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तेजी से बढ़ रहा है भारत का डेटा सेंटर बाजार, 2025 में ट्रेंड में रहेंगे ये मुख्य बिंदु

डेटा सेंटर हाल के वर्षों में निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन गए हैं. इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पूंजी लगाई गई है और यह अगले 2-3 वर्षों में तेज़ी से बढ़ता रहेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत का डेटा सेंटर बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है और 2026 तक इसकी कुल क्षमता 2 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है. मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में लगभग 525 मेगावाट क्षमता निर्माण के विभिन्न चरणों में है. क्लाउड कंप्यूटिंग, तकनीकी प्रगति, 5जी रोलआउट और BFSI (बैंकिंग, फाइनेंस, सर्विसेज और इंश्योरेंस) के डिजिटलीकरण की वजह से मांग बढ़ रही है. साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े वर्कलोड इस मांग को और बढ़ाएंगे. इन वजहों से 2032 तक भारत का डेटा सेंटर बाजार 11.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है.

डेटा सेंटर हाल के वर्षों में निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन गए हैं. इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पूंजी लगाई गई है और यह अगले 2-3 वर्षों में तेज़ी से बढ़ता रहेगा. 2025 और उसके बाद के कुछ मुख्य रुझान जिन पर ध्यान देना चाहिए:

1. बड़े डेटा सेंटर कैम्पस  

डेटा सेंटर कंपनियां अब बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रही हैं, जिनकी क्षमता 100 मेगावाट से ज्यादा है, खासतौर पर नवी मुंबई में. मुंबई के अलावा, चेन्नई भी डेटा सेंटर बनाने के लिए एक पसंदीदा जगह बन गया है. हैदराबाद में भी आने वाले सालों में बड़े पैमाने पर हाइपरस्केलर डेटा सेंटर बनेंगे. यहां दो बड़ी कंपनियां 100+ एकड़ जमीन पर अपने प्रोजेक्ट्स के अलग-अलग चरणों में काम कर रही हैं. 

क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी बड़ी मांग को देखते हुए, इस इंडस्ट्री में बड़े डेटा सेंटर कैम्पस बनाए जाएंगे ताकि बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके.

2. नए अवेलेबिलिटी जोन और माइक्रो-मार्केट्स का निर्माण  

मुंबई और चेन्नई अभी भी डेटा सेंटर कंपनियों की पसंदीदा जगहें बनी हुई हैं. लेकिन मौजूदा डेटा सेंटर इलाकों में जमीन की कमी और जमीन की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी के कारण, कंपनियां इन शहरों के पारंपरिक इलाकों से थोड़ा दूर नए विकल्प तलाश रही हैं.

3. AI से बढ़ती डेटा सेंटर की मांग और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बदलाव  

NASSCOM के अनुसार, भारत का AI बाजार 2023 से 2028 के बीच 20% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ने की उम्मीद है. यह डेटा सेंटर की मांग को और मजबूत करेगा. बढ़ते AI वर्कलोड के कारण डेटा सेंटर अब ज्यादा घने और बिजली खपत करने वाले हो रहे हैं. मौजूदा 8-10 KW प्रति रैक सर्वर डेंसिटी के मुकाबले, औसत रैक डेंसिटी 30 KW प्रति रैक तक बढ़ने की संभावना है.

4. उन्नत और टिकाऊ कूलिंग समाधान  

डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में AI से जुड़े बदलावों को अपनाने के लिए इंडस्ट्री अब नई और ऊर्जा-कुशल तकनीकों को अपनाने की तैयारी कर रही है. इसमें लिक्विड इमर्शन कूलिंग जैसी कूलिंग तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है, जो बिजली की खपत को कम करती हैं और खर्चों में बड़ी बचत प्रदान करती हैं. आने वाले हाइपरस्केल और AI के लिए खास तौर पर बनाए गए डेटा सेंटर इस तकनीक को अपनाने की उम्मीद है.

5. चिप मेकर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर के बीच सहयोग  

पिछले दो वर्षों में, भारत के डेटा सेंटर उद्योग में चिप डेवलपर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाताओं के बीच सहयोग देखा गया है (जैसे NVIDIA और Yotta, और टाटा ग्रुप और रिलायंस जियो इंफोकॉम के बीच साझेदारी). इन सहयोगों का उद्देश्य टिकाऊ, ऊर्जा-कुशल और भविष्य के लिए तैयार डेटा सेंटर बनाना है, जो अगले दो वर्षों में आकार लेंगे. ये साझेदारियां सरकार के इंडिया AI मिशन के साथ तालमेल बिठाती हैं और डेटा सेंटर इकोसिस्टम को बड़ा लाभ पहुंचाएंगी.

