिहाज से मानसून के सामान्य रहने की खबर RBI से RBI ने राहत की सांस ली होगी.

इसलिए जरूरी है अच्छी बारिश 
एक रिपोर्ट बताती है कि देश में सालभर होने वाली कुल बारिश का 70% पानी मानसून में ही बरसता है. हमारे देश में में 70 से 80 प्रतिशत किसान फसलों की सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर हैं. इसका सीधा मतलब है कि मानसून के अच्छा न रहने की स्थिति में पैदावार प्रभावित हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है. भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है. ऐसे में मानसून का अच्छा रहना अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद जरूरी है.

ऐसा है मानसून का गणित
अब यह भी समझ लेते हैं कि मानसून का सामान्य से कम या ज्यादा होने का क्या मतलब है. यदि बारिश के 90% से कम होने का अनुमान हो, तो इसका मतलब है कि देश में काफी कम बरसात होगी. 90-95% का अर्थ है कि मानसून सामान्य से कम रहेगा. 96 से 104% का मतलब है मानसून सामान्य रहेगा. जबकि 104-110% का मतलब है कि सामान्य से ज्यादा बारिश होगी. इसी तरह, 110% से ऊपर का अर्थ है कि देश में बहुत ज्यादा बारिश की संभावना है. 
 


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