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महायुद्ध की दहलीज पर दुनिया, Bharat को कितना प्रभावित कर सकता है Israel-Iran विवाद? 

यदि ईरान और इजरायल के बीच युद्ध होता है, तो फिर ये केवल दो देशों के बीच की लड़ाई ही नहीं रह जाएगी.

नीरज नैयर 2 years ago

दुनिया एक बार फिर युद्ध की दहलीज पर पहुंच गई है. ईरान और इजराइल (Iran-Israel Tension) में तनाव इस कदर बढ़ गया है कि युद्ध की आशंका जताई जा रही है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान अगले 2 दिन के भीतर इजराइल पर अटैक कर सकता है. यदि ऐसा होता है, तो यह केवल 2 देशों की लड़ाई नहीं रह जाएगी. इससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूरी दुनिया प्रभावित होगी और भारत भी अछूता नहीं रहेगा.   

भारत ने जारी की एडवाइजरी 
इस बीच, खबर है कि अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर 'USS ड्वाइट आइजनहावर' लाल सागर के रास्ते इजराइल पहुंच रहा है. ये अमेरिकी जंगी जहाज इजरायल को ईरान की तरफ से दागी जाने वाली मिसाइल और ड्रोन से सुरक्षा प्रदान करेगा. वहीं, बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सहित 6 देशों - अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और जर्मनी ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. भारत ने अपने नागरिकों को ईरान और इजराइल न जाने की सलाह दी गई है.

इस वजह से बिगड़े हैं हालात
युद्ध जैसे हालात निर्मित होने के पीछे इजरायल की एक एयरस्ट्राइक है. बताया जा रहा है कि एक अप्रैल को इजराइल ने सीरिया में ईरानी एंबेसी के पास एयरस्ट्राइक की थी. इस हमले में ईरान के दो टॉप आर्मी कमांडर्स सहित कुल 13 लोगों की मौत हुई थी. इसका बदला लेने के लिए अब ईरान ने इजराइल पर हमले की धमकी दी है. इस लड़ाई में इजरायल को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है, लेकिन ईरान का साथ देने वालों की भी कमी नहीं है. ऐसे में यह युद्ध पूरी दुनिया के लिए संकट बन सकता है. इससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है. 

कौन War में किसका देगा साथ?
ईरान और इजरायल में युद्ध का मतलब होगा दुनिया का दो हिस्सों में बंट जाना. इराक, सीरिया, लेबनान, तुर्किए, कतर, जॉर्डन आदि मुस्लिम ईरान का साथ दे सकते हैं. जबकि अमेरिका-ब्रिटेन और उनके सहयोगी देश इजरायल के साथ हैं. इस युद्ध में रूस की भी एंट्री हो सकती है. रूस पहले से ही ईरान का सैन्य सहयोगी रहा है. यूक्रेन युद्ध के चलते अमेरिका सहित अन्य यूरोपीय एवं पश्चिमी देशों से रूस की ठनी हुई है. इसलिए उसके ईरान के पाले में जाने की संभावना काफी ज्यादा है. यह भी संभव है कि रूस अपने मित्र देश चीन और उत्तर कोरिया को भी ईरान के पक्ष में लामबंद कर ले. वैसे, पाकिस्तान और सऊदी अरब ईरान को पसंद नहीं करते, लेकिन इनके बारे में कुछ साफ-साफ नहीं कहा जा सकता. भारत हमेशा की तरह इस मामले में तटस्थ भूमिका निभा सकता है. 

तेल की कीमतों में लगेगी आग!
अगर युद्ध छिड़ता है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है. जैसे-जैसे युद्ध का दायरा बढ़ेगा, दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होना शुरू हो जाएंगी. तेल की कीमतों में आग से महंगाई भड़क जाएगी. दुनिया को ऊर्जा और खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है. भारत के ईरान और इजरायल देशों के साथ व्यापारिक संबंध हैं, युद्ध की स्थिति में उनका प्रभावित होना लाजमी है. ईरान के साथ हमारे व्यापार में भले ही पहले के मुकाबले कुछ कमी आई है, लेकिन व्यापारिक रिश्ते कायम हैं और उनके प्रभावित होने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. वित्त वर्ष 2019-20 में भारत और ईरान के बीच कुल व्यापार 4.77 बिलियन डॉलर (करीब 40 हजार करोड़ रुपए) का था, जो कि अप्रैल से जुलाई 2023 के बीच 0.66 बिलियन डॉलर (5500 करोड़ रुपए) रह गया है.  