6. एज डेटा सेंटर सुविधाओं का विकास  

भारत के डेटा सेंटर उद्योग में एक और महत्वपूर्ण बदलाव अगले कुछ वर्षों में एज डेटा सेंटर सुविधाओं की स्थापना है. ये सुविधाएं डेटा उत्पन्न करने वाले उपकरणों और अंतिम उपयोगकर्ताओं के करीब बनाई जाएंगी. इनका उद्देश्य टियर II और टियर III शहरों से बढ़ते डेटा ट्रैफिक को संभालना और OTT प्लेटफॉर्म, IoT डिवाइस, गेमिंग, स्मार्ट सिटी जैसी सेवाओं को कम लेटेंसी और बेहतर उपभोक्ता अनुभव के साथ समर्थन देना है.

पटना, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद और भुवनेश्वर जैसे टियर II शहरों में डेटा सेंटर कंपनियां ऐसी एज सुविधाओं की स्थापना के लिए पहले ही प्रतिबद्ध हो चुकी हैं.

7. ऑन-प्रेमाइसेस से क्लाउड पर माइग्रेशन  

कई कंपनियां अब पारंपरिक ऑन-प्रेमाइसेस इंफ्रास्ट्रक्चर की बजाय हाइब्रिड क्लाउड पर होस्टिंग को प्राथमिकता दे रही हैं. क्लाउड कंप्यूटिंग पारंपरिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े खर्चों और रखरखाव की जरूरतों को कम करता है. साथ ही, यह बेहतर स्केलेबिलिटी और सुरक्षा समाधान प्रदान करता है. इसके कारण क्लाउड कंपनियों से डेटा सेंटर की मांग तेज़ी से बढ़ेगी.

8. सस्टेनेबिलिटी- ग्रीन डेटा सेंटर्स पर ध्यान  

डेटा सेंटर उद्योग अब पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) को ध्यान में रखते हुए काम कर रहा है. ऑपरेटर अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक हिस्सा पवन और सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने के लिए रणनीतिक पावर खरीद समझौतों का उपयोग कर रहे हैं. 

कुछ डेटा सेंटर ऑपरेटर आने वाले वर्षों में 100% ग्रीन सुविधाएं बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं और इस लक्ष्य को पाने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं. ऑपरेटर खुद के ग्रीन पावर स्रोत बनाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं. पानी और कचरे के प्रबंधन में सर्कुलर इकॉनॉमी के सिद्धांतों को अपनाने पर ध्यान दिया जा रहा है. सरकार भी डेटा सेंटरों को बिजली देने के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग की संभावना तलाश रही है, और 2025 से इस विज़न की शुरुआत हो सकती है. 

9. उन्नत सुरक्षा उपाय  

डेटा सेंटर उद्योग साइबर खतरों और सुरक्षा उल्लंघनों को रोकने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लगातार बेहतर बना रहा है. इसमें AI-आधारित सुरक्षा उपकरण, ज़ीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसी उन्नत सुरक्षा तकनीकों को शामिल किया जा रहा है.

10. स्किल डेवलपमेंट और प्रतिभा बढ़ाने पर ध्यान

10. स्किल डेवलपमेंट और प्रतिभा बढ़ाने पर ध्यान

हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, डेटा सेंटर संचालन और आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और लर्निंग सेंटर्स पर काम तेज़ी से बढ़ रहा है. निजी कंपनियां और सरकार, दोनों, देश की डिजिटल तरक्की के अनुसार प्रतिभा तैयार करने पर ध्यान दे रहे हैं. भारत का डेटा सेंटर बाजार तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसे संस्थागत पूंजी, तकनीकी नवाचार, सरकारी समर्थन और देश की विशाल डिजिटल व्यवस्था का सहारा मिल रहा है.

(लेखक- देवी शंकर, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, इंडस्ट्रियल, लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर्स, ANAROCK कैपिटल हैं, और इस लेख में व्यक्त किए गए विचार उनके निजी हैं.)

 


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