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वेदांता-फॉक्सकॉन के बाद अब Micron, सेमीकंडक्टर प्लांट से कितना बदल जाएगा भारत?

अमेरिका की माइक्रोन टेक्नोलॉजी सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में दुनिया की टॉप कंपनियों में शुमार है और ये कंपनी भारत में प्लांट लगाने जा रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

अमेरिकी कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron) भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाएगी. कंपनी ने इसके लिए गुजरात सरकार के साथ MoU साइन किया है. यदि सबकुछ ठीक रहा, तो अगले साल से भारत में भी सेमीकंडक्टर चिप तैयार होने लगेगी. हालांकि, इससे पहले, वेदांता और ताइवान की कंपनी Foxconn भी गुजरात में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने का ऐलान किया था. दोनों कंपनियों की तैयारी देखकर लग रहा था कि जल्द ही प्लांट अस्तित्व में आ जाएगा, लेकिन साल भर बाद भी ऐसा नहीं हो सका है.  

क्या माइक्रोन मारेगी बाजी? 
वेदांता-फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर्स लिमिटेड ने करीब 1 साल के गतिरोध के बाद केंद्र सरकार को दोबारा आवेदन सौंपा है. दोनों कंपनियों को इस जॉइंट वेंचर ने सरकार को एक संशोधित आवेदन भेजा है, जिसमें इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन के दिशा-निर्देशों के तहत कंपनी को इंसेंटिव प्रदान करने की बात कही गई है. इससे पहले खबर आई थी कि ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन अलग राह पकड़ सकती है. वो वेदांता को छोड़कर किसी दूसरी कंपनी के साथ प्लांट लगाने की योजना को परवान चढ़ायेगी. हालांकि, अब दोनों की तरफ से इस दिशा में साथ आगे बढ़ने की बात कही गई है. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या Micron वेदांता-फॉक्सकॉन से पहले अपना प्लांट शुरू कर पाती है. बता दें कि माइक्रोन टेक्नोलॉजी को PLI यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव का भी फायदा मिलेगा. PLI के तहत सरकार किसी भी तरह की परियोजना-लागत का 50 फीसदी खर्च वहन करती है. 

ताइवान की कंपनियों का दबदबा 
अमेरिका की माइक्रोन टेक्नोलॉजी सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में दुनिया की टॉप कंपनियों में शुमार है. हालांकि, इस क्षेत्र में दबदबा ताइवान की कंपनियों का है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के वैश्विक रिवेन्यु में ताइवान की कंपनियों की हिस्सेदारी 60% से अधिक थी. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि चिप इंडस्ट्री में ताइवान कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यही वजह रही कि जब फॉक्सकॉन और वेदांता ने मिलकर गुजरात में प्लांट लगाने का ऐलान किया, तो लगा कि भारत जल्द ही सेमीकंडक्टर चिप के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा. हालांकि, दोनों कंपनियों के बीच ढेर सारे मतभेद सामने आ गए और प्रोजेक्ट लटकता रहा.

गुजरात को ही क्यों चुना?
माइक्रोन गुजरात के साणंद में 2.75 अरब डॉलर (22,516 करोड़ रुपए) का प्लांट स्थापित करेगी. इस प्लांट से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से लगभग 20 हजार रोजगार पैदा होगा. इससे पहले, वेदांता-फॉक्सकॉन ने गुजरात में संयंत्र लगाने पर 1,54,000 करोड़ रुपए का निवेश करने की बात कही थी. दोनों कंपनियों ने यह दावा भी किया था कि इससे एक लाख से ज्यादा रोजगार उत्पन्न होंगे. गौर करने वाली बात ये है कि माइक्रोन और वेदांता-फॉक्सकॉन दोनों ने ही प्लांट लगाने के लिए गुजरात को चुना. दरअसल, सेमीकंडक्टर सेक्टर के उद्योगों को गुजरात में आकर्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक डेडिकेटेड इन्स्टीट्यूट ‘गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक मिशन’ (GSEM) की स्थापना की है. इसके अलावा, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण भी कंपनियों को गुजरात खींच ले जाता है. 

क्या होगा इस प्लांट से फायदा?
माइक्रोन का सेमीकंडक्टर प्लांट पहले लगेगा या वेदांता-फॉक्सकॉन, ये तो फिलहाल कहना मुश्किल है, लेकिन इससे भारत को काफी फायदा होने वाला है. फिलहाल देश की कोई भी कंपनी सेमीकंडक्टर चिप नहीं बनाती. इसके लिए कंपनियों को दूसरी विदेशी कंपनियों पर निर्भर रहना होता है. लिहाजा, जब संबंधित वैश्विक स्तर पर तनाव उत्पन्न होता है, जैसा कि रूस-उक्रेन युद्ध के वक्त देखने को मिला, तो चिप की आपूर्ति बाधित हो जाती है. कोरोना महामरी के चलते भी भारत सहित पूरी दुनिया को सेमीकंडक्टर की किल्लत का सामना करना पड़ा था. जिससे कारों के वोटिंग पीरियड काफी बढ़ गया था. कुछ कंपनियों को अपने प्रोडक्शन में भी कमी करनी पड़ी थी. भारत में प्लांट का मतलब होगा, इस तरह की परेशानियों से मुक्ति. इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि भारत में चिप बनने से कई इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स के दाम कम हो सकते हैं. वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा था कि भारत में सेमीकंडक्टर बनने से लैपटॉप जैसे कई प्रोडक्ट्स के दाम घटेंगे. 

क्या है सेमीकंडक्टर चिप?
आजकल सभी गाड़ियां लेटेस्ट टेक्नोलॉजी पर बन रही हैं, जिनमें तमाम तरह के आधुनिक फीचर्स होते हैं. गाड़ियों की पावर स्टीयरिंग, ब्रेक सेंसर, एंटरटेनमेंट सिस्टम, एयरबैग और पार्किंग कैमरों में सेमीकंडक्टर चिप इस्तेमाल होती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक वाहन में 1,000 से अधिक सेमीकंडक्टर चिप्स लगाईं जाती हैं. ऑटो सेक्टर के अलावा, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक इंडस्ट्री में भी चिप बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती है. बिना चिप के इन इंडस्ट्रीज से जुड़ी कंपनियों का सर्वाइव करना मुश्किल है.

 


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