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क्या से क्या हो गया...कभी मुट्ठी में था आसमान, आज जेल में गुजर रहीं Goyal की रातें 

जेट एयरवेज के फाउंडर नरेश गोयल को कैंसर ने जकड़ लिया है. उन्होंने अदालत से इलाज के लिए जमानत मांगी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

किसी जमाने में आसमान पर राज करने वाले नरेश गोयल आज जेल में दिन गुजर रहे हैं. उनकी हालिया तस्वीरों को देखकर समझा जा सकता है कि वक्त जब बुरा हो तो व्यक्ति किस कदर टूट जाता है. जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को मुसीबतों के साथ अब कैंसर ने भी जकड़ लिया है. गोयल इलाज के लिए अंतरिम जमानत की गुहार लगा रहे हैं. उनकी इस गुहार पर अदालत का रुख क्या रहता है, यह 20 फरवरी को स्पष्ट होगा. पिछले साल सितंबर से जेल में बंद गोयल की मानसिक स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह छह जनवरी को अदालत में रो पड़े थे. गोयल ने कहा था कि उन्होंने जीने की उम्मीद खो दी है और वह जेल में ही मर जाना पसंद करेंगे.

आगाह करती है बर्बादी
नरेश गोयल की कामयाबी जहां लोगों को प्रेरित करती थी. वहीं, उनकी बर्बादी लोगों को आगाह करती है कि सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद उन्हें क्या नहीं करना चाहिए. गोयल की गलतियों ने जेट एयरवेज को आसमान से जमीन पर ला दिया और वह खुद भी अंतहीन परेशानियों में घिर गए. चलिए जानते हैं कि जब सबकुछ अच्छा चल रहा था, तो गोयल ऐसा क्या कर बैठे कि जेट एयरवेज बर्बाद हो गई. अब वह खुद कैंसर की चपेट में आ चुके हैं और इलाज के लिए अंतरिम जमानत की राह तक रहे हैं. 

बनाई थी एक अलग पहचान
नरेश गोयल किसी जमाने में ट्रैवल एजेंसी चलाया करते थे. उन्होंने केवल दो बोइंग 737 के साथ जेट एयरवेज की शुरुआत की थी. बताया जाता है कि जेट एयरवेज देश की पहली प्राइवेट एयरलाइन रही, जिसका उद्घाटन JRD टाटा ने किया था. महज थोड़े से समय में इस एयरलाइन ने भारतीय आसमान में अपनी एक अलग जगह बना ली. सस्ते दर पर हवाई यात्रा ऑफर करके जेट इतनी फेमस हो गई कि बाकी एयरलाइन को खतरा महसूस होने लगा, लेकिन फिर वक्त ने करवट ली और हवा से बातें करने वाली जेट एयरलाइन जमीन पर आ गई.

किसी न सुनना पड़ा भारी  
गोयल ने बड़ी मेहनत से जेट एयरवेज को खड़ा किया, उसे हवाई यात्रियों की पहली पसंद बनाया, लेकिन उसके क्रैश होने की कहानी भी उन्होंने खुद ही लिख डाली. आर्थिक संकट के चलते जेट एयरवेज का कामकाज 17 अप्रैल 2019 को बंद हो गया था. इससे पहले नरेश गोयल ने कंपनी को बचाने के लिए खूब हाथ-पैर मारे, लेकिन सफलता नहीं मिली. उन्होंने अपने फाइनेंशियल एडवाइजर्स से लेकर तमाम एक्सपर्ट्स से राय मांगी, ताकि संकट से कंपनी को बचाया जा सके. उस वक्त, कुछ एडवाइजर्स ने उन्हें पीछे हटकर नए निवेशकों को मौका देने की सलाह दी. उस दौर में टाटा ग्रुप ने जेट में इन्वेस्ट करने में दिलचस्पी दिखाई थी, मगर गोयल ने किसी सलाह पर ध्यान नहीं दिया. गोयल अपने मन की करते रहे और कंपनी बंद होने की दहलीज पर पहुंच गई. हर दिन बढ़ते कर्ज के साथ आखिरकार एक दिन ऐसा आया, जब जेट एयरवेज के विमान केवल शो-पीस बनकर रह गए.

'अपनों' पर भरोसा न करना भूल
जानकार मानते हैं कि गोयल ने एक नहीं, कई गलतियां की. उनकी एक गलती यह भी थी कि जिन लोगों को उन्होंने हायर किया, उन पर भरोसा नहीं दिखाया. उन्हें 'मैं' से ज्यादा प्यार हो गया था. नरेश गोयल मानने लगे थे कि उनके मुंह से निकली हर बात सही होती है और उसे काटा नहीं जा सकता. गोयल को लगता था कि वो ही जेट एयरवेज हैं. सीधे शब्दों में कहें तो अहंकार उनमें तेजी से पनपने लगा था. हालांकि, वह बातचीत में माहिर थे और इस वजह से कई छोटे-मोटे संकट से जेट को आसानी से निकालकर ले गए.    

