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1 जून से लागू हो सकता है भारत-ओमान व्यापार समझौता, निर्यात को मिलेगी रफ्तार
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि ओमान की टीम के साथ हुई हालिया बैठक काफी सकारात्मक रही है और संभावना है कि भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता जून की शुरुआत से प्रभावी हो जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत और ओमान के बीच व्यापारिक रिश्ते जल्द ही एक नए चरण में प्रवेश कर सकते हैं. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA 1 जून 2026 से लागू हो सकता है. इस समझौते के लागू होने से भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में बड़ी राहत मिलेगी, जबकि दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है.
1 जून से लागू हो सकता है भारत-ओमान समझौता
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि ओमान की टीम के साथ हुई हालिया बैठक काफी सकारात्मक रही है और संभावना है कि भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौता जून की शुरुआत से प्रभावी हो जाएगा. यह समझौता दिसंबर 2025 में हस्ताक्षरित किया गया था और अब इसके क्रियान्वयन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं.
गोयल के अनुसार, ओमान का प्रतिनिधिमंडल इस समय भारत दौरे पर है, जहां दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को और मजबूत करने के विकल्पों पर चर्चा की जा रही है.
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस CEPA समझौते के तहत भारत के लगभग 98 प्रतिशत निर्यात को ओमान में शुल्क मुक्त पहुंच मिलने की संभावना है. इसमें वस्त्र, कृषि उत्पाद, चमड़ा और कई अन्य प्रमुख सेक्टर शामिल हैं. इससे भारतीय कंपनियों को ओमान के बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात लागत में कमी आएगी.
वहीं दूसरी ओर भारत भी ओमान से आने वाले कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क कम करेगा. इनमें खजूर, संगमरमर और पेट्रोकेमिकल उत्पाद प्रमुख रूप से शामिल हैं.
व्यापार के साथ निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच निवेश के नए अवसर भी पैदा करेगा. भारत और ओमान के बीच लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत हो सकती है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में भारत की आर्थिक मौजूदगी को भी इससे नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
चिली के साथ भी आगे बढ़ रही बातचीत
पीयूष गोयल ने चिली के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत और चिली के बीच आर्थिक आकार और अवसरों में अंतर होने के कारण कुछ चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन दोनों देश नए और व्यावहारिक समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं.
गोयल ने संकेत दिए कि यदि महत्वपूर्ण खनिजों और खनन रियायतों को लेकर सकारात्मक सहमति बनती है, तो चिली के साथ भी व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है.
भारत के लिए क्यों अहम है चिली समझौता
भारत और चिली पहले से ही 2006 से एक तरजीही व्यापार समझौते के तहत जुड़े हुए हैं. अब दोनों देश इसे विस्तार देकर व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं.
इस प्रस्तावित समझौते में डिजिटल सेवाएं, निवेश सहयोग, MSME सेक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है. चिली दुनिया के सबसे बड़े लिथियम भंडार वाले देशों में गिना जाता है और तांबे का प्रमुख उत्पादक भी है. ऐसे में यह समझौता भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा सेक्टर के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का कहना है कि ओमान और चिली जैसे देशों के साथ व्यापार समझौते भारत की वैश्विक आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं. इन समझौतों के जरिए भारत नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और निर्यात आधारित विकास को गति देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
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