भारत को ऐसे होगा नुकसान
भारत की तरफ ईरान को कई सामान निर्यात किए जाते हैं. इसमें प्रमुख रूप से बासमती चावल, चाय, चीनी, ताजे फल, दवाएं/फार्मास्यूटिकल्स, सॉफ्ट ड्रिंक -शरबत और दालें आदि शामिल हैं. इसी तरह, ईरान से भारत मेथनॉल, पेट्रोलियम बिटुमेन, सेब, लिक्विफाइड प्रोपेन, सूखे खजूर, अकार्बनिक/कार्बनिक कैमिकल, बादाम आदि आयात करता है. युद्ध की स्थिति में आयात-निर्यात के प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता. वहीं, भारत के इजरायल से भी व्यापारिक संबंध है. एशिया में इजरायल के लिए भारत तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है. उसकी कंपनियों ने यहां निवेश किया हुआ है, जिसके युद्ध लंबा खिंचने की स्थिति में प्रभावित होने से इंकार नहीं किया जा सकता. भारत के कुल व्यापारिक निर्यात में इजरायल की हिस्सेदारी 1.8% है. इजरायल भारत से लगभग 5.5 से 6 बिलियन डॉलर के परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद (Refined Petroleum Products) खरीदता है. वित्तवर्ष 23 में, इजराइल को भारत का कुल निर्यात 8.4 बिलियन डॉलर था. जबकि आयात 2.3 बिलियन डॉलर रहा. इस तरह, दोनों देशों के बीच करीब 10 बिलियन डॉलर का कारोबार होता है.

बदल सकती है ये तस्वीर 
इजरायल भारत से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के साथ-साथ ज्लैवरी, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग से जुड़े प्रोडक्ट्स मंगाता है. जबकि भारत मोती, हीरे, डिफेंस मशीनरी, पेट्रोलियम ऑयल्स, फर्टिलाइजर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट आदि आयात करता है. एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल 2000 से मार्च 2023 के दौरान, भारत में इजरायल का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI 284.96 मिलियन अमेरिकी डॉलर था. कई भारतीय कंपनियों ने भी इजरायल में बड़ा निवेश किया हुआ है. यदि युद्ध होता है, तो तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है. 

डरे हुए हैं Tea Exporters
इसके अलावा, ईरान भारतीय चाय के प्रमुख खरीदारों में शामिल है. ऐसे में वहां उथलपुथल का भारतीय निर्यातकों के कारोबार पर असर लाजमी है. जनवरी-दिसंबर 2022 के दौरान भारत ने सबसे ज्यादा चाय का निर्यात संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को किया. UAE को 4.23 करोड़ किलोग्राम चाय भेजी गई. इसी तरह, रूस में 4.11 करोड़ किलोग्राम और ईरान में 2.16 करोड़ किलोग्राम चाय का निर्यात हुआ. ईरान मुख्य रूप से भारत के लिए एक परंपरागत चाय बाजार है. असम से ईरान सबसे ज्यादा चाय भेजी जाती है. भारतीय चाय निर्यातक पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं. वह जल्दी से जल्दी ऑर्डर पूरा करने की कोशिश में हैं, लेकिन साथ ही भुगतान को लेकर आशंकित हैं. उन्हें इस बात का भी डर है कि युद्ध के चलते माल की आवाजाही में कोई दिक्कत न हो जाए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान हमारी चाय का बड़ा खरीदार है. अगर वहां हालात बिगड़ते हैं, तो सप्लाई प्रभावित होना लाजमी है. इसके अलावा, निर्यातकों का पेमेंट भी अटक सकता है.  
 


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