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महज 71 लाख के लिए मुश्किल में फंसने वाली Rasna की पूरी कहानी जानते हैं आप?

रसना को घर-घर पहुंचाने का काम अरीज पिरोजशॉ खंबाटा ने किया था, जो अब हमारे बीच नहीं हैं. उनका पिछले साल निधन हो गया था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

सबकी प्यास बुझाने वाली रसना बड़ी मुश्किल में फंस गई है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने उसके खिलाफ इन्सॉल्वेंसी की अर्जी को स्वीकार कर लिया है. 71 लाख रुपए के बकाए से जुड़ी इस याचिका को लॉजिस्टिक्स कंपनी भारत रोड कैरियर प्राइवेट ने दायर किया है. अहमदाबाद के NCLT ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद याचिका स्वीकार कर ली. इसके साथ ही ट्रिब्यूनल ने रविंद्र कुमार ने अंतरिम रिजॉल्यूशनल प्रोफेशनल नियुक्त किया है.

क्या हैं लगे हैं आरोप? 
रसना की सक्सेस स्टोरी जानने से पहले यह समझ लेते हैं कि आखिर ये पूरा मामला है क्या? दरअसल, लॉजिस्टिक्स कंपनी भारत रोड कैरियर का कहना है कि उसे रसना से ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज के लिए लगभग 71.3 लाख रुपए लेने हैं, जिसका भुगतान कंपनी नहीं कर रही है. बकाया की इनवॉइस अप्रैल 2017 से अगस्त 2018 के बीच तैयार की गई थी, मगर इतने समय बाद भी भुगतान नहीं हो पाया है. इसी के चलते भारत रोड कैरियर ने NCLT में रसना के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी प्रोसीडिंग शुरू करने की याचिका दायर की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है.

क्या है रसना का कहना?
वहीं, रसना का कहना है कि उसने नवंबर 2018 में अहमदाबाद के कमर्शियल कोर्ट में भारत रोड कैरियर के खिलाफ 1.25 करोड़ रुपए के नुकसान का मामला दायर किया था. मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा गया था, लेकिन लॉजिस्टिक्स कंपनी मध्यस्थ के सामने पेश नहीं हुई. इस वजह से  मध्यस्थता फेल हो गई. रसना का आरोप है कि भारत कैरियर ने तथ्यों को दबाया है और दोनों पक्षों के बीच पहले से विवाद भी चल रहा है. हालांकि, रसना की दलीलें NCLT को प्रभावित नहीं कर पाईं और उसने भारत रोड कैरियर की याचिका स्वीकार कर ली. 

क्यों नहीं मिली राहत? 
याचिका स्वीकार करते हुए NCLT ने कहा कि चूंकि डिफॉल्ट की तारीख कोरोना महामारी से पहले की है, इसलिए रसना को इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC Code) के सेक्शन 10A के तहत राहत नहीं मिल सकती. इस सेक्शन के तहत यह प्रावधान है कि कोरोना के दौरान यदि कोई कंपनी बकाए को लेकर डिफॉल्ट होती है, तो उसके खिलाफ दिवालिया याचिका शुरू नहीं की जाएगी. NCLT ने भारत रोड कैरियर के इस दावे को सही पाया कि उसने रसना के कई सामानों का ट्रांसपोर्ट किया, जिसके लिए अप्रैल 2017 से अगस्त 2018 की अवधि के दौरान कई इनवॉइस बनाए गए.

याद है ‘आई लव यू रसना’?
अब बात करते हैं रसना की सक्सेस स्टोरी की. रसना को घर-घर पहुंचाने का काम अरीज पिरोजशॉ खंबाटा (Ariz Pirojshah Khambata) ने किया था, जो अब हमारे बीच नहीं हैं. पिछले साल 85 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था. रसना की पंचलाइन ‘आई लव यू रसना’, किसी जमाने में इतनी फेमस हो गई थी कि जुबां पर खुद ब खुद आ जाती थी.  रसना के इस विज्ञापन में नजर आने वाली रसना गर्ल अंकिता जावेरी थीं, जो वर्तमान में दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री हैं.  

