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दिल्ली के स्कूलों को धमकी का रूस कनेक्शन, Fake News से दहशत फैलाने में चीन भी माहिर

दिल्ली के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी वाले मामले में यह पता चला है कि ईमेल का सोर्स रूस है.

नीरज नैयर 2 years ago

दिल्ली-NCR के 60 के आसपास स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल मिलने से हड़कंप मच गया है. ऐहतियात के तौर पर दिल्ली-नोएडा के दर्जनों स्कूलों को खाली कराया गया है. खबर मिलते ही पुलिस, बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं. अब तक किसी भी स्कूल में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है. बच्चों को वापस उनके घर भेज दिया गया है. जिन स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है, वो शहर के नामचीन स्कूल हैं. 

पहले भी मिली स्कूलों को धमकी
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ईमेल किसने और क्यों भेजा है. अब तक की जांच में यह सामने आया है कि ईमेल का सोर्स रूस है. इस साल जनवरी में, आरके पुरम और फरवरी में साउथ दिल्ली के पुष्प विहार स्थित दो स्कूलों को भी ईमेल से धमकी मिली थी. इन स्कूलों को भी उड़ाने की बात कही गई थी. इसी तरह, पिछले साल कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के कम से कम 48 स्कूलों को ईमेल के माध्यम से एक साथ बम से उड़ाने की धमकी मिली थी. हालांकि, ईमेल में जिन स्कूलों का जिक्र था, वहां बम जैसा कुछ नहीं मिला था. यह धमकी फेक न्यूज साबित हुई थी.  

अफवाह से यहां भी अफरा-तफरी 
कल यानी मंगलवार को राष्ट्रपति भवन और ईस्ट दिल्ली के चाचा नेहरू अस्पताल को बम से उड़ाने का ई-मेल दिल्ली पुलिस को मिला था. पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत चाचा नेहरू अस्पताल में बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड के मदद से जांच की, लेकिन कुछ नहीं मिला. इसके साथ ही दिल्ली की 103 सरकारी बिल्डिंग या कार्यालयों को भी धमाके से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल भेजा गया था. इसके अलावा, हाल ही में एयरपोर्ट्स और पटना के सरकारी कार्यालय के साथ-साथ राजभवन को बम से उड़ाने की धमकी ईमेल द्वारा दी गई थी. बम स्क्वायड की टीम ने राजभवन और प्रमुख सरकारी कार्यालयों में करीब 3 घंटे तक जांच की, लेकिन कोई भी संदिग्ध समान नहीं मिला. 

China से आया धमकीभरा कॉल 
दिल्ली के स्कूलों को मिली बम की झूठी खबर में रूस का एंगल सामने आ रहा है. वैसे रूस और चीन इस तरह की फेक न्यूज फैलाने में माहिर हैं. पिछले साल मुंबई के जॉइंट कमिश्नर (ट्रैफिक) प्रवीण पडवाल को फोन पर बम विस्फोट की धमकी मिली थी. बाद में जांच में सामने आया कि कॉल चीन से आया था. इस पूरे मामले में सबसे खास बात ये थी कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने प्रॉक्सी वीपीएन और तकनीकी इस्तेमाल करके NCP MLA Yashwant Mane के मोबाइल नंबर से छेड़छाड़ की थी. कॉलर ने खुद को विधायक माने बताया था. जब पुलिस ने MLA से पूछताछ की, तो पता चला कि उन्होंने कॉल नहीं किया था. फोन करने वाले ने Mira-Bhayander में धमाके की बात कही थी, लेकिन वहां बम जैसा कुछ नहीं मिला था. 

फेक न्यूज का लेते हैं सहारा
रूस और चीन से बड़ी संख्या में फेक न्यूज फैलाई जाती हैं. कोरोना काल में चीन की तरफ से फेक न्यूज की बाढ़ आ गई थी. ताइवान को लेकर भी चीन यही करता रहा है. इसी तरह, रूस भी पिछले कुछ वक्त से इस मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यूक्रेन से युद्ध के समय रूस ने जमकर फर्जी खबरें चलाई थीं. रूस ने अपनी नीतियों के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए फेक न्यूज का सहारा लिया था. कनाडा ने रूसी फर्जी खबरों से निपटने के लिए बाकायदा एक अभियान भी चलाया था. केवल यूक्रेन युद्ध के समय ही नहीं, रूस पहले भी अपने पक्ष में माहौल बनाने या अपनी सच्चाई दुनिया से छिपाने के लिए फेक खबरों का सहारा लेता रहा है. 

चीन की ऐसी 100 वेबसाइट
इसी साल आई एक रिपोर्ट बताती है कि चीन द्वारा संचालित 100 से अधिक फर्जी समाचार वेबसाइटें 30 देशों में प्रोपगेंडा फैला रही हैं. सिटीजन लैब की रिपोर्ट के अनुसार, चीन से संचालित 123 वेबसाइट्स एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका के तीस देशों में स्थानीय समाचार आउटलेट के रूप में काम कर रही हैं. नवंबर 2023 में, दक्षिण कोरिया की जासूसी एजेंसी, नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (एनआईएस) ने 38 फर्जी कोरियाई भाषा वाली न्यूज़ वेबसाइट्स की पहचान की थी, जिन पर चीन की जनसंपर्क फर्म्स हैमाई और हैक्सुन से संबंध होने का संदेह था. 

चीन खुद भी हुआ परेशान
वैसे, दूसरों को परेशान करने वाला चीन खुद भी फेक न्यूज फैलाने वालों से परेशान है. उसने कुछ वक्त पहले बड़ी संख्या में ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स को बैन किया था जो फर्जी खबरें फैला रहे थे. पिछले साल मई में खबर आई थी कि अब चीन ने एक लाख ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने का फैसला किया है, जो फेक न्यूज फैला रहे थे. इनमें सबसे ज्यादा Weibo के अकाउंट हैं, जिसे चाइनीज ट्विटर कहा जाता है.


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