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भारत ने रूस से लिया तेल, बदले में भारतीय वस्तुओं पर क्यों लगा दी 4% ड्यूटी

इसका असर भारतीय एक्सपोर्टर्स पर भी पड़ा है, क्योंकि रूस के ज्यादातर बैंक अभी भी ट्रेडिंग करने के लिए भारतीय रुपये के बजाए डॉलर में कर रहे हैं.

उर्वी श्रीवास्तव 3 years ago

नई दिल्लीः यूक्रेन संकट के बीच भारत ने रूस से तेल लेने का करार किया, लेकिन पुतिन प्रशासन ने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों से उपजे संकट और घाटे को दूर करने के लिए सभी देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर 4 फीसदी शुल्क लगा दिया है. इसका असर भारतीय एक्सपोर्टर्स पर भी पड़ा है, क्योंकि रूस के ज्यादातर बैंक अभी भी ट्रेडिंग करने के लिए भारतीय रुपये के बजाए डॉलर में कर रहे हैं. वहीं एक प्रमुख बैंक ने रुपये में व्यापार करने पर अपनी सहमति जता दी है. 

रूस में हो गया है आर्थिक विस्फोट

रूस के साथ व्यापार घाटा विस्फोट कर रहा है, जो लगभग 20 बिलियन अमेरीकी डॉलर है.रूस ने आयात पर चार फीसदी शुल्क लगाया है. इससे माल ढुलाई का खर्चा भी बढ़ गया है.

तो क्या नया है?

एकमात्र उम्मीद की किरण रूस द्वारा रुपये में व्यापार करने का समझौता है, हालांकि सभी बैंक इस के लिए सहमत नहीं हैं. अच्छी खबर यह है कि रूस का मुख्य बैंक सबरबैंक रुपये में व्यापार करने के लिए तैयार है. व्यापार अभी भी डॉलर में किया जाता है, जो कि 13 छोटे रूसी बैंकों के माध्यम से होता है जो पश्चिमी प्रतिबंधों से मुक्त हैं. वर्तमान में आरबीआई ने इंडसइंड और यूको बैंक को रुपये में रूस के साथ व्यापार करने के लिए नौ वोस्ट्रो खाते खोलने की मंजूरी दे दी हैं. 

वोस्ट्रो-नोस्ट्रो खाता क्या है?

शाब्दिक रूप से, नोस्ट्रो का अर्थ है 'हमारा' और वोस्ट्रो का अर्थ है 'आपका'. यह स्थानीय मुद्रा में बाद की मुद्रा रखने के लिए विदेशी बैंकों की ओर से घरेलू बैंकों द्वारा प्रबंधित खाता है. उदाहरण के लिए, रूसी रूबल बैंक द्वारा INR के संदर्भ में आयोजित किया जाएगा. रूस में भी एक विशेष खाता खोला जाएगा जो रुपये में व्यापार को निपटाने में मदद करेगा. आयात के साथ-साथ निर्यात के लिए भी इसी तंत्र का उपयोग किया जाएगा. इस स्थिति में रूस में जो खाता खोला जाएगा वह नॉस्ट्रो खाता होगा. 

वे तकनीकी रूप से एक ही प्रकार के खाते हैं, अंतर यह है कि कौन किस देश में खाता खोलता है. भारत में हम इसे वोस्त्रो खाता कहेंगे, और रूसी खाता नोस्ट्रो खाता होगा. विपरीत तब लागू होता है जब हम रूसी परिप्रेक्ष्य देखते हैं.

वर्तमान में, पश्चिमी प्रतिबंधों को देखते हुए अप्रैल से अगस्त तक रूस को भारत का निर्यात पहले ही 24 प्रतिशत तक गिर चुका है और चार प्रतिशत आयात शुल्क केवल आग में घी डालेगा. इसी समय, रूस इराक और सऊदी अरब से आगे निकलकर भारत के शीर्ष ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन गया है.

इसे अपने उपयोग के लिए कच्चे तेल के आयात पर भारत की भारी निर्भरता में जोड़ें, जिसके जल्द ही कम होने की उम्मीद नहीं है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के साथ इन सभी कारकों ने भारत को रूस के साथ व्यापार संबंधों के मामले में रेड अलर्ट पर रखा है.  

VIDEO: Trade fair: शुरुआती दिनों में अफगानी व्‍यापारियों का कितना हुआ कारोबार ?

 


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