सौदेबाजी पड़ गई भारी
एक रिपोर्ट की मानें, तो कारोबार बंद करने से कुछ दिन पहले तक जेट एयरवेज को हर दिन 21 करोड़ का नुकसान हो रहा था. 2017 में डेल्टा एयरलाइन ने भी जेट में कुछ स्टेक खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी. अबू धाबी की सरकारी एयरलाइन कंपनी एतिहाद पहले से ही जेट की पार्टनर थी, मगर नरेश गोयल सौदेबाजी में उलझे रहे. डेल्टा ने गोयल को स्टेक लेने के लिए 300 रुपए प्रति शेयर का ऑफर दिया, लेकिन गोयल 400 रुपए प्रति शेयर से नीचे आने को तैयार नहीं थे. जबकि कंपनी के शेयर 400 रुपए से नीचे ही ट्रेड कर रहे थे. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर उस वक्त गोयल ने सही फैसला लिया होता, तो शायद जेट के सिर से कर्ज का बोझ कुछ कम हो जाता.

सहारा ने बिगाड़ा गणित
2004 में बाजार के 40% हिस्से पर जेट का ही कब्जा था, लेकिन जब नए प्लेयर मार्केट में आए तो नरेश गोयल एक अलग ही रणनीति पर काम करने लगे. इंडिगो और स्पाइस जेट को टक्कर देने के लिए वह पहले सस्ते की जंग में फंसे, फिर उन्होंने 2007 में 1450 करोड़ रुपए में एयर सहारा को खरीदा. इस डील के साथ ही कंपनी फाइनेंशियल और लीगल सहित तमाम तरह की मुश्किलों में फंस गई. इतना ही नहीं, गोयल ने IPO का पैसा कर्ज का बोझ कम करने के बजाए नए प्लेन ऑर्डर करने में खर्च कर दिया.

कमाई पर खुद चलाई कैंची
2012 में जब किंगफिशर बंद हुई, तो नरेश गोयल के पास एक मौका था किंगफिशर के गलत फैसलों से सीख लेने का पर उन्होंने यह मौका भी गंवा दिया. कंपनी के कर्ज में दबे होने के बावजूद उन्होंने 10 एयरबस A330 और बोइंग 777 प्लेन का ऑर्डर दे दिया. गोयल के इस कदम से केवल जेट का खर्चा ही बढ़ा. बात यहीं खत्म नहीं होती. गोयल ने इन जहाजों में सीट भी कम रखीं. एक रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल प्रैक्टिस में जहां 400 सीटें होती हैं, वहीं इसमें सिर्फ 308 सीटें थीं. यानी एक तरह से उन्होंने कमाई पर खुद कैंची चला दी.

सलाह पर नहीं किया अमल
जेट के विमानों में फर्स्टक्लास की 8 सीटें थीं, जिनसे कमाई न के बराबर हो रही थी. ऐसे में अधिकारियों ने उन्हें इन सीट्स को सामान्य सीट्स में बदलने की सलाह दी थी, लेकिन गोयल ने इसे अनसुना कर दिया. यही एक गलती जेट एयरवेज के चेयरमैन और फाउंडर के रूप में गोयल बार-बार करते रहे - अधिकारियों पर भरोसा नहीं करना. कहा जाता है कि गोयल को एयर सहारा से डील नहीं करने की सलाह दी गई थी, इसके बावजूद उन्होंने करोड़ों खर्च का सौदा कर डाला. इस तरह 1992 में जिस कंपनी को उन्होंने उम्मीदों के साथ शुरू किया, उसे नंबर वन की पोजीशन दिलवाई, उसे खुद ही बर्बाद कर दिया.

इसलिए ED ने कसा है शिकंजा 
जेट एयरवेज एक बार फिर से उड़ान भरने की कोशिश कर रही है. यूएई के बिजनसमैन मुरारी लाल जालान और लंदन की कंपनी कालरॉक कैपिटल (Kalrock Capital) के कंसोर्टियम ने जून 2021 में दिवालिया प्रक्रिया के तहत इस एयरलाइन को खरीदा था. हालांकि, अब तक इसका ऑपरेशन शुरू नहीं हो सकता है. इधर, जेट एयरवेज से जुड़े मामलों की जांच कई एजेंसियां कर रही हैं. इनमें ED, सीबीआई और इनकम टैक्स शामिल हैं. CBI ने अपनी जांच में नरेश गोयल, उनकी पत्नी अनीता गोयल और जेट एयरवेज एयरलाइन के डायरेक्टर रहे गौरंग आनंद शेट्टी को आरोपी बनाया है. सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ने ED मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में पिछले साल नरेश गोयल को गिरफ्तार किया था. सीबीआई ने ये मामला केनरा बैंक की शिकायत के बाद दायर किया था, जिसमें कथित धोखाधड़ी के आरोप नरेश गोयल पर लगे हैं.
 


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