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ईरान, ताइवान ने वापस की भारत की 40 हजार किलो चाय, कहीं ये साजिश तो नहीं?

अच्छी क्वालिटी, स्वाद और कीमत के बल पर आसाम की चाय का हर कोई दिवाना है. हालांकि अभी इसको बदनाम करने की एक इंटरनेशनल साजिश का पता चला है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्लीः दुनिया भर में आसाम के बागानों में पैदा होने वाली चाय काफी प्रसिद्ध है. विश्व के कई देशों में आसाम में पैदा होने वाली चाय कोलकाता के जरिए इंपोर्ट की जाती है. अच्छी क्वालिटी, स्वाद और कीमत के बल पर आसाम की चाय का हर कोई दिवाना है. हालांकि अभी इसको बदनाम करने की एक इंटरनेशनल साजिश का पता चला है. वहीं इससे निर्यातकों में मायूसी छा गई है.

कीटनाशक बताकर वापस कर दी 40 हजार किलो चाय

एक दैनिक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ईरान और ताइवान जैसे देशों ने, जिन पर चीन का काफी प्रभुत्व है उसने यह कहकर आसाम के बागानों में पैदा हुई 40 हजार किलो चाय को लौटा दिया कि इसमें कीटनाशकों की मात्रा ज्यादा है. दोनों ही देशों ने ‘फाइटोसैनिटरी’ शब्द का इस्तेमाल किया है. इस शब्द का संबंध कृषि के दौरान इस्तेमाल होने वाले उन सभी तत्वों से है, जिनसे मिट्टी-पानी दूषित होते हैं. जबकि यही चाय यूरोपीय देशों में भी एक्सपोर्ट की जाती है.

70 फीसदी खपत भारत में

हालांकि भारत के विभिन्न राज्यों जैसे कि बंगाल के दार्जिलिंग, तमिलनाडु की नीलगिरी पहाड़ियां और आसाम में पैदा होने वाली कुल चाय का 70 फीसदी हिस्सा भारत में ही खपत हो जाता है. केवल 30 फीसदी चाय ही इंपोर्ट होती है. देश में अकेले 53 फीसदी चाय आसाम में पैदा होती है.

श्रीलंका से गिरा एक्सपोर्ट

वैसे अन्य देशों में श्रीलंका से चाय इंपोर्ट होती थी. हालांकि देश के दिवालिया घोषित करने और आपातकाल लगने की वजह से अभी वहां के हालात काफी खराब हैं. ऐसे में चाय का एक्सपोर्ट भी श्रीलंका से न के बराबर हो रहा है. चाय का एक्सपोर्ट न होने की वजह से श्रीलंका को विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी परेशानी हो रही है. ऐसे में भारतीय उत्पादकों ने विश्व के अन्य देशों में चाय का एक्सपोर्ट बढ़ा दिया है.

चाय की पत्तियों को बचाने के लिए होता है कीटनाशकों का इस्तेमाल

हालांकि चाय की पत्तियों को कीड़ों से बचाने के लिए सीमित मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है. मच्छर जैसा दिखने वाला हेलो प्लीज नाम का एक कीड़ा ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. उस कीड़े को मारने के लिए नियंत्रित कीटनाशक इस्तेमाल होता है. अधिकतर चाय बागान कीटनाशकों का इस्तेमाल सरकार के दिशा-निर्देशों और टी बोर्ड द्वारा निर्धारित नियमों के तहत ही करते हैं. इसके लिए बकायदा मजदूरों को प्रशिक्षण दिया जाता है और ये भी बताया जाता है कि पत्तियों पर कीटनाशक का छिड़काव कब, कैसे और कितना करना है. दरअसल, कुछ कीड़े चाय की पत्तियों को विकृत, झुर्रीदार और धब्बेदार बना देते हैं. इसलिए सीमित मात्रा में कीटनाशक इस्तेमाल करने पड़ते हैं.
इससे क्वालिटी पर किसी तरह का असर नहीं पड़ता है. 


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