क्या है नाम का मतलब?
रसना की शुरुआत 1979 में हुई थी, मगर इसकी नींव सन 1976 में तब पड़ी, जब अहमदाबाद के खंबाटा परिवार ने रेडी-टू-सर्व कांसन्ट्रेट सॉफ्ट ड्रिंक्स तैयार करके ऑरेंज की एक वैरायटी ‘जाफे’ के नाम से लॉन्च किया. हालांकि, जब अरीज खंबाटा ने अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाया, तो उन्होंने ‘जाफे’ का नाम बदलकर रसना कर दिया यानी - रस + जूस. इसके बाद हुई देश के सॉफ्ट ड्रिंक बाजार में क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत.

क्या रहा था बिजनेस मंत्र?
अरीज खंबाटा का बिजनेस मंत्र था - उत्पाद भारतीय परंपरा के अनुसार होना चाहिए और आम आदमी तक उसकी पहुंच होनी चाहिए. रसना में यह दोनों ही देखने को मिलते हैं. रसना का बेहतरीन टेस्ट और कम कीमत ने इसे पूरे देश में फेमस कर दिया. उस जमाने में 5 रुपए के रसना के एक पैकेट को 32 गिलास सॉफ्ट ड्रिंक में बदला जा सकता था. इस हिसाब से कीमत मात्र 15 पैसे प्रति गिलास पड़ती थी. यही वजह थी कि रसना हर घर की पसंद बन गया था.

ब्रैंड प्रमोशन पर जोर
आरिज खंबाटा ने ब्रैंड प्रमोशन पर भी जोर दिया. उन्होंने अपने प्रोडक्ट की पंचलाइन रखी - 'आई लव यू रसना' जो लंबे समय तक लोगों के दिलोदिमाग पर छाई रही. 80 और 90 के दशक में पले-बढ़े लोग शायद ही इसे कभी भूल पाएं. ऋतिक रोशन, अक्षय कुमार और कपिल देव जैसे कई सेलिब्रिटीज रसना के विज्ञापन में नजर आ चुके हैं. हालांकि, अरीज खंबाटा उन लोगों में नहीं थे, जिनका पूरा ध्यान केवल विज्ञापनों पर रहता है. उनके लिए प्रोडक्ट क्वालिटी पहली प्राथमिकता था, इसलिए वह रसना और बेहतर बनाने की कोशिश करते रहते थे.

बाजार में कितनी हिस्सेदारी?
आरिज ने विरासत में मिले कारोबारों को जमीन से आसमां पर पहुंचा था और अब परिवार की अगली पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रही है. सॉफ्ट ड्रिंक कांसन्ट्रेट मार्केट में ब्रैंड की हिस्सेदारी करीब 80% है, इसके बाद मोंडेलेज इंडिया-मार्केटेड टैंग का नंबर आता है. रसना दुनिया भर के 60 देशों में बेचा जाता है. देशभर में कंपनी के 9 प्लांट हैं. 26 डिपो, 200 सुपर-स्टॉकिस्ट और 5,000 स्टॉकिस्ट सहित कंपनी के पास 16 लाख आउटलेट्स का नेटवर्क है. कोका-कोला और पेप्सी जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए रसना ने जिस तरह से बाजार में अपनी पकड़ बनाई है, उसके लिए अरीज पिरोजशाह खंबाटा की कुशल रणनीतियां ही जिम्मेदार रहीं.

अब आगे क्या होगा?
अब सवाल ये उठता है कि इस मामले में आगे क्या होगा? एक्सपर्ट्स को लगता है कि याचिका का स्वीकार हो जाना रसना के लिए विकल्पों का अंत नहीं है. कंपनी हायर कोर्ट में याचिका दायर कर सकती है. इसके अलावा, चूंकि बकाया राशि केवल 71 लाख रुपए है, इसलिए रसना के वर्तमान मालिक इसे चुकाकर मामले को खत्म करना भी चाह सकते हैं. हां, इतना जरूर है कि इससे रसना की छवि जरूर प्रभावित होगी.    
 


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