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पश्चिम एशिया संकट और ईंधन महंगा होने से भारत में बढ़ी महंगाई: रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है. एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका असर हवाई किराए पर भी पड़ने लगा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत में अप्रैल 2026 के दौरान खुदरा महंगाई दर मामूली बढ़कर 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है. यह लगातार चौथा महीना है जब मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. Elara Securities की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य पदार्थों, शिक्षा और सेवाओं की बढ़ती लागत के कारण महंगाई पर दबाव बढ़ने लगा है.
मार्च के मुकाबले अप्रैल में बढ़ी महंगाई
मार्च 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति दर 3.4 प्रतिशत थी, जो अप्रैल में बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि वाणिज्यिक एलपीजी कीमतों में वृद्धि का असर रेस्तरां और होटल सेवाओं पर दिखाई देने लगा है. हालांकि कोर इंफ्लेशन अप्रैल में 3.4 प्रतिशत पर स्थिर रहा, जिससे संकेत मिलता है कि मांग आधारित दबाव फिलहाल नियंत्रित हैं.
खाद्य मुद्रास्फीति में फिर तेजी
अप्रैल में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 4 प्रतिशत हो गई, जबकि मार्च में यह 3.7 प्रतिशत थी. खाद्य तेल, फल, मछली और प्रोसेस्ड फूड की कीमतों में बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण रही. दूसरी ओर सब्जियों, दालों और कंद वाली फसलों की कीमतों में मासिक आधार पर गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान और मौसमी कारणों से आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ा ऊर्जा संकट
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल आया है. एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका असर हवाई किराए पर भी पड़ने लगा है.
इसी के साथ रेस्तरां की कीमतों में अप्रैल में 4.2 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मार्च में यह 2.88 प्रतिशत थी. इसका कारण एलपीजी की ऊंची कीमतें और फूड डिलीवरी कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए प्लेटफॉर्म शुल्क बताए गए हैं.
पेट्रोल-डीजल महंगे होने का खतरा
Elara Securities ने चेतावनी दी है कि यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो महंगाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार ईंधन कीमतों में 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि से हेडलाइन इंफ्लेशन में लगभग 47 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है. सप्लाई चेन और सेवाओं पर इसके दूसरे चरण के प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं.
एल नीनो का भी मंडरा रहा खतरा
रिपोर्ट में संभावित एल नीनो मौसम पैटर्न को भी बड़ा जोखिम बताया गया है. इससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और खाद्य कीमतों में तेजी आ सकती है. सप्लाई चेन बाधाओं और बढ़ती उत्पादन लागत के साथ मिलकर यह स्थिति आने वाली तिमाहियों में महंगाई के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है.
आरबीआई फिलहाल रख सकता है सतर्क रुख
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल ब्याज दरों पर सतर्क रुख बनाए रख सकता है. केंद्रीय बैंक ऊर्जा लागत, रुपये की कमजोरी और बढ़ती इनपुट लागत के असर पर करीबी नजर रखेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक महंगाई लगातार 6 प्रतिशत से ऊपर नहीं रहती, तब तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम है.
वित्त वर्ष 2027 में बढ़ सकते हैं जोखिम
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 4.8 से 4.9 प्रतिशत के बीच बरकरार रखा गया है. हालांकि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई जोखिम और बढ़ सकते हैं.
रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार फिलहाल महंगाई नियंत्रण में दिखाई दे रही है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु संबंधी जोखिम आने वाले महीनों में मूल्य स्थिरता और नीतिगत लचीलेपन की बड़ी परीक्षा ले सकते हैं